Clean Cooking Policy: रसोई में अब एथेनॉल, 7 अरब लीटर अप्रयुक्त क्षमता का होगा उपयोग, जानें कब लागू होगी नीति

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Clean Cooking Policy: एथेनॉल अब रसोई का ईंधन बनेगा

देश में अब एथेनॉल का उपयोग केवल वाहनों तक सीमित नहीं रहेगा। केंद्र सरकार घरेलू रसोई में भी एथेनॉल को स्वच्छ ईंधन के रूप में अपनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रही है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय इस Clean Cooking Policy (क्लीन कुकिंग पॉलिसी) पर काम कर रहा है, जिसे सितंबर 2026 तक अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है।

इस Clean Cooking Policy का उद्देश्य एलपीजी के साथ-साथ एथेनॉल को भी खाना पकाने के वैकल्पिक ईंधन के रूप में बढ़ावा देना है। सरकार इस नई Clean Cooking Policy के तहत एथेनॉल की उपलब्धता बढ़ाने, सप्लाई चेन को मजबूत करने और उपभोक्ताओं को प्रोत्साहन देने जैसे कई पहलुओं पर विचार कर रही है।


Clean Cooking Policy: क्यों जरूरी है?

Clean Cooking Policy की सबसे बड़ी वजह भारत में एथेनॉल उत्पादन की बढ़ती क्षमता है। देश की वार्षिक एथेनॉल उत्पादन क्षमता 20 अरब लीटर से अधिक हो गई है, जबकि चालू वित्त वर्ष में 4 अरब लीटर और जुड़ने की उम्मीद है।

इस क्षमता में से लगभग 11 अरब लीटर का उपयोग E20 पेट्रोल ब्लेंडिंग कार्यक्रम के तहत होता है, जबकि शराब, फार्मास्युटिकल और रासायनिक उद्योग मिलकर 3-3.5 अरब लीटर का उपयोग करते हैं। इससे लगभग 7 अरब लीटर उत्पादन क्षमता अप्रयुक्त रह जाती है।

Clean Cooking Policy इस अतिरिक्त क्षमता का उपयोग करने का रास्ता खोलती है, जिससे एलपीजी आयात पर निर्भरता कम होगी और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी। यह नीति भारत की 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन (net-zero emissions) प्राप्त करने की व्यापक रणनीति का भी हिस्सा है।


Clean Cooking Policy में क्या-क्या हो सकता है शामिल?

1. सब्सिडी और प्रोत्साहन

Clean Cooking Policy के तहत सरकार एथेनॉल-आधारित कुकिंग सिस्टम के लिए सब्सिडी प्रदान कर सकती है। यह या तो एकमुश्त पूंजी सब्सिडी (capital-driven) हो सकती है या चालू वित्तीय प्रतिबद्धता (ongoing fiscal commitment) के रूप में हो सकती है।

2. एथेनॉल एटीएम और वितरण व्यवस्था

Clean Cooking Policy का एक अहम हिस्सा एथेनॉल एटीएम हो सकता है। सरकारी तेल विपणन कंपनियों के पेट्रोल पंपों पर ऐसे एटीएम लगाए जा सकते हैं, जहां से उपभोक्ता अपनी जरूरत के अनुसार एथेनॉल खरीद सकेंगे। इससे ईंधन की उपलब्धता आसान होगी और वितरण प्रणाली भी अधिक व्यवस्थित बन सकेगी।

3. एथेनॉल कुकिंग स्टोव का परीक्षण

सरकार ने पहले ही एथेनॉल से चलने वाले कुकिंग स्टोव का परीक्षण करवा लिया है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में एक स्वदेशी एथेनॉल कुकिंग स्टोव का प्रदर्शन किया है, जो एलपीजी की तरह साफ नीली लौ दे सकता है। इस तकनीक को घरेलू उपयोग के लिए सुरक्षित और प्रभावी बनाने के लिए परीक्षण किए गए हैं।


Clean Cooking Policy: एलपीजी का विकल्प या पूरक?

Clean Cooking Policy का मकसद एलपीजी को पूरी तरह बदलना नहीं है। सरकार एथेनॉल को एलपीजी के साथ एक पूरक ईंधन के रूप में पेश करना चाहती है।

उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, एथेनॉल कुकिंग पहले व्यावसायिक रसोई, रेस्तरां, स्ट्रीट फूड वेंडर और संस्थागत रसोई में अपनाया जा सकता है, और धीरे-धीरे यह घरेलू उपयोग तक पहुंच सकता है।


Clean Cooking Policy: क्या होंगे फायदे?

Clean Cooking Policy के लागू होने से कई लाभ होंगे:

  1. आयात पर निर्भरता में कमी: एथेनॉल कुकिंग से एलपीजी आयात पर निर्भरता घटेगी, खासकर पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के बीच।
  2. किसानों को लाभ: एथेनॉल गन्ना, मक्का और अन्य कृषि फीडस्टॉक से बनता है, जिससे किसानों को अतिरिक्त आय का जरिया मिलेगा।
  3. स्वच्छ ईंधन: एथेनॉल पारंपरिक ईंधनों की तुलना में कम उत्सर्जन करता है, जो इसे एक पर्यावरण-अनुकूल विकल्प बनाता है।
  4. निर्यात की संभावना: बढ़ती एथेनॉल क्षमता से नेपाल, बांग्लादेश और इंडोनेशिया जैसे पड़ोसी देशों में निर्यात के अवसर भी पैदा हो सकते हैं।

Clean Cooking Policy: कब आएगी?

रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार इस Clean Cooking Policy को सितंबर 2026 तक अंतिम रूप दे सकती है। हालांकि, उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है, और सरकार एथेनॉल मूल्य निर्धारण और स्टोव सब्सिडी सहित विभिन्न विकल्पों का मूल्यांकन कर रही है।

यह Clean Cooking Policy भारत की बड़ी ऊर्जा संक्रमण रणनीति का हिस्सा है, जिसमें जैव ईंधन का विस्तार, हरित हाइड्रोजन को बढ़ावा देना और ऊर्जा मिश्रण में नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाना शामिल है। जैसे-जैसे नीति विकसित होगी, यह देश भर के किसानों, उद्यमियों और स्वच्छ ऊर्जा कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा करेगी।

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