13वें राष्ट्रीय हस्तकरघा दिवस समारोह में राज्यपाल ने कहा, आधुनिक तकनीक, डिजाइन और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से बुनकरों की आय और पहचान दोनों बढ़ेंगी।

जमशेदपुर: माइकल जॉन ऑडिटोरियम, बिष्टुपुर में आयोजित 13वें राष्ट्रीय हस्तकरघा दिवस समारोह में झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने बुनकरों को आधुनिक तकनीक और डिजिटल बाजार से जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हस्तकरघा केवल पारंपरिक कला नहीं, बल्कि देश की सांस्कृतिक विरासत और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव है।
राज्यपाल ने कहा कि एक हस्तकरघा उत्पाद खरीदना केवल वस्त्र खरीदना नहीं, बल्कि एक बुनकर परिवार की आजीविका को मजबूत करना और भारतीय संस्कृति का सम्मान करना है। उन्होंने लोगों से स्थानीय उत्पादों को अपनाने और ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को आगे बढ़ाने की अपील की।
उन्होंने कहा कि आज की आवश्यकता केवल उत्पादन बढ़ाने की नहीं, बल्कि बुनकरों को आधुनिक डिजाइन, तकनीक, प्रशिक्षण और डिजिटल मार्केटिंग से जोड़कर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराने की है। इससे उनकी आय बढ़ेगी और पारंपरिक हस्तशिल्प को नई पहचान मिलेगी।
राज्यपाल ने कहा कि पीएम विश्वकर्मा योजना, आत्मनिर्भर भारत अभियान और अन्य सरकारी पहल पारंपरिक कारीगरों को नई दिशा दे रही हैं। उन्होंने युवाओं से भी हस्तकरघा और हस्तशिल्प क्षेत्र से जुड़ने का आह्वान किया, ताकि यह विरासत आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रह सके।
समारोह के दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वाले कई बुनकरों को सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न सामाजिक संगठनों, हस्तशिल्प विशेषज्ञों और शहर के गणमान्य लोगों ने हिस्सा लिया तथा बुनकरों के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण पर अपने विचार साझा किए।

