पर्वतीय राज्यों में भारी बारिश से तबाही, मैदानी इलाकों में मानसून कमजोर, 70% हिस्से में कम बारिश से खेती पर चिंता

नई दिल्ली: देशभर में मौसम का मिजाज इन दिनों अलग-अलग रूप दिखा रहा है। एक ओर पर्वतीय राज्यों में भारी बारिश, बादल फटने और भूस्खलन से जनजीवन प्रभावित है, तो दूसरी ओर उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में मानसून की रफ्तार थमने से उमस और भीषण गर्मी लोगों को परेशान कर रही है। वहीं मध्य और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश के कारण सूखे जैसे हालात बनने लगे हैं।
जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही बारिश से कई क्षेत्रों में सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई हैं और भूस्खलन की घटनाएं सामने आई हैं। पहलगाम में बादल फटने के बाद अचानक आई बाढ़ से सड़कें बह गईं, जबकि कई होटल और मकान जलभराव की चपेट में आ गए। प्रशासन ने पर्यटकों और स्थानीय लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया।
उत्तराखंड में भारी भूस्खलन के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग सहित कई प्रमुख सड़कें बंद हो गई हैं। वहीं हिमाचल प्रदेश में भी मलबा गिरने से 180 से अधिक सड़कें प्रभावित हुई हैं। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि नए मौसमी सिस्टम सक्रिय होने के कारण पर्वतीय राज्यों में आने वाले दिनों में भी भारी बारिश की संभावना बनी हुई है।
इसके विपरीत दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और पूर्वी मध्य प्रदेश में मानसून कमजोर पड़ने से बारिश लगभग थम गई है। तेज धूप और उमस के कारण कई इलाकों में तापमान 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। मौसम विभाग के अनुसार फिलहाल उत्तर-पश्चिम भारत में व्यापक बारिश के आसार कम हैं।
इधर, गुजरात, महाराष्ट्र और मध्य व दक्षिण भारत के कई हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा होने से खेतों की नमी तेजी से घट रही है। मौसम विभाग का अनुमान है कि देश के लगभग 70 प्रतिशत हिस्से में अगले कुछ दिनों तक बारिश सामान्य से कम रह सकती है, जिससे खरीफ फसलों और कृषि गतिविधियों पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।

