SAARTHI 2026 में झारखंड का विजन: जलवायु संरक्षण, जनभागीदारी और न्यायपूर्ण विकास पर सरकार का बड़ा संदेश

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कार्यक्रम में सतत विकास, जल-जंगल-जमीन की सुरक्षा, आदिवासी ज्ञान, समुदाय आधारित क्लाइमेट एक्शन और Just Transition को झारखंड के भविष्य की आधारशिला बताया गया।
रांची: जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौती से निपटने के लिए केवल सरकारी नीतियां या आधुनिक तकनीक पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि इसके लिए समाज की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है। इसी सोच के साथ आयोजित SAARTHI – जलवायु अखड़ा 2026 में झारखंड सरकार ने न्यायपूर्ण विकास, पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी पर आधारित विकास मॉडल को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया। कार्यक्रम में कहा गया कि हमारी जिम्मेदारी केवल वर्तमान पीढ़ी का विकास करना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित, समृद्ध और न्यायपूर्ण भविष्य तैयार करना भी है। जलवायु परिवर्तन से जुड़े प्रयास केवल आयोजनों तक सीमित न रहकर जनआंदोलन का रूप लें, ताकि हर नागरिक इस अभियान का भागीदार बन सके।

Community Action पर दिया गया जोर

कार्यक्रम में विभिन्न सामाजिक संगठनों, शोधकर्ताओं, नीति विशेषज्ञों और विकास सहयोगियों के साथ जलवायु परिवर्तन के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई। इस दौरान कहा गया कि Climate Action तभी सफल होगा जब Community Action मजबूत होगा। समुदाय आधारित विकास के लिए विश्वास, साझेदारी और संवाद को सबसे महत्वपूर्ण आधार बताया गया।

सरकार ने यह भी दोहराया कि महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों, ग्राम सभाओं, युवाओं और सामुदायिक संस्थाओं को विकास प्रक्रिया में लगातार भागीदार बनाया जा रहा है, ताकि झारखंड का विकास समावेशी और टिकाऊ हो सके।

आदिवासी ज्ञान और Nature-Based Solutions पर विशेष फोकस

कार्यक्रम में कहा गया कि झारखंड की सांस्कृतिक विरासत और आदिवासी समाज का प्रकृति के साथ संतुलित जीवन आज पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा है। पूर्वजों ने जंगल को संसाधन नहीं, बल्कि माँ माना और नदियों को जीवन का आधार समझा। आज दुनिया जिस Nature-Based Solutions की बात कर रही है, वह झारखंड की पारंपरिक जीवन शैली का हिस्सा रही है। सरकार ने स्पष्ट किया कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा करते हुए ऐसा विकास मॉडल तैयार किया जा रहा है, जिसमें पर्यावरण संरक्षण और लोगों की समृद्धि साथ-साथ आगे बढ़ें।

Just Transition को बताया विकास का नया मॉडल

कार्यक्रम में Just Transition की अवधारणा पर भी विस्तार से चर्चा की गई। कहा गया कि यह केवल ऊर्जा परिवर्तन का विषय नहीं, बल्कि न्यायपूर्ण विकास का दर्शन है। विकास ऐसा होना चाहिए जो लोगों की आजीविका सुरक्षित रखे, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करे और समाज के प्रत्येक वर्ग को समान अवसर प्रदान करे। सरकार ने विश्वास जताया कि झारखंड ऐसा राज्य बनेगा जहां उद्योगों के साथ रोजगार बढ़े, तकनीक के साथ संस्कृति सुरक्षित रहे और आर्थिक प्रगति के साथ सामाजिक न्याय भी सुनिश्चित हो।

भविष्य के लिए साझा संकल्प

कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों से आह्वान किया गया कि जलवायु परिवर्तन के खिलाफ यह अभियान केवल सरकारी पहल न होकर जनभागीदारी का स्थायी आंदोलन बने। सभी ने मिलकर ऐसा झारखंड बनाने का संकल्प लिया जिस पर आने वाली पीढ़ियां गर्व कर सकें और जहां विकास तथा प्रकृति संरक्षण एक-दूसरे के पूरक बनकर आगे बढ़ें।

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