झारखंड Medical Colleges: फर्जी प्रमाण पत्रों पर NEET-UG नामांकन का बड़ा रैकेट, CID ने रिम्स के दस्तावेज जब्त किए
झारखंड के प्रतिष्ठित रिम्स समेत अन्य झारखंड मेडिकल कॉलेजों Jharkhand medical colleges में फर्जी प्रमाण पत्रों के सहारे नीट-यूजी में नामांकन कराने का एक बड़ा रैकेट सामने आया है . तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय कमेटी की प्रारंभिक जांच के बाद अब CID इस पूरे मामले की तह तक जाने में जुट गई है . जांच में क्लर्क से लेकर वेरिफिकेशन करने वाले अधिकारी तक सभी के घेरे में आ गए हैं.
तीन छात्राओं के जाति प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए
कमेटी की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. जांच के दौरान गोड्डा की सुचारिता दत्ता, गिरिडीह की काजल तथा भावनी के जाति प्रमाणपत्रों को संबंधित जिलों के उपायुक्तों ने फर्जी करार दिया है . इन फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर झारखंड मेडिकल कॉलेजों Jharkhand medical colleges में दाखिला ले लिया गया था . रिम्स ने पिछले साल ही काजल का नामांकन रद्द कर दिया था जब उसका फर्जी SC प्रमाण पत्र पकड़ा गया था .
पिछले साल नवंबर में ही हुई थी जांच की अनुशंसा
स्वास्थ्य विभाग ने 19 नवंबर 2025 को एक तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया था . इस कमेटी ने सत्र 2025-26 में नीट-यूजी (NEET-UG) के तहत हुए नामांकनों की शुरुआती जांच की और किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की सिफारिश की . इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने 27 नवंबर 2025 को ही गृह विभाग के प्रधान सचिव को पत्र भेजकर CID जांच का अनुरोध किया था .
JCECEB को क्लीन चिट, कॉलेजों पर जिम्मेदारी
जांच कमेटी ने झारखंड संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा पर्षद (JCECEB) को इस मामले में क्लीन चिट दे दी है . कमेटी का कहना है कि पर्षद द्वारा ऑनलाइन काउंसिलिंग प्रक्रिया अपनाई जाती है, जिसके कारण वहां भौतिक रूप से प्रमाण पत्रों की गहनता से जांच करना संभव नहीं था . नियमों के मुताबिक, दाखिले के समय दस्तावेजों के असली होने की अंतिम जांच और सत्यापन की पूरी जिम्मेदारी संबंधित झारखंड मेडिकल कॉलेजों Jharkhand medical colleges की थी .
क्लर्क से लेकर सत्यापन करने वाले तक जांच के दायरे में
CID की जांच अब रिम्स और अन्य झारखंड मेडिकल कॉलेजों Jharkhand medical colleges के उस स्टाफ की तरफ घूम गई है, जिन्होंने दाखिले के वक्त इन कागजातों को सही ठहराया था . CID इस बात की तफ्तीश कर रही है कि जब जिलों के DC ने इन प्रमाण पत्रों को फर्जी बताया, तो कॉलेज के क्लर्क और वेरिफिकेशन टीम ने इन्हें कैसे सत्यापित कर दिया . जांच एजेंसी को इस मामले में किसी बड़े सिंडिकेट और पैसे के लेनदेन का भी अंदेशा है.
संदिग्धों के बयान दर्ज करेगी CID, जल्द होगी प्राथमिकी
CID के अधिकारियों ने रिम्स से नामांकन से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और फाइलें जब्त कर ली हैं . प्रारंभिक जांच में मिले पुख्ता सबूतों के आधार पर CID थाना में जल्द ही इस मामले को लेकर एक औपचारिक प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जा सकती है . इसके साथ ही, CID इस रैकेट में शामिल संदिग्धों, फर्जी तरीके से नामांकन लेने वाले अभ्यर्थियों और उनके परिजनों को समन भेजकर उनके बयान दर्ज करने की तैयारी कर रही है .
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