झारखंड सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। जल जीवन मिशन 2.0 के तहत राज्य की प्रत्येक पंचायत में तीन-तीन नल जल मित्रों का चयन किया जाएगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में जलापूर्ति योजनाओं के संचालन और रखरखाव को मजबूती मिलेगी।
एपेक्स कमेटी की बैठक में प्रस्ताव को मंजूरी
मुख्य सचिव अविनाश कुमार की अध्यक्षता में आयोजित एपेक्स कमेटी की बैठक में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई। इस पहल के तहत राज्य की लगभग 4,345 पंचायतों में 13 हजार से अधिक नल जल मित्रों को रोजगार मिलने का रास्ता साफ होगा। साथ ही, ग्रामीण परिवारों को नियमित और गुणवत्तापूर्ण पेयजल उपलब्ध कराने में भी मदद मिलेगी।
प्रशिक्षण से निखरेगा कौशल
योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए चयनित अभ्यर्थियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। नए अभ्यर्थियों के लिए 510 घंटे का अल्पकालिक प्रशिक्षण निर्धारित किया गया है, जबकि पहले से अनुभवी लोगों को 120 घंटे का कौशल उन्नयन प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे जलापूर्ति योजनाओं के संचालन, रखरखाव और तकनीकी समस्याओं के समाधान में उनकी दक्षता बढ़ेगी।
उपायुक्तों को जारी होंगे दिशा-निर्देश
योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए राज्य सरकार की ओर से सभी उपायुक्तों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। इसमें पंचायती राज और श्रम विभाग की भी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ चयन, प्रशिक्षण और योजना के संचालन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएंगे।
डिजिटल निगरानी के लिए बनेंगे कमांड सेंटर
जलापूर्ति व्यवस्था की निगरानी और डिजिटल डेटा गवर्नेंस को सुदृढ़ करने के लिए राज्य एवं जिला स्तर पर कमांड एंड सपोर्ट सेंटर स्थापित किए जाएंगे। इन केंद्रों को ‘झारखंड जल पोर्टल’ से जोड़ा जाएगा, जिससे योजनाओं की निगरानी और संचालन को अधिक व्यवस्थित बनाया जा सकेगा।
16वें वित्त आयोग के अनुदान से होगा भुगतान
चयनित नल जल मित्रों के मानदेय और कौशल प्रशिक्षण के लिए 16वें वित्त आयोग के टाइड ग्रांट का उपयोग किया जाएगा। सरकार की इस पहल से एक ओर ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, वहीं दूसरी ओर गांवों में पेयजल आपूर्ति योजनाओं के नियमित संचालन और रखरखाव को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।





