JSSC-CGL नियुक्ति रद्द होने के बाद चयनित अभ्यर्थियों का प्रदर्शन तेज, आमरण अनशन की चेतावनी

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बारिश के बीच प्रोजेक्ट भवन के बाहर डटे कर्मचारी, बोले- ‘मेरिट से मिली नौकरी एक फैसले में कैसे छीनी जा सकती है?

रांची: JSSC-CGL नियुक्ति रद्द किए जाने के फैसले के बाद चयनित अभ्यर्थियों और कर्मचारियों का विरोध तेज हो गया है। राजधानी रांची में लगातार बारिश के बावजूद प्रदर्शनकारी प्रोजेक्ट भवन के बाहर डटे हुए हैं। उनका कहना है कि नियुक्ति रद्द होने से करीब 2000 चयनित कर्मचारियों के सामने रोजगार और भविष्य को लेकर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि उन्हें नियुक्ति रद्द किए जाने की अब तक लिखित जानकारी नहीं दी गयी है। उन्होंने सरकार से फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है।

‘मेरिट के आधार पर मिली थी नौकरी, अचानक कैसे खत्म कर दी?’

प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि JSSC-CGL की भर्ती प्रक्रिया लंबी कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया से होकर गुजरी। उनका दावा है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सरकार ने नियुक्तियां की थीं। ऐसे में अब पूरी नियुक्ति प्रक्रिया को रद्द करने के फैसले पर वे सवाल उठा रहे हैं। एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि अभ्यर्थियों ने वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी की और मेरिट के आधार पर चयन हासिल किया। ऐसे में अचानक नियुक्ति रद्द होने से उनके सामने भविष्य का संकट खड़ा हो गया है।

‘अगर दोषी कोई है तो कार्रवाई उसी पर हो’

कर्मचारियों ने नियुक्ति आदेश में शामिल शर्तों का हवाला देते हुए कहा कि यदि जांच में कोई अभ्यर्थी व्यक्तिगत रूप से अनियमितता में दोषी पाया जाता है, तो उसकी नियुक्ति पर कार्रवाई की जा सकती है। प्रदर्शनकारियों का सवाल है कि यदि कुछ लोगों पर गड़बड़ी के आरोप हैं, तो पूरी नियुक्ति प्रक्रिया को रद्द करने के बजाय दोषी व्यक्तियों की पहचान कर कार्रवाई क्यों नहीं की गयी।

करीब 2000 कर्मचारियों के भविष्य पर असर का दावा

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि नियुक्ति रद्द होने का असर करीब 2000 कर्मचारियों और उनके परिवारों पर पड़ेगा। उनका आरोप है कि किसी एक मामले या परीक्षा में कथित अनियमितता के कारण पूरी चयन प्रक्रिया को प्रभावित करना उचित नहीं है। हालांकि, परीक्षा और नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर सरकार और जांच एजेंसियों का पक्ष अलग है। सरकार ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार और कथित अनियमितताओं की जांच को लेकर आगे की कार्रवाई की बात कही है।

कई लोगों ने पुरानी नौकरी छोड़कर किया था ज्वाइन

प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों के अनुसार, चयनित अभ्यर्थियों में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की थी, जो पहले से नौकरी कर रहे थे। कुछ अभ्यर्थियों के पास केंद्र सरकार, रेलवे या दूसरे राज्यों में रोजगार था। झारखंड में नियुक्ति मिलने के बाद उन्होंने बेहतर अवसर और अपने गृह राज्य में सेवा करने की उम्मीद में पुरानी नौकरी छोड़ दी। अब नियुक्ति रद्द होने के बाद इन कर्मचारियों के सामने दोहरी चुनौती खड़ी हो गयी है। एक तरफ वर्तमान सरकारी नौकरी चली गयी, वहीं पुरानी नौकरी में वापस लौटना भी आसान नहीं है।

कर्मचारियों का दावा- करीब आधे अभ्यर्थी पहले से थे नौकरी में

प्रदर्शनकारियों का दावा है कि करीब 2000 चयनित कर्मचारियों में लगभग आधे लोग नियुक्ति से पहले किसी न किसी नौकरी में कार्यरत थे। उनका कहना है कि JSSC-CGL में चयन के बाद उन्होंने पुरानी नौकरी छोड़कर झारखंड सरकार की सेवा स्वीकार की थी।

‘सरकार या परीक्षा एजेंसी की गलती की सजा हमें क्यों?’

प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि परीक्षा आयोजित कराने, उसकी निगरानी और सुरक्षा की जिम्मेदारी संबंधित व्यवस्था की होती है। यदि प्रक्रिया में कहीं गड़बड़ी हुई है, तो उसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उनका सवाल है कि परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितता की सजा उन अभ्यर्थियों को क्यों मिले, जिन्होंने परीक्षा में शामिल होकर मेरिट के आधार पर सफलता हासिल की?

अब न्यायालय जाने की तैयारी

सरकार के फैसले के खिलाफ चयनित कर्मचारियों ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की बात कही है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्हें अब न्यायपालिका से उम्मीद है और वे अपनी नियुक्ति एवं सेवा से जुड़े अधिकारों को लेकर कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।

बारिश के बीच आंदोलन जारी, आमरण अनशन की चेतावनी

रांची में लगातार बारिश के बावजूद प्रदर्शन जारी है। चयनित कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने नियुक्ति रद्द करने के फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने आमरण अनशन शुरू करने की चेतावनी दी है। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक वे आंदोलन जारी रखेंगे।

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