
भोपाल के बरकतुल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलने की तैयारी, प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा
भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित बरकतुल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलकर “मां वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय” किए जाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद ने इस संबंध में एक प्रस्ताव पारित कर राज्य सरकार और कुलाधिपति के पास भेजने का निर्णय लिया है।
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, प्रस्ताव में कहा गया है कि परमार वंश के महान शासक राजा भोज की ऐतिहासिक विरासत, साहित्य, शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्र में उनके योगदान को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय का नाम उनके सम्मान में रखा जाना चाहिए। कार्यपरिषद से प्रस्ताव पारित होने के बाद अब इसे शासन की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
बरकतुल्ला विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 1970 में भोपाल विश्वविद्यालय के रूप में हुई थी। बाद में वर्ष 1988 में इसका नाम बदलकर स्वतंत्रता सेनानी और क्रांतिकारी चिंतक मौलाना मोहम्मद बरकतुल्ला भोपाली के सम्मान में बरकतुल्ला विश्वविद्यालय रखा गया था।
नाम परिवर्तन के प्रस्ताव के बाद प्रदेश में इस विषय को लेकर चर्चा तेज हो गई है। एक ओर इसे भोपाल और मालवा क्षेत्र की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पहचान से जोड़कर देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर मौलाना बरकतुल्ला के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान को भी याद किया जा रहा है।
कौन थे मौलाना बरकतुल्ला भोपाली?
मौलाना मोहम्मद बरकतुल्ला भोपाली (1854–1927) भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख क्रांतिकारियों में से एक थे। उनका जन्म 7 जुलाई 1854 को भोपाल में हुआ था। वे ब्रिटिश शासन के कट्टर विरोधी थे और विदेशों में रहकर भारत की आजादी के लिए सक्रिय रूप से कार्य करते रहे।
बरकतुल्ला गदर आंदोलन से जुड़े प्रमुख नेताओं में शामिल थे। उन्होंने 1 दिसंबर 1915 को अफगानिस्तान में स्थापित भारत की पहली निर्वासित (प्रोविजनल) सरकार में प्रधानमंत्री की भूमिका निभाई थी। इस सरकार के राष्ट्रपति राजा महेंद्र प्रताप सिंह थे।
बरकतुल्ला कई भाषाओं के विद्वान थे। उन्हें अरबी, फारसी, अंग्रेजी, जापानी सहित आठ भाषाओं का ज्ञान था। उन्होंने इंग्लैंड, अमेरिका, जापान, जर्मनी, तुर्की, अफगानिस्तान और सोवियत संघ सहित कई देशों में रहकर भारत की स्वतंत्रता के लिए अभियान चलाया।
उन्होंने जापान की टोक्यो यूनिवर्सिटी में अरबी भाषा का अध्यापन भी किया। विदेशों में रहते हुए वे भारतीय क्रांतिकारियों के संपर्क में रहे और ब्रिटिश शासन के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थन जुटाने का प्रयास करते रहे।
मौलाना बरकतुल्ला का निधन 20 सितंबर 1927 को अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में हुआ था। वे जीवन भर भारत की स्वतंत्रता के लिए संघर्षरत रहे और उन्हें भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के अंतरराष्ट्रीय चेहरों में गिना जाता है।
फिलहाल विश्वविद्यालय के नाम परिवर्तन का प्रस्ताव प्रारंभिक स्तर पर है। अंतिम निर्णय राज्य सरकार की मंजूरी तथा अन्य वैधानिक प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही लागू हो सकेगा। इस मुद्दे पर आने वाले दिनों में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस और तेज होने की संभावना है।



