
Jharkhand High Court: ट्रेन हादसे में टिकट नहीं मिलने पर भी मिलेगा मुआवजा, रेलवे को 8 लाख देने का आदेश
रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने ट्रेन दुर्घटना में यात्री की मौत के बाद शव या उसके पास रेलवे टिकट नहीं मिलने के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल टिकट नहीं मिलने के आधार पर मृतक के परिजनों के मुआवजे के दावे को खारिज नहीं किया जा सकता। अदालत ने रेलवे को मृतक के आश्रितों को आठ लाख रुपये का मुआवजा छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ देने का निर्देश दिया है।
रेलवे दावा अधिकरण का आदेश निरस्त
हाईकोर्ट ने रेलवे दावा अधिकरण के 12 सितंबर 2023 को पारित उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें मुआवजे की अर्जी खारिज कर दी गई थी। अदालत ने कल्याणकारी कानूनों की भावना को ध्यान में रखते हुए मामले में मृतक के परिजनों को राहत प्रदान की।
बानमाली गोप की रेल दुर्घटना में हुई थी मौत
यह मामला पश्चिमी सिंहभूम निवासी बानमाली गोप की रेल दुर्घटना में हुई मौत से जुड़ा है। परिजनों ने रेलवे दावा अधिकरण के फैसले को चुनौती देते हुए झारखंड हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी की अदालत में हुई।
केंदपोसी स्टेशन के पास ट्रेन से गिर गए थे बानमाली
मामले के अनुसार, एक सितंबर 2017 को बानमाली गोप झींकपानी स्टेशन से टाटा-बड़बिल पैसेंजर ट्रेन में सवार हुए थे। उन्हें केंदपोसी स्टेशन जाना था। ट्रेन में अत्यधिक भीड़ होने के कारण वह दरवाजे के पास खड़े थे।
केंदपोसी स्टेशन के नजदीक अचानक उनका संतुलन बिगड़ गया और वह चलती ट्रेन से नीचे गिर पड़े। ट्रेन की चपेट में आने से उनके दोनों पैर कट गए और घटनास्थल पर ही उनकी मौत हो गई।
आश्रितों को मुआवजे की उम्मीद
दुर्घटना के बाद मृतक के परिजनों ने मुआवजे के लिए रेलवे दावा अधिकरण में आवेदन दिया था, लेकिन अधिकरण ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद परिजनों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
हाईकोर्ट के फैसले से स्पष्ट संदेश मिला है कि केवल रेलवे टिकट नहीं मिलने के आधार पर दुर्घटना में मृत यात्री के आश्रितों को मुआवजे से वंचित नहीं किया जा सकता।




