झारखंड में सूखे का संकट काफी हद तक टला, 70% खेतों में पहुंची धान की रोपाई; पलामू-गढ़वा अब भी चिंता

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राज्य में धान की खेती के लक्ष्य का 69.44% कवरेज पूरा, मक्का 76% और दलहन 75% क्षेत्र में बोई गई; पलामू में बारिश की कमी से सबसे ज्यादा परेशानी

रांची। झारखंड में खरीफ फसल सीजन 2026-27 के दौरान खेती-किसानी का काम लगातार आगे बढ़ रहा है। राज्य के ज्यादातर जिलों में बारिश की स्थिति में सुधार के बाद सूखे का संकट काफी हद तक टल गया है। हालांकि पलामू और गढ़वा में अब भी बारिश की कमी के कारण खेती की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

कृषि निदेशालय की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में धान की खेती के निर्धारित लक्ष्य का करीब 70 प्रतिशत हिस्सा कवर हो चुका है। अगले करीब 15 दिनों तक धान की रोपाई जारी रहने की संभावना है। खास बात यह है कि जुलाई में सामान्य से काफी कम बारिश के बावजूद किसानों ने धान की बुआई और रोपाई में तेजी दिखाई है।

18.04 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य में 12.52 लाख हेक्टेयर कवर

झारखंड में इस खरीफ सीजन में 18.04 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती का लक्ष्य तय किया गया है। इसके मुकाबले अब तक 12.52 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान का कवरेज पूरा हो चुका है, जो लक्ष्य का 69.44 प्रतिशत है। इसमें करीब 2.14 लाख हेक्टेयर में धान की सीधी बुआई हुई है, जबकि 10.38 लाख हेक्टेयर में रोपाई पूरी की जा चुकी है।

जुलाई में राज्य में सामान्य 319.4 मिमी बारिश के मुकाबले महज 102.2 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई। यह सामान्य बारिश का लगभग 32 प्रतिशत है। अगस्त की शुरुआत में भी बारिश का आंकड़ा औसत से नीचे रहा है।

मक्का और दलहन की खेती भी तेज

धान के अलावा मक्का और दलहन की खेती ने भी अच्छी प्रगति दर्ज की है। कृषि विभाग के मुताबिक, राज्य में निर्धारित लक्ष्य के 76.01 प्रतिशत क्षेत्र में मक्का बोया जा चुका है। वहीं, दलहन की खेती का कवरेज 75.37 प्रतिशत तक पहुंच गया है। हालांकि तिलहन की बुआई अभी करीब 40 प्रतिशत लक्ष्य तक ही पहुंच पाई है। मोटे अनाज का कवरेज 56.53 प्रतिशत दर्ज किया गया है।

संताल परगना में सबसे बेहतर धान रोपाई

प्रमंडलवार आंकड़ों पर नजर डालें तो संताल परगना में धान की रोपाई सबसे बेहतर स्थिति में है। यहां निर्धारित लक्ष्य के करीब 77 प्रतिशत क्षेत्र में रोपाई पूरी हो चुकी है।

जिलों की बात करें तो देवघर में 92.95 प्रतिशत और दुमका में 83.73 प्रतिशत धान का कवरेज दर्ज किया गया है। इसके मुकाबले पलामू प्रमंडल में धान की रोपाई सबसे कम 26.81 प्रतिशत रही।

पलामू में जुलाई में सामान्य से 80% कम बारिश

पलामू में बारिश की कमी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। जुलाई 2026 में जिले में सामान्य 344.7 मिमी बारिश के मुकाबले सिर्फ 69.2 मिमी बारिश दर्ज की गई। यह सामान्य वर्षा का महज 20.08 प्रतिशत है। 1 से 12 अगस्त के बीच भी पलामू में स्थिति बेहतर नहीं हुई। इस दौरान राज्य में औसतन 81.4 मिमी बारिश हुई, जबकि पलामू में सिर्फ 12.3 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। पलामू में धान की सीधी बुआई का क्षेत्र भी शून्य बताया गया है। यहां धान की खेती मुख्य रूप से रोपाई पर निर्भर है, जिसके लिए पर्याप्त पानी जरूरी है।

पलामू-गढ़वा के लिए सरकार बनाएगी अलग रणनीति

कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि पलामू और गढ़वा में खेती की स्थिति अभी संतोषजनक नहीं है। राज्य सरकार इन दोनों क्षेत्रों पर विशेष नजर रख रही है। उन्होंने कहा कि किसानों की स्थिति को देखते हुए सरकार अल्पकालीन के साथ-साथ दीर्घकालीन योजना तैयार कर रही है। किसानों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकार हर संभव कदम उठाएगी।

अगस्त में अच्छी बारिश की उम्मीद

प्रभारी मौसम केंद्र, रांची के अभिषेक आनंद के मुताबिक, मौसम पर अल नीनो का प्रभाव अभी भी बना हुआ है, जिसके कारण उम्मीद के मुताबिक बारिश नहीं हो पा रही है। उन्होंने बताया कि चीन के आसपास बने तूफान का असर भी नमी के प्रवाह पर पड़ रहा है।

हालांकि मौसम विभाग को अगस्त में बारिश की स्थिति में सुधार की उम्मीद है। यदि आने वाले दिनों में पर्याप्त बारिश होती है, तो धान की बाकी रोपाई पूरी होने के साथ पलामू और गढ़वा के किसानों को भी राहत मिलने की संभावना है।

प्रमंडलवार धान रोपाई की स्थिति

प्रमंडलधान रोपाई का लक्ष्यअब तक रोपाई
दक्षिण छोटानागपुर5.67 लाख हेक्टेयर4.07 लाख हेक्टेयर
पलामू1.37 लाख हेक्टेयर0.41 लाख हेक्टेयर
उत्तर छोटानागपुर3.36 लाख हेक्टेयर1.78 लाख हेक्टेयर
संताल परगना3.64 लाख हेक्टेयर2.75 लाख हेक्टेयर

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