Jharkhand Coal Block देश के सबसे खनिज समृद्ध राज्यों में शामिल झारखंड को पिछले छह वर्षों में सबसे अधिक 37 वाणिज्यिक कोयला ब्लॉक आवंटित किए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद राज्य में कोयला उत्पादन उम्मीद के मुताबिक रफ्तार नहीं पकड़ पाया है । यह जानकारी केंद्र सरकार ने लोकसभा में साझा की, जिसमें खुलासा हुआ कि झारखंड के 37 जेएच कोयला ब्लॉक में से केवल 15 में ही उत्पादन शुरू हो सका है ।
कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने चतरा सांसद कालीचरण सिंह के प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि झारखंड कोयला ब्लॉक में आवंटित 37 वाणिज्यिक ब्लॉकों में से सिर्फ 15 ब्लॉकों में ही उत्पादन शुरू हुआ है, जबकि बाकी परियोजनाएं विभिन्न चरणों में हैं । वित्तीय वर्ष 2025-26 में झारखंड कोयला ब्लॉक से केवल 0.35 मिलियन टन कोयला उत्पादन दर्ज किया गया । यह राष्ट्रीय वाणिज्यिक कोयला उत्पादन का लगभग 1.3 प्रतिशत हिस्सा है।
देश में वाणिज्यिक कोयला उत्पादन 2021-22 के 1.15 करोड़ टन से बढ़कर 2025-26 में 2.61 करोड़ टन तक पहुंच गया है । केंद्र सरकार का कहना है कि इस नीति का उद्देश्य घरेलू कोयला उत्पादन बढ़ाना, आयात कम करना और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है । हालांकि, झारखंड कोयला ब्लॉक की धीमी प्रगति इस लक्ष्य को पूरा करने में बाधा बन रही है।
केंद्र सरकार ने 132 कोयला ब्लॉक देशभर में वाणिज्यिक खनन नीलामी के माध्यम से आवंटित किए हैं । इनमें से 23 ब्लॉकों को खनन की अनुमति मिल चुकी है, जबकि 17 ब्लॉक अभी विकास के चरण में हैं । भूमि अधिग्रहण, वैधानिक मंजूरियां, आधारभूत संरचना का विकास और अन्य प्रक्रियाओं के कारण झारखंड कोयला ब्लॉक की कई परियोजनाओं में उत्पादन शुरू होने में देरी हो रही है ।
सबसे अधिक धीमी प्रगति चतरा लोकसभा क्षेत्र में देखने को मिली है, जिसमें चतरा, हजारीबाग और लातेहार जिलों के कोयला क्षेत्र शामिल हैं। इस क्षेत्र के आठ वाणिज्यिक ब्लॉकों में से कोई भी अभी तक चालू नहीं हो सका है । इन ब्लॉकों में चकला, बृंदा, ससई, नॉर्थ धादू, सेरेगढ़ा और चितरपुर (संशोधित) शामिल हैं, जो अभी भी परियोजना विकास के विभिन्न चरणों में हैं ।
सरकार ने कहा है कि उसने परिचालन में तेजी लाने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिनमें निजी अन्वेषण एजेंसियों को शामिल करना, भूवैज्ञानिक रिपोर्टों के लिए मंजूरी को सरल बनाना और वन-मंजूरी आवश्यकताओं से मुक्त बोरहोल की संख्या बढ़ाना शामिल है । इसके अलावा, कोल कंट्रोलर संगठन से खदान खोलने की अनुमति की आवश्यकता को हटा दिया गया है और कोकिंग कोल को महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज घोषित किया गया है ।
उल्लेखनीय है कि झारखंड कोयला ब्लॉक में से कुछ ब्लॉकों को 12वें दौर की नीलामी में सफलतापूर्वक नीलाम किया गया था । चितरपुर (संशोधित) ब्लॉक 3.45 MTPA की क्षमता के साथ ओरिसा अलॉय स्टील प्राइवेट लिमिटेड को, महुआगढ़ी ब्लॉक दामोदर वैली कॉरपोरेशन को, और चोलापाथर ब्लॉक शक्ति भूमि माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड को आवंटित किया गया था । इन झारखंड कोयला ब्लॉक के चालू होने से राज्य के कोयला उत्पादन में बढ़ोतरी की उम्मीद है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लंबित झारखंड कोयला ब्लॉक परियोजनाओं को समय पर मंजूरी और आवश्यक सुविधाएं मिलती हैं, तो राज्य देश के वाणिज्यिक कोयला उत्पादन में कहीं अधिक महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है ।
बाहरी संसाधन
- कोयला मंत्रालय, भारत सरकार: https://coal.gov.in
- भारत सरकार की प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB): https://www.pib.gov.in
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