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Jharkhand Eco-Tourism
Jharkhand

Jharkhand Eco-Tourism: 1 जुलाई से 3 महीने के लिए बंद होंगे जंगल, वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए ‘नो एंट्री’

By Team Abua
June 22, 2026 4 Min Read
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Jharkhand Eco-Tourism: 1 जुलाई से लागू होगी ‘नो एंट्री’

झारखंड सरकार ने राज्य के वनों में होने वाली पर्यटन गतिविधियों को 1 जुलाई से 30 सितंबर 2026 तक के लिए बंद करने का निर्णय लिया है। इस अवधि में Jharkhand eco-tourism गतिविधियों पर पूर्ण रोक रहेगी। इसका मतलब है कि पलामू टाइगर रिजर्व, दलमा वन्यजीव अभ्यारण्य सहित राज्य के सभी वन क्षेत्रों में पर्यटकों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा।

यह निर्णय वन्यजीवों की सुरक्षा और बारिश के दौरान नए पौधों को पनपने का अवसर देने के लिए लिया गया है। झारखंड सरकार ने इस दौरान Jharkhand eco-tourism के तहत आने वाली सभी गतिविधियों, जैसे वन सफारी, ट्रैकिंग और अन्य पर्यटन कार्यक्रमों को रोक दिया है।


क्यों बंद हो रहा है Jharkhand Eco-Tourism?

Jharkhand eco-tourism पर यह रोक मुख्य रूप से तीन कारणों से लगाई गई है:

  1. वन्यजीवों की सुरक्षा: बारिश के दौरान कई जानवर अपने बच्चों को जन्म देते हैं। इस समय उन्हें किसी भी प्रकार की बाहरी गड़बड़ी से बचाना जरूरी होता है। Jharkhand eco-tourism की गतिविधियों पर रोक लगाकर वन्यजीवों को एक सुरक्षित वातावरण प्रदान किया जाता है।
  2. नए पौधों का विकास: मानसून के दौरान जंगलों में नए पौधे उगते हैं। इन पौधों को पनपने के लिए अबाधित वातावरण चाहिए। Jharkhand eco-tourism पर रोक से पौधों को बिना किसी नुकसान के बढ़ने का अवसर मिलता है।
  3. पारिस्थितिकीय संतुलन: झारखंड देश के उन कुछ राज्यों में से एक है, जहां प्राकृतिक पारिस्थितिकीय तंत्र (natural ecosystems) को अभी भी प्रभावी रूप से संरक्षित किया जा सकता है । Jharkhand eco-tourism की गतिविधियों पर रोक इस संतुलन को बनाए रखने में मदद करती है।

Jharkhand Eco-Tourism: किन-किन जगहों पर लागू होगी रोक?

Jharkhand eco-tourism पर रोक राज्य के सभी वन क्षेत्रों पर लागू होगी। इसमें निम्नलिखित प्रमुख स्थान शामिल हैं:

  • पलामू टाइगर रिजर्व (Palamu Tiger Reserve): यह झारखंड का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण वन्यजीव अभ्यारण्य है। यहां 1 जुलाई से Jharkhand eco-tourism पूरी तरह बंद रहेगा।
  • बेतला नेशनल पार्क (Betla National Park): यह पलामू टाइगर रिजर्व का ही हिस्सा है और एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है।
  • दलमा वन्यजीव अभ्यारण्य (Dalma Wildlife Sanctuary): रांची के पास स्थित यह अभ्यारण्य हाथियों और अन्य वन्यजीवों के लिए जाना जाता है।
  • नेतरहाट (Netarhat): इको-सेंसिटिव जोन (Eco-Sensitive Zone) घोषित यह क्षेत्र भी इस रोक के दायरे में आएगा । यहां Jharkhand eco-tourism गतिविधियां भी तीन महीने के लिए बंद रहेंगी।
  • महुआडांड़ वुल्फ सैंक्चुअरी (Mahuadanr Wolf Sanctuary): यह दुर्लभ भेड़ियों के संरक्षण के लिए जाना जाता है।

इन सभी क्षेत्रों में Jharkhand eco-tourism गतिविधियों पर पूरी तरह रोक रहेगी। पर्यटकों को सलाह दी जाती है कि वे इन तीन महीनों के दौरान अपनी यात्रा की योजना न बनाएं।


वन्यजीवों और पौधों को मिलेगा संरक्षण

Jharkhand eco-tourism पर रोक का सबसे बड़ा लाभ वन्यजीवों और पौधों को मिलता है। मानसून के दौरान:

  • प्रजनन का समय: कई जानवरों के लिए यह प्रजनन का समय होता है। बिना किसी बाहरी गड़बड़ी के वे अपने बच्चों को सुरक्षित रूप से जन्म दे सकते हैं और उनका पालन-पोषण कर सकते हैं।
  • पौधों का विकास: बारिश के पानी से जंगलों में नए पौधे उगते हैं। Jharkhand eco-tourism पर रोक से इन पौधों को किसी भी प्रकार के नुकसान से बचाया जा सकता है।
  • वन्यजीवों का तनाव कम होता है: पर्यटकों की आवाजाही से वन्यजीवों पर तनाव पड़ता है। तीन महीने की इस छुट्टी से उन्हें राहत मिलती है और वे अपने प्राकृतिक व्यवहार को बनाए रख सकते हैं।

Jharkhand Eco-Tourism: 10 लाख से अधिक पौधे लगाने की योजना

Jharkhand eco-tourism पर रोक के दौरान वन विभाग एक बड़ी वृक्षारोपण योजना पर भी काम करेगा। इस दौरान राज्य के वन क्षेत्रों में 10 लाख से अधिक नए पौधे लगाए जाएंगे।

यह वृक्षारोपण अभियान मानसून के दौरान किया जाएगा, क्योंकि बारिश के पानी से पौधों को जड़ें जमाने में मदद मिलती है। Jharkhand eco-tourism पर रोक से वन क्षेत्रों में काम करने वाली टीमों को भी सुविधा होगी, क्योंकि उन्हें पर्यटकों की आवाजाही से कोई परेशानी नहीं होगी।


मानसून में Eco-Tourism पर रोक: एक पुरानी परंपरा

Jharkhand eco-tourism गतिविधियों को मानसून के दौरान बंद करना कोई नई बात नहीं है। झारखंड वन विभाग हर साल यह कदम उठाता है। यह प्रथा वन्यजीवों और पौधों के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

इसके अलावा, केंद्र सरकार ने हाल ही में श्री सम्मेद शिखरजी को पर्यटन क्षेत्र घोषित करने का अपना निर्णय वापस ले लिया है और Jharkhand eco-tourism गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया है, ताकि इस धार्मिक स्थल की पवित्रता बनी रहे ।


वन क्षेत्रों में रुकेंगे निर्माण कार्य

Jharkhand eco-tourism पर रोक के दौरान वन क्षेत्रों में होने वाले निर्माण कार्य भी बंद रहेंगे। इसमें सड़क निर्माण, बिजली के टावर लगाने जैसे कार्य शामिल हैं। यह फैसला वन्यजीवों और पौधों को अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करने के लिए लिया गया है।

हालांकि, इस बीच कुछ ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जहां नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है। हाल ही में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने नेतरहाट इको-सेंसिटिव जोन में 59 होटलों और रिसॉर्ट्स के निर्माण पर नोटिस जारी किया है । इन निर्माण कार्यों को पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन में अंजाम दिया जा रहा है। Jharkhand eco-tourism से जुड़े इन मामलों की सुनवाई 8 जुलाई को होगी ।

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