Farmers’ Hopes Pinned on August Rains जामताड़ा: जिले में धानरोपनी का कार्य लगातार आगे बढ़ रहा है, लेकिन सामान्य से काफी कम बारिश होने के कारण खेती की रफ्तार प्रभावित हुई है। कृषि विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष निर्धारित लक्ष्य का 59.88 प्रतिशत धानरोपनी कार्य पूरा हो चुका है . कृषि विभाग ने वर्ष 2026 खरीफ सीजन के लिए 52 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती का लक्ष्य तय किया है . इसके मुकाबले अब तक 34,730.40 हेक्टेयर भूमि पर धान की रोपाई पूरी हो चुकी है . अभी भी करीब 40 प्रतिशत क्षेत्र में किसान अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं, ताकि समय रहते रोपाई का कार्य पूरा किया जा सके।
सामान्य से आधी बारिश ने बढ़ाई चिंता
जुलाई महीने में जामताड़ा जिले में 448.27 मिमी सामान्य वर्षा होनी चाहिए थी, लेकिन इस बार केवल 222.88 मिमी बारिश ही दर्ज की गई . यानी सामान्य से लगभग आधी बारिश होने के कारण धानरोपनी का कार्य प्रभावित हुआ . हालांकि हाल के दिनों में हुई बारिश से किसानों को कुछ राहत मिली है . जुलाई के पहले सप्ताह में जिले में 22 मिमी वर्षा दर्ज की गई थी, जिससे खेतों में पानी भर गया और धानरोपनी को गति मिली . कुंडहित प्रखंड में लगातार बारिश के कारण धानरोपनी का कार्य तेजी से चल रहा है और कुछ स्थानों पर रोपाई लगभग पूरी हो चुकी है . कृषि विभाग को उम्मीद है कि यदि अगस्त में अच्छी और लगातार बारिश होती है तो शेष क्षेत्रों में भी तेजी से धानरोपनी पूरी हो जाएगी और लक्ष्य हासिल किया जा सकेगा।
किसानों को वैकल्पिक फसलों की सलाह
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि जिन खेतों में पानी रोकने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है या जहां धानरोपनी में अधिक देरी हो रही है, वहां समय बर्बाद करने के बजाय अरहर, मूंग, मक्का और मड़ुआ (रागी) जैसी कम पानी में तैयार होने वाली वैकल्पिक फसलों की खेती करें . ये फसलें कम वर्षा की स्थिति में भी बेहतर उत्पादन देने में सक्षम हैं। किसानों को मिलेट मिशन योजना के अंतर्गत मोटे अनाज, जैसे बाजरा, ज्वार एवं रागी की खेती अपनाने के लिए भी प्रेरित किया गया है .
कम अवधि वाली धान की किस्में अपनाने की सलाह
जिला कृषि पदाधिकारी लव कुमार ने किसानों को सलाह दी है कि अब लंबी अवधि की धान की किस्मों के बजाय कम अवधि में तैयार होने वाली किस्मों की रोपाई करें . उन्होंने बताया कि 130 से 150 दिन में तैयार होने वाली लंबी अवधि की किस्मों की जगह, 110 से 120 दिन में तैयार होने वाली किस्मों को प्राथमिकता देना अधिक लाभदायक रहेगा .
किस जमीन के लिए कौन-सी धान की किस्म?
निचली जमीन के लिए:
- एमटीयू-7029
- हाइब्रिड राइस
- फसल अवधि: 130 से 150 दिन
- सलाह: जहां खेतों में पर्याप्त पानी जमा रहता हो, वहीं इन किस्मों की रोपाई करें .
मध्यम एवं ऊपरी जमीन के लिए:
- एमटीयू-1010
- डीआरआरएच-31
- फसल अवधि: 110 से 125 दिन
- सलाह: वर्तमान मौसम को देखते हुए यही किस्में किसानों के लिए सबसे उपयुक्त मानी जा रही हैं .
अगस्त की बारिश पर टिकी उम्मीद
कृषि विभाग का कहना है कि यदि अगस्त महीने में लगातार अच्छी बारिश होती रही, तो जामताड़ा जिले में धानरोपनी का 100 प्रतिशत लक्ष्य निर्धारित समय के भीतर पूरा किया जा सकता है . किसानों का भी मानना है कि यदि मौसम अनुकूल रहा तो इस वर्ष धान की अच्छी पैदावार होने की पूरी उम्मीद है . इससे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ-साथ क्षेत्र में कृषि उत्पादन में भी वृद्धि होगी। फिलहाल किसान और कृषि विभाग दोनों की निगाहें अगस्त की बारिश पर टिकी हुई हैं .
बाहरी संसाधन
- भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD): https://mausam.imd.gov.in
- झारखंड कृषि विभाग: https://www.jharkhand.gov.in/agriculture
- जामताड़ा जिला प्रशासन: https://jamtara.nic.in
World Tribal Day: 9-10 अगस्त को रांची में भव्य आयोजन, शिबू सोरेन को समर्पित होगा आदिवासी महोत्सव


