अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 4 गोल्ड जीतने वाले खिलाड़ी के रोजगार को लेकर सरकार सक्रिय, खेल नीति से अलग विकल्प तलाश रहा विभाग

रांची: झारखंड के थ्रोबॉल खिलाड़ी अमरदीप कुमार की संघर्ष की तस्वीर सामने आने के बाद अब उनके रोजगार को लेकर सरकार ने पहल शुरू कर दी है। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत के लिए गोल्ड मेडल जीत चुके अमरदीप को रांची के अरगोड़ा चौक पर परिवार की सब्जी दुकान में काम करते देखा गया था। प्रभात खबर डिजिटल की रिपोर्ट सामने आने के बाद यह मामला चर्चा में आया। इसके बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मामले का संज्ञान लेते हुए खेल विभाग को अमरदीप के मामले में तत्काल जरूरी कदम उठाने का निर्देश दिया।
खेल विभाग ने शुरू की वैकल्पिक रास्ते की तलाश
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद खेल एवं युवा कार्य निदेशालय ने मामले पर स्थिति स्पष्ट की है। विभाग का कहना है कि अमरदीप के लिए मौजूदा खेल नीति के अलावा दूसरे संभावित विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है। हालांकि सरकारी नौकरी के रास्ते में फिलहाल एक तकनीकी अड़चन सामने आ रही है और वह है थ्रोबॉल की आधिकारिक मान्यता।
थ्रोबॉल को मान्यता नहीं मिलना बना अड़चन
खेल विभाग के मुताबिक थ्रोबॉल को फिलहाल इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन और झारखंड ओलंपिक एसोसिएशन से मान्यता प्राप्त नहीं है। ऐसे में मौजूदा खेल नीति के तहत अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि के आधार पर सीधे सरकारी नौकरी देने में नियमों से जुड़ी परेशानी सामने आ रही है। यही वजह है कि विभाग अब केवल मौजूदा नीति तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि अमरदीप के लिए दूसरे रोजगार या सहायता के विकल्प तलाश रहा है।
मान्यता के लिए खेल संस्थाओं से भी अनुरोध

अमरदीप के मामले के साथ-साथ थ्रोबॉल की मान्यता का मुद्दा भी सामने आया है। विभाग की ओर से इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन और झारखंड ओलंपिक एसोसिएशन से थ्रोबॉल को उचित मंच और मान्यता दिलाने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया है। अगर खेल को आधिकारिक मान्यता मिलती है, तो भविष्य में इस खेल से जुड़े खिलाड़ियों को सरकारी खेल नीति के तहत मिलने वाले लाभ का रास्ता भी आसान हो सकता है।
चार अंतरराष्ट्रीय गोल्ड जीत चुके हैं अमरदीप
29 वर्षीय अमरदीप कुमार ने भारत और झारखंड का प्रतिनिधित्व करते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन किया है। वह देश के लिए चार गोल्ड मेडल जीत चुके हैं। इसके बावजूद उनकी आर्थिक स्थिति ऐसी है कि उन्हें परिवार की जिम्मेदारियों में अपने पिता का हाथ बंटाना पड़ रहा है। वह रांची के अरगोड़ा चौक पर परिवार की सब्जी दुकान में काम करते हैं। अमरदीप ने रोजगार के लिए कई बार आवेदन करने की बात भी कही थी।
अब सरकार के अगले कदम पर नजर
अमरदीप का मामला अब सिर्फ नौकरी मिलने तक सीमित नहीं है। यह सवाल भी उठ रहा है कि जिन खेलों को अभी आधिकारिक मान्यता नहीं मिली है, उनके खिलाड़ियों की उपलब्धियों को सरकारी रोजगार और सुविधाओं से जोड़ने का रास्ता क्या हो।
फिलहाल मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद विभाग ने अमरदीप के मामले में पहल शुरू कर दी है। एक तरफ खेल नीति से अलग रोजगार की संभावनाएं तलाश की जा रही हैं, तो दूसरी ओर थ्रोबॉल को मान्यता दिलाने के लिए संबंधित खेल संस्थाओं से कार्रवाई का अनुरोध किया गया है। अब नजर इस बात पर है कि सरकार अमरदीप के लिए कौन सा रास्ता निकालती है।

