Jharkhand Ranger Recruitment: 26 साल बाद रेंजर भर्ती की उम्मीद फिर टूटी, JPSC ने परीक्षा की रद्द

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383 स्वीकृत पदों के मुकाबले सिर्फ 61 रेंजर कार्यरत, 23,765 वर्ग किमी वन क्षेत्र की सुरक्षा पर बढ़ी चुनौती

रांची। झारखंड में वन क्षेत्र की सुरक्षा के लिए रेंजरों की कमी लंबे समय से बड़ी चुनौती बनी हुई है। इसी बीच करीब 26 साल बाद रेंजरों की नियुक्ति की उम्मीद एक बार फिर टूट गई है। राज्य सरकार ने JPSC के माध्यम से चल रही रेंजर नियुक्ति परीक्षा को रद्द कर दिया है।

झारखंड में करीब 23,765 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र है। इसकी निगरानी और सुरक्षा के लिए रेंजरों के 383 पद स्वीकृत हैं, लेकिन फिलहाल सिर्फ 61 रेंजर कार्यरत हैं। यानी स्वीकृत पदों की तुलना में करीब 16 प्रतिशत रेंजर ही तैनात हैं।

पड़ोसी राज्यों से काफी पीछे झारखंड

रेंजरों की तैनाती के मामले में झारखंड पड़ोसी राज्यों की तुलना में काफी पीछे है। छत्तीसगढ़ में स्वीकृत पदों के मुकाबले करीब 58 प्रतिशत, ओडिशा में 80.9 प्रतिशत और बिहार में 79.3 प्रतिशत रेंजर कार्यरत हैं। उत्तराखंड में भी यह आंकड़ा करीब 66.2 प्रतिशत है। ऐसे में झारखंड में रेंजरों की भारी कमी वन क्षेत्र की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है।

एक रेंजर के जिम्मे कई रेंज

रेंजरों की कमी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई अधिकारियों को एक साथ कई रेंज की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है। रांची में फिलहाल सिर्फ एक रेंजर गायत्री देवी पदस्थापित हैं। उनके जिम्मे करीब 18 रेंज और लगभग 800 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र है। इनमें गुमला जिले के कुछ क्षेत्र भी शामिल हैं। इसके अलावा बिरसा मुंडा जू, प्रशिक्षण केंद्र और प्रचार-प्रसार से जुड़े कार्यों की जिम्मेदारी भी उनके पास है। बताया गया है कि वह जनवरी 2027 में सेवानिवृत्त होने वाली हैं।

वहीं, रांची के वन प्रमंडल पदाधिकारी के जिम्मे भी करीब 700 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र वाली चार रेंज हैं। राज्य के दूसरे जिलों में भी कमोबेश ऐसी ही स्थिति बताई जा रही है।

अवैध कटाई और शिकार पर निगरानी की चुनौती

वन विभाग में रेंजरों की कमी का सीधा असर जंगलों की निगरानी पर पड़ रहा है। अधिकारियों पर अतिरिक्त प्रभार होने के कारण नियमित पेट्रोलिंग और वन क्षेत्र की निगरानी चुनौतीपूर्ण हो जाती है। ऐसी स्थिति में अवैध पेड़ कटाई, वन्यजीवों के शिकार और अवैध पत्थर खनन जैसी गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण बनाए रखना विभाग के लिए मुश्किल हो सकता है।

दो साल से चल रही थी नियुक्ति प्रक्रिया

रेंजरों की नियुक्ति प्रक्रिया करीब दो साल से चल रही थी। नियमावली तैयार होने के बाद वन विभाग ने अप्रैल 2024 में JPSC से रेंजरों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने का आग्रह किया था। इसके बाद परीक्षा प्रक्रिया आगे बढ़ी और मुख्य परीक्षा का परिणाम भी जारी किया गया। अगस्त में शारीरिक परीक्षा की तैयारी चल रही थी। इसी बीच JPSC से जुड़े विवाद के कारण पूरी परीक्षा प्रक्रिया रद्द कर दी गई। यानी लंबे इंतजार के बाद शुरू हुई भर्ती प्रक्रिया अब फिर अधर में लटक गई है।

वन विभाग ने क्या कहा?

झारखंड के वन सचिव अबु बक्कर सिद्दीख ने कहा कि कर्मचारियों की कमी से निश्चित रूप से परेशानी होती है। हालांकि, विभाग में मौजूद अधिकारी-कर्मचारियों के साथ वन प्रबंधन समितियों की मदद से वन सुरक्षा और विकास का काम जारी रखा जा रहा है।

उन्होंने बताया कि विभाग की ओर से JPSC को रेंजर और ACF की नियुक्ति के लिए आग्रह किया गया था और प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी थी। फिलहाल रेंजर भर्ती की प्रक्रिया रद्द हो गई है।

झारखंड में रेंजरों की स्थिति

राज्यवन क्षेत्रस्वीकृत पदकार्यरत रेंजरतैनाती
झारखंड23,765 वर्ग किमी3836115.9%
छत्तीसगढ़59,816 वर्ग किमी48928558%
ओडिशा61,204 वर्ग किमी60949380.9%
बिहार7,442 वर्ग किमी1169279.3%
उत्तराखंड38,000 वर्ग किमी30820466.2%

झारखंड में रेंजरों की कमी और भर्ती प्रक्रिया के बार-बार अटकने से वन सुरक्षा व्यवस्था के सामने चुनौती और बढ़ गई है। अब निगाह इस बात पर है कि रद्द हुई भर्ती प्रक्रिया को दोबारा कब शुरू किया जाता है और वन विभाग में खाली पदों को भरने के लिए सरकार क्या कदम उठाती है।

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