Jharkhand SIR: करीब 4 हजार आदिवासियों ने नहीं भरा Enumeration Form, जानिए क्यों बनाई दूरी

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रांची, खूंटी, पाकुड़ और लातेहार में सामने आए मामले; आयोग डोर-टू-डोर अभियान चलाकर लोगों को प्रक्रिया में शामिल होने के लिए कर रहा जागरूक

रांची: झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR-2026 को लेकर एक अहम मामला सामने आया है। राज्य में करीब 4 हजार आदिवासी लोगों के अब तक SIR प्रक्रिया में शामिल नहीं होने की जानकारी सामने आई है। इन लोगों ने Enumeration Form नहीं भरा है और दावा-आपत्ति की प्रक्रिया में भी हिस्सा नहीं लिया है।

निर्वाचन आयोग ऐसे लोगों का अलग से रिकॉर्ड तैयार कर रहा है। आयोग की कोशिश है कि इन लोगों की जानकारी सुरक्षित रहे और उन्हें मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया के बारे में समझाकर आगे जोड़ा जा सके।

SIR से दूरी की वजह क्या है?

मामले को केवल फॉर्म नहीं भरने से जोड़कर नहीं देखा जा रहा है। कई आदिवासी समूहों के बीच SIR को लेकर अविश्वास और आशंकाएं भी सामने आई हैं।

कुछ लोगों का कहना है कि उनकी पहचान, जमीन और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े सवालों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा है। इन्हीं मुद्दों को लेकर कुछ समुदायों ने फिलहाल SIR प्रक्रिया में शामिल होने से दूरी बनाए रखी है।

रांची और खूंटी क्षेत्र में रहने वाले मुंडा समुदाय के ‘एसी समाज’ से जुड़े 2,200 से अधिक लोगों ने जुलाई के मध्य में Enumeration Form भरने से इनकार किया था। बूथ लेवल अधिकारी यानी BLO और प्रशासन की ओर से संपर्क करने की कोशिश के बावजूद कई लोग अपने फैसले पर कायम रहे।

इसी तरह रांची में रहने वाले उरांव समुदाय के कुछ लोगों के भी SIR प्रक्रिया में शामिल नहीं होने की जानकारी सामने आई है।

किन जिलों में सामने आए मामले?

निर्वाचन अधिकारियों के मुताबिक, SIR से दूरी बनाने वाले लोगों के मामले रांची, खूंटी, पाकुड़ और लातेहार में सामने आए हैं। इसके अलावा 17 अगस्त को धनबाद में भी छह मामले सामने आने की जानकारी है।

हालांकि, करीब 4 हजार का आंकड़ा पूरे झारखंड में SIR के बहिष्कार का आंकड़ा नहीं है। यह उन मामलों से जुड़ा आंकड़ा है, जिनमें निर्वाचन प्रक्रिया के दौरान लोगों के SIR में शामिल नहीं होने की जानकारी सामने आई है।

आयोग लोगों को कैसे समझा रहा?

झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार के मुताबिक, ऐसे लोगों की जानकारी निर्वाचन रिकॉर्ड में सुरक्षित रखी जा रही है। इसका उद्देश्य भविष्य में उनके संबंध में रिकॉर्ड उपलब्ध रखना और उन्हें मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए प्रेरित करना है।

इसके लिए प्रशासन और BLO की ओर से डोर-टू-डोर अभियान भी चलाया जा रहा है। अधिकारी लोगों से व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर SIR की प्रक्रिया और इसके महत्व के बारे में जानकारी दे रहे हैं।

Enumeration Form नहीं भरा तो क्या होगा?

SIR प्रक्रिया में Enumeration Form की अहम भूमिका है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के मुताबिक, यदि कोई व्यक्ति Enumeration Form नहीं भरता और दावा-आपत्ति की अवधि में Form-6 के माध्यम से मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए आवेदन भी नहीं करता, तो उसका नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाएगा। यही वजह है कि निर्वाचन आयोग ऐसे लोगों को प्रक्रिया में शामिल होने के लिए लगातार जागरूक कर रहा है।

पहले भी सामने आया था विरोध

झारखंड में SIR शुरू होने के बाद खूंटी जिले के एक गांव में आदिवासी समुदाय के लोगों द्वारा प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लेने का मामला सामने आया था। इसके बाद रांची और खूंटी में रहने वाले एसी समाज के 2,200 से अधिक लोगों द्वारा Enumeration Form नहीं भरने की जानकारी सामने आई। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने खुद खूंटी पहुंचकर कुछ लोगों से बातचीत की थी। हालांकि, बातचीत के बाद भी समुदाय के कुछ लोग अपने फैसले पर कायम रहे।

अब ऐसे मामलों की संख्या करीब 4 हजार तक पहुंचने की जानकारी सामने आने के बाद निर्वाचन आयोग के सामने दोहरी चुनौती है—एक तरफ मतदाता सूची को निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपडेट करना और दूसरी तरफ लोगों के बीच SIR को लेकर मौजूद आशंकाओं को दूर करना।

झारखंड में SIR क्यों है महत्वपूर्ण?

झारखंड में SIR-2026 के तहत मतदाता सूची के सत्यापन और पुनरीक्षण की प्रक्रिया चल रही है। इस अभियान में BLO को घर-घर जाकर मतदाताओं को Enumeration Form उपलब्ध कराने और उपलब्ध जानकारी का सत्यापन करने की जिम्मेदारी दी गई है।

ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने के बाद बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने की जानकारी भी सामने आई थी। इनमें मृत, स्थानांतरित और अन्य कारणों से सूची से बाहर किए गए मतदाता शामिल हैं। ऐसे में आदिवासी समुदाय के करीब 4 हजार लोगों का SIR प्रक्रिया से अलग रहना इस पूरी कवायद में एक सामाजिक और प्रशासनिक पहलू जोड़ता है।

आगे क्या होगा?

अब निर्वाचन आयोग की नजर उन लोगों पर है, जिन्होंने SIR प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लिया है। आयोग का कहना है कि उनकी जानकारी रिकॉर्ड में रखी जा रही है और उन्हें लगातार प्रक्रिया में शामिल होने के लिए समझाया जा रहा है। वहीं, SIR से दूरी बनाने वाले कुछ आदिवासी समूहों की चिंताएं केवल चुनावी प्रक्रिया तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पहचान, जमीन और राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों से भी जुड़ी बताई जा रही हैं।

अब देखना होगा कि आयोग की डोर-टू-डोर मुहिम के बाद इन लोगों में से कितने लोग Enumeration Form या Form-6 के जरिए मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने के लिए आगे आते हैं।

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