IndiGo Q1 Results: बढ़ती ईंधन लागत से ₹238 करोड़ का घाटा, राजस्व 20% बढ़ने के बावजूद मुनाफा गायब

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IndiGo, देश की सबसे बड़ी एयरलाइन, को वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में बड़ा झटका लगा है। अप्रैल से जून तिमाही में यात्रियों की संख्या और कंपनी की आय में बढ़ोतरी के बावजूद, IndiGo को ₹238 करोड़ का शुद्ध घाटा दर्ज करना पड़ा है। पिछले वर्ष की समान अवधि में कंपनी ने ₹2,176 करोड़ का मुनाफा कमाया था

IndiGo की कमाई तो बढ़ी, लेकिन मुनाफा क्यों घटा?

IndiGo की कुल आय 20 प्रतिशत बढ़कर ₹24,584 करोड़ पहुंच गई। कंपनी ने इस तिमाही में 3.13 करोड़ यात्रियों को सेवा दी, जो पिछले साल की तुलना में 0.7 प्रतिशत अधिक है। यात्री किराया राजस्व 23 प्रतिशत बढ़कर ₹21,879 करोड़ हो गया, जबकि सहायक राजस्व में भी 13.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई

हालांकि, बढ़ती परिचालन लागत ने इस बढ़त का फायदा खत्म कर दिया। कंपनी का कुल ऑपरेटिंग खर्च 34.4 प्रतिशत बढ़कर ₹25,853 करोड़ हो गया। इसी वजह से IndiGo लाभ के बजाय घाटे में पहुंच गई।

ईंधन की महंगाई बनी IndiGo के लिए सबसे बड़ी चुनौती

IndiGo के लिए सबसे बड़ा दबाव एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) की बढ़ती कीमतों से आया। कंपनी का ईंधन खर्च एक वर्ष में 86 प्रतिशत बढ़कर ₹10,833 करोड़ हो गया। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई, जिसका सीधा असर एयरलाइंस की लागत पर पड़ा

IndiGo के प्रबंध निदेशक राहुल भाटिया ने कहा कि पहली तिमाही में अस्थिर परिचालन वातावरण रहा, जिसमें बढ़ती ईंधन लागत और मध्य पूर्व में संघर्ष से जुड़ी नेटवर्क बाधाओं ने लाभप्रदता को प्रभावित किया। उन्होंने कहा, ईंधन लागत और रुपये के अवमूल्यन के दबाव के कारण तिमाही में लगभग 2 अरब रुपये का नुकसान हुआ है

IndiGo ने क्या कदम उठाए?

बढ़ती लागत को कम करने के लिए IndiGo ने कई कदम उठाए हैं। कंपनी ने वरिष्ठ कर्मचारियों के वेतन वृद्धि को स्थगित कर दिया है और विवेकाधीन खर्चों में कटौती की है। साथ ही, एयरलाइन ईंधन-कुशल विमानों का उपयोग करके लागत को अनुकूलित करने का प्रयास कर रही है

IndiGo ने बढ़ती एटीएफ लागत को देखते हुए 2 अप्रैल 2026 से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर ईंधन शुल्क में भी संशोधन किया है। सरकार ने 1 अप्रैल से 8 जून 2026 तक एटीएफ की कीमतों पर अस्थायी मूल्य सीमा तंत्र लागू किया था, लेकिन उसके बाद IndiGo को बाजार मूल्य पर ईंधन खरीदना पड़ा

IndiGo के आगे की राह क्या है?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो एयरलाइंस की लागत पर दबाव जारी रह सकता है। IndiGo ने दूसरी तिमाही में क्षमता वृद्धि स्थिर रहने का अनुमान जताया है, जो मौसमी रूप से कमजोर मांग और मध्य पूर्व में जारी अनिश्चितता को दर्शाता है

हालांकि, मजबूत यात्री मांग, नए अंतरराष्ट्रीय रूट और नेटवर्क विस्तार के कारण IndiGo को आने वाली तिमाहियों में प्रदर्शन सुधारने की उम्मीद है। ब्रोकरेज फर्मों का मानना है कि IndiGo की मजबूत यील्ड, मूल्य निर्धारण शक्ति और अनुशासित क्षमता विस्तार दीर्घकालिक विकास का समर्थन करते हैं

IndiGo की वित्तीय स्थिति

तिमाही के अंत में IndiGo के पास कुल ₹52,885 करोड़ की नकदी थी, जिसमें ₹39,039 करोड़ मुफ्त नकदी शामिल है। कंपनी का कुल कर्ज ₹81,531 करोड़ है, जिसमें पूंजीगत पट्टा देनदारियां शामिल हैं

IndiGo के पास तिमाही के अंत में 432 विमानों का बेड़ा था। एयरलाइन 97 घरेलू और 46 अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों के लिए उड़ानें संचालित कर रही है

बाहरी संसाधन

IndiGo की आधिकारिक वेबसाइट: https://www.goindigo.in

इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) की ईंधन मूल्य जानकारी: https://www.iata.org

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