15 सितंबर तक फॉर्म-6 से कर सकेंगे आवेदन, स्कूल-कॉलेजों में चलेगा विशेष अभियान; फर्जी वंशावली से नाम जुड़वाने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी

रांची: झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के दौरान नए मतदाताओं को जोड़ने की प्रक्रिया में कई बूथों से बेहद कम आवेदन सामने आए हैं। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के रविकुमार ने मतदान केंद्रवार फॉर्म-6 की समीक्षा की, तो राज्य के 6,722 बूथों पर अब तक एक भी फॉर्म-6 आवेदन नहीं मिला। इसे गंभीरता से लेते हुए उन्होंने जिला निर्वाचन पदाधिकारियों को बूथवार स्थिति की दोबारा समीक्षा करने का निर्देश दिया है।
सबसे ज्यादा चिंता राजधानी रांची को लेकर सामने आई है। जिले के 1,209 मतदान केंद्रों पर अब तक एक भी नया आवेदन नहीं आया है। इसके बाद पलामू के 592, हजारीबाग के 572, गिरिडीह के 416 और धनबाद के 392 मतदान केंद्रों पर भी फॉर्म-6 की संख्या शून्य है।
कई बूथों पर पांच से भी कम आवेदन
सिर्फ शून्य आवेदन वाले बूथ ही नहीं, बल्कि ऐसे मतदान केंद्रों की संख्या भी काफी अधिक है जहां अब तक महज एक से पांच फॉर्म-6 मिले हैं। धनबाद में ऐसे 1,243, गिरिडीह में 1,072, रांची में 981, पलामू में 936 और हजारीबाग में 814 मतदान केंद्र हैं।
इन आंकड़ों के बाद निर्वाचन विभाग ने अधिकारियों से हर मतदान केंद्र की स्थिति की बारीकी से जांच करने को कहा है। मकसद यह सुनिश्चित करना है कि 18 वर्ष की उम्र पूरी कर चुके कोई भी पात्र नागरिक मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने से वंचित न रह जाए।
15 सितंबर तक नए वोटर कर सकते हैं आवेदन
SIR के तहत मतदाता सूची का ड्राफ्ट 5 अगस्त 2026 को प्रकाशित किया गया था। इसके बाद पात्र नागरिकों से फॉर्म-6 और निर्धारित घोषणा-पत्र के जरिए नाम जोड़ने के लिए आवेदन लिए जा रहे हैं।
1 अक्टूबर 2026 को अर्हता तिथि माना गया है। यानी इस तारीख तक 18 वर्ष की उम्र पूरी करने वाले पात्र भारतीय नागरिक मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज करा सकते हैं। SIR के तहत फॉर्म-6 के माध्यम से आवेदन करने की अंतिम तारीख 15 सितंबर 2026 निर्धारित है।
हर बूथ पर करीब 60 आवेदन की उम्मीद
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के मुताबिक, विधानसभा चुनाव 2024 के बाद करीब दो साल का समय बीत चुका है। राज्य में मतदाताओं की संख्या में हर साल लगभग चार प्रतिशत की वृद्धि को देखते हुए प्रत्येक मतदान केंद्र से औसतन करीब 60 फॉर्म-6 आने का अनुमान है।
ऐसे में कई बूथों पर एक भी आवेदन नहीं आना या बेहद कम आवेदन मिलना निर्वाचन विभाग के लिए चिंता का विषय है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे ऐसे बूथों की वजह पता करें और पात्र लोगों को मतदाता सूची से जोड़ने की प्रक्रिया तेज करें।
घर-घर जाकर नए वोटरों की पहचान
बीएलओ को होम-टू-रोल सत्यापन के दौरान घर-घर जाकर नए और युवा पात्र नागरिकों की पहचान करने को कहा गया है। इसके अलावा स्कूल और कॉलेजों में भी विशेष जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।
18 वर्ष की उम्र पूरी करने वाले युवाओं को मतदाता पंजीकरण के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। उन्हें ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी भी दी जाएगी।
फर्जी वंशावली से नाम जुड़वाया तो कार्रवाई
SIR के दौरान दस्तावेजों की जांच को लेकर निर्वाचन विभाग ने एक और महत्वपूर्ण चेतावनी दी है। किसी दूसरे परिवार के खतियान या वंशावली में अपना नाम जोड़कर खुद को उस परिवार का सदस्य या वंशज बताने की कोशिश करने वालों पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के रविकुमार ने स्पष्ट किया है कि किसी गैर-पारिवारिक व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति की वंशावली या खतियान में वंशज के तौर पर शामिल नहीं किया जाना चाहिए। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मतदाता सूची में नाम जुड़वाने की कोशिश को महज दस्तावेजी गलती नहीं माना जाएगा।
गलत जानकारी देने पर हो सकती है सजा
निर्वाचन विभाग के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर गलत वंशावली या अन्य दस्तावेज के आधार पर अपना या किसी अपात्र व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में शामिल कराने की कोशिश करता है, तो इसे चुनावी प्रक्रिया में गलत सूचना देने के तौर पर देखा जा सकता है।
इसके अलावा किसी विदेशी नागरिक को मतदाता सूची में शामिल कराने का प्रयास भी नियमों के खिलाफ है। लोकप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 16 के तहत गैर-भारतीय नागरिक मतदाता सूची में पंजीकरण के लिए पात्र नहीं है। वहीं, गलत घोषणा या गलत जानकारी देने के मामलों में धारा 31 के तहत कार्रवाई का प्रावधान है।
निर्वाचन विभाग ने लोगों से अपील की है कि SIR के दौरान केवल वास्तविक और सही दस्तावेज ही जमा करें। वहीं अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि पात्र नए मतदाताओं को जोड़ने के साथ-साथ फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल पर भी नजर रखी जाए।

