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Jharkhand High Court: तलाक के बाद भी पूर्व पत्नी को भरण-पोषण देना होगा, 30 लाख रुपये का आदेश

By Team Abua
July 23, 2026 4 Min Read
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Jharkhand High Court ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि तलाक के बाद भी पति अपनी पूर्व पत्नी को बेसहारा नहीं छोड़ सकता है। अदालत ने कहा कि भरण-पोषण किसी प्रकार की दया नहीं है, बल्कि यह पत्नी का कानूनी अधिकार है, जिससे वह सम्मानपूर्वक अपना जीवन जी सके। इस फैसले ने पारिवारिक विवादों और भरण-पोषण से जुड़े मामलों में एक नई कानूनी मिसाल कायम की है।

Jharkhand High Court ने क्या कहा?

Jharkhand High Court की खंडपीठ न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति संजय प्रसाद ने कहा कि गुजारा भत्ता निर्धारित करने की प्रक्रिया मान्यताओं पर शुरू या समाप्त नहीं हो सकती है। यह पति की कमाई क्षमता के आकलन पर आधारित होनी चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि पत्नी को भरण-पोषण देने की जिम्मेदारी मुख्य रूप से पति पर है, खासकर जब वह स्वयं कमाई नहीं कर रही हो, और इसे इस आधार पर कम नहीं किया जा सकता कि वह अपने माता-पिता के साथ रह रही है या उसके माता-पिता के पास उसकी मदद करने के साधन हैं।

Jharkhand High Court ने यह भी कहा कि भरण-पोषण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि एक महिला को अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए अपने माता-पिता या रिश्तेदारों पर निर्भर न रहना पड़े, बल्कि वह सम्मान और स्वायत्तता के साथ जीवन जी सके। अदालत ने कहा कि जब तक पर्याप्त गुजारा भत्ता नहीं दिया जाता, तब तक वह स्वतंत्र आवास, दैनिक खर्चों को पूरा करने की उम्मीद नहीं कर सकती है।

क्या है पूरा मामला?

Jharkhand High Court के इस फैसले की जड़ें लातेहार जिले के एक विवाह विवाद से जुड़ी हैं। 12 फरवरी 2017 को लातेहार में एक महिला का विवाह एक सशस्त्र सीमा बल के जवान के साथ हुआ था। शादी के करीब चार साल बाद, 23 जुलाई 2021 को पति ने लातेहार फैमिली कोर्ट में हिंदू विवाह अधिनियम के तहत क्रूरता और परित्याग का आरोप लगाते हुए तलाक की याचिका दायर की। फैमिली कोर्ट ने 22 नवंबर 2022 को तलाक का डिक्री जारी कर दिया, जिसके बाद पत्नी ने Jharkhand High Court में अपील दायर की।

अपील लंबित रहने के दौरान 11 जनवरी 2025 को पति ने दूसरा विवाह कर लिया, जिससे सुलह की संभावना समाप्त हो गई। इसके बाद दोनों पक्षों ने तलाक के फैसले पर विवाद न करने और केवल स्थायी गुजारा भत्ता के मुद्दे पर अदालत का फैसला स्वीकार करने पर सहमति जताई।

30 लाख रुपये के गुजारा भत्ता का आधार

Jharkhand High Court ने पत्नी की उम्र, जीवन प्रत्याशा और पति की कमाई क्षमता का विश्लेषण करते हुए 30 लाख रुपये का स्थायी गुजारा भत्ता तय किया। अदालत ने पाया कि पत्नी के पास आय का कोई स्वतंत्र स्रोत नहीं है और वह अपनी मां की सड़क किनारे सब्जी की दुकान में मदद करती है। वहीं, पति एक पुलिस कांस्टेबल के रूप में 66,097 रुपये मासिक वेतन पा रहा था।

Jharkhand High Court ने महिला की जीवन प्रत्याशा पर भी विचार किया। पत्नी की आयु 28 वर्ष है और भारत में महिलाओं की औसत जीवन प्रत्याशा लगभग 70 वर्ष मानी जाती है, इसलिए गुजारा भत्ता अगले 42 वर्षों के लिए गणना की गई। अदालत ने निर्देश दिया कि यह राशि 12 महीनों के भीतर चार समान किस्तों में अदा की जाए, जिसमें पहली किस्त दो महीने के भीतर पूर्व पत्नी को देना अनिवार्य होगा।

भरण-पोषण से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण फैसले

Jharkhand High Court ने हाल के महीनों में भरण-पोषण से जुड़े कई अन्य महत्वपूर्ण फैसले भी दिए हैं। एक अन्य मामले में अदालत ने 23 वर्षीय पत्नी को 25 लाख रुपये का स्थायी गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया था। एक अलग मामले में 15 साल की बेटी के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए पति को 35,000 रुपये मासिक गुजारा भत्ता देने का निर्देश दिया गया था।

Jharkhand High Court ने यह भी स्पष्ट किया है कि पति अपनी पत्नी को उस जीवन स्तर के अनुसार भरण-पोषण देने के लिए बाध्य है, जिसके वह विवाह के दौरान आदी थी। अदालत ने कहा कि गुजारा भत्ता इतना होना चाहिए कि पत्नी उस राशि से आराम से रह सके और उसे ब्याज के रूप में आय प्राप्त हो सके।

निष्कर्ष

Jharkhand High Court का यह फैसला पारिवारिक कानून के क्षेत्र में एक मील का पत्थर साबित होगा। अदालत ने स्पष्ट किया है कि तलाक के बाद भी पति अपनी पूर्व पत्नी को उसके जीवन स्तर के अनुसार भरण-पोषण देने से बच नहीं सकता है। भरण-पोषण पत्नी का कानूनी अधिकार है, दया नहीं, और इसे पति की कमाई क्षमता, पत्नी की जीवन प्रत्याशा और दोनों पक्षों की सामाजिक स्थिति के आधार पर तय किया जाना चाहिए।

बाहरी संसाधन

Jharkhand High Court के आधिकारिक फैसलों के बारे में अधिक जानकारी के लिए देखें: https://jharkhandhighcourt.nic.in

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