क्या आप भी खा रहे हैं एक्सपायर्ड सामान? दिल्ली में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा

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सिर्फ सस्ता देखकर खरीदारी करना भारी पड़ सकता है। अगर कोई इंटरनेशनल ब्रांड का प्रोडक्ट बेहद कम कीमत पर मिल रहा है, तो सतर्क रहें। जांच में सामने आया है कि देश के कई शहरों में ऐसे गिरोह सक्रिय थे, जो एक्सपायर्ड फूड प्रोडक्ट्स को दोबारा पैक कर बाजार में बेच रहे थे।

अगर आप सिर्फ सस्ता देखकर इंटरनेशनल ब्रांड के खाने-पीने का सामान खरीद रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। दिल्ली पुलिस ने एक ऐसे संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो एक्सपायर हो चुके फूड प्रोडक्ट्स की एक्सपायरी और मैन्युफैक्चरिंग डेट बदलकर उन्हें दोबारा बाजार में बेच रहा था।

पुलिस के अनुसार, आरोपी चॉकलेट, कोल्ड ड्रिंक, सॉस, बेबी फूड, आटा समेत कई इंटरनेशनल ब्रांड के उत्पादों की रीपैकेजिंग कर उन्हें नए सामान की तरह बेचते थे। इस मामले में सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है और उनके पास से 20 लाख रुपये से अधिक कीमत के पैक्ड फूड और अन्य खाद्य उत्पाद बरामद किए गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि एक्सपायर्ड फूड का सेवन स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है। ऐसे उत्पाद फूड पॉइजनिंग, संक्रमण और गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं। इसलिए किसी भी खाद्य उत्पाद को खरीदने से पहले उसकी मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट जरूर जांचें।

कैसे होता है खेल?

दिल्ली और मुंबई में ऐसे ही एक्सपायरी सामान की री-पैकेजिंग और बिक्री करने वाले कई गिरोहों का पर्दाफाश हुआ है। हाल में महाराष्ट्र के ठाणे में इसी तरह के एक रैकेट का पता चला था। इसमें शामिल लोग केमिकल का इस्तेमाल करके असली एक्सपायरी डेट मिटा देते थे, नकली मैन्युफैक्चरिंग स्टिकर लगाते थे और उत्पादों को कम कीमत पर दोबारा बेचते थे। दिल्ली-एनसीआर और अन्य राज्यों में ऐसे कई रैकेट पकड़े गए हैं जो एक्सपायर्ड सामानों पर केमिकल या प्रिंटिंग मशीनों के जरिए नई एक्सपायरी डेट और बारकोड लगाकर उन्हें नया बताकर बेचते हैं।इससे पहले दिल्ली में पकड़े गए एक मामले की जांच में पता चला कि मुंबई के एजेंटों के जरिए कम कीमत पर एक्सपायर्ड हो चुके खाने-पीने का सामान खरीदा जाता था। मुंबई में यह सामान यूनाइटेड किंगडम, यूनाइटेड स्टेट्स और दुबई जैसे देशों से मंगवाया जाता था। जहाज से सामान भारत लाने के बाद मुंबई या दिल्ली जैसे बड़े शहरों में इन प्रोडक्ट्स पर एक्सपायरी डेट बदला जाता था और फिर इन्हें देश भर के बाजारों में भेजा जाता था।

भारी मुनाफे का खेल

जानकारों का कहना है कि अमेरिका, यूके या अन्य यूरोपीय देशों में बने फूड मैटेरियल क्वालिटी के मामले में भारत में बने सामानों से बेहतर माने जाते हैं। हालांकि विदेशों में बने सामानों की कीमत मेड इन इंडिया सामानों के मुकाबले काफी ज्यादा होती है। तब भी कुछ ग्राहक इन प्रोडक्ट को भारत में बन सामानों के मुकाबले तवज्जो देते हैं।

यही वजह है कि शातिर कारोबारी विदेशों से नियर टू एक्सपायरी या एक्सपायर्ड प्रोडक्ट बेहद सस्ते में खरीद लेते हैं। भारत में आयात करते समय कस्टम के समक्ष इन्हें एक्सपायर्ड सामान बता कर कस्टम ड्यूटी में भी रियायत ले ली जाती है। इन्हें भारतीय बाजार में काफी ऊंची कीमत पर बेचा जाता है।

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