El Nino मानसून के दौरान मजबूत हो रहा भारी वर्षा पर पड़ सकता है असर IMD ने जारी किया अपडेट 2026

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एल नीनो El Nino भूमध्य रेखा के समीप प्रशांत महासागर में विकसित हो चुका है और दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान इसके और अधिक प्रभावी होने की संभावना है। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने शुक्रवार को बताया कि समुद्र की सतह के तापमान में बढ़ोतरी के साथ वायुमंडलीय गतिविधियों में भी बदलाव देखने को मिला है। इससे महासागर और वायुमंडल की संयुक्त प्रणाली अब एल नीनो El Nino के अनुरूप संकेत दे रही है।

आईएमडी ने कहा कि मानसून के महीनों में एल नीनो El Nino की तीव्रता बढ़ सकती है। इससे पहले वर्ष 2023 में भी एल नीनो El Nino की स्थिति बनी थी। इसके अलावा 2002, 2009 और 2015 में भी ऐसे हालात देखे गए थे। विशेषज्ञों का मानना है कि एल नीनो El Nino का प्रभाव भारतीय मानसून पर पड़ता है और इसके कारण सामान्य से कम वर्षा होने की आशंका बढ़ जाती है।

आईएमडी ने आगे बताया कि एल नीनो El Nino एक जलवायु घटना है जिसमें भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। यह अल नीनो दक्षिणी दोलन चक्र का एक चरण है। इसके विपरीत चरण को ला नीना कहा जाता है जो आमतौर पर वैश्विक तापमान को कम करने में सहायक होता है। ईएनएसओ का एक तटस्थ चरण भी होता है।

आईएमडी ने 29 मई को जारी अपने पूर्वानुमान में कहा था कि इस वर्ष मानसून के दौरान देश में वर्षा दीर्घकालिक औसत का लगभग 90 प्रतिशत रहने की संभावना है। भारत में 1971 से 2020 के आंकड़ों के आधार पर मौसमी वर्षा का दीर्घकालिक औसत 87 सेंटीमीटर है। एल नीनो El Nino के प्रभाव से इसमें कमी आ सकती है।

देश में सालाना वर्षा का अधिकांश हिस्सा मानसून से प्राप्त होता है। यह कृषि, पेयजल, जलविद्युत उत्पादन और भूजल पुनर्भरण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस वर्ष मानसून ने केरल में 4 जून को दस्तक दी जबकि सामान्य तिथि 1 जून मानी जाती है। एल नीनो El Nino के कारण मानसून की प्रगति और वर्षा की मात्रा दोनों पर असर पड़ सकता है।

एल नीनो El Nino के प्रभाव को देखते हुए आईएमडी ने बताया कि अगले दो से तीन दिनों में मानसून के मध्य अरब सागर, महाराष्ट्र, कर्नाटक के बाकी हिस्सों, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और बंगाल के कुछ और इलाकों में आगे बढ़ने के लिए हालात अनुकूल हैं। मौसम विभाग ने यह भी कहा कि इस दौरान ओडिशा, झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ के कुछ और हिस्सों में भी मानसून आगे बढ़ेगा।

वैश्विक स्तर पर एल नीनो El Nino का असर मानसून, चक्रवातों और अन्य मौसमी घटनाओं पर पड़ता है। भारत के लिए यह चिंता का विषय है क्योंकि अच्छी बारिश किसानों के लिए बेहद जरूरी है। एल नीनो El Nino के कारण खरीफ फसलों पर संकट आ सकता है। किसानों को पहले से ही कम बारिश की संभावना के मद्देनजर उपाय करने की सलाह दी जा रही है।

हालांकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि हर एल नीनो El Nino का मानसून पर समान प्रभाव नहीं होता है। कभी-कभी एल नीनो El Nino होने के बावजूद भी अच्छी बारिश हो जाती है। लेकिन आईएमडी ने सतर्क रहने को कहा है। मौसम विभाग लगातार समुद्र के तापमान और हवाओं के पैटर्न पर नजर बनाए हुए है।

आने वाले दिनों में एल नीनो El Nino की तीव्रता का पता चलेगा। अगर यह बहुत मजबूत हो जाता है तो देश के कई हिस्सों में सूखे जैसे हालात बन सकते हैं। सरकार ने किसानों को फसल बीमा और अन्य सहायता का आश्वासन दिया है। एल नीनो El Nino का प्रभाव कितना व्यापक होगा यह आने वाले हफ्तों में साफ हो जाएगा।

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IMD Official Website
https://mausam.imd.gov.in

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NOAA El Nino Information
https://www.noaa.gov/el-nino

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