
झारखंड में विधवा पेंशन बढ़ाने की मांग, 1000 नहीं अब 2500 रुपये देने की उठी आवाज
राष्ट्रीय नारी शक्ति महिला संगठन ने कहा- मंईयां सम्मान योजना की तरह विधवा, परित्यक्ता और निराश्रित महिलाओं को भी मिले समान आर्थिक सहायता

रांची: झारखंड में विधवा महिलाओं को मिलने वाली सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि बढ़ाने की मांग तेज हो गयी है। राष्ट्रीय नारी शक्ति महिला संगठन ने सरकार से विधवा, परित्यक्ता और निराश्रित महिलाओं की मासिक पेंशन बढ़ाकर 2500 रुपये करने की मांग की है।
रविवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में संगठन की अध्यक्ष आरती बेहरा ने कहा कि मौजूदा समय में महंगाई काफी बढ़ चुकी है। ऐसे में विधवा महिलाओं को मिलने वाली 1000 रुपये की मासिक पेंशन उनके लिए पर्याप्त नहीं है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब 18 से 50 वर्ष की पात्र महिलाओं को मंईयां सम्मान योजना के तहत हर महीने 2500 रुपये की सहायता दी जा रही है, तो विधवा और बेसहारा महिलाओं को इससे कम राशि क्यों दी जा रही है।
बच्चों की पढ़ाई से इलाज तक का खर्च उठाना मुश्किल
आरती बेहरा ने कहा कि पति की मृत्यु के बाद कई महिलाओं के सामने परिवार चलाने की बड़ी जिम्मेदारी आ जाती है। बच्चों की पढ़ाई, घर का राशन, बिजली बिल, किराया और इलाज जैसे जरूरी खर्चों का बोझ उन्हें खुद उठाना पड़ता है।
संगठन का कहना है कि ऐसी स्थिति में 1000 रुपये की पेंशन से परिवार की जरूरतें पूरी करना बेहद मुश्किल है। इसलिए सरकार को सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि पर दोबारा विचार करना चाहिए।
मंईयां सम्मान के बराबर पेंशन देने की मांग
राष्ट्रीय नारी शक्ति महिला संगठन ने मांग की है कि विधवा, परित्यक्ता और निराश्रित महिलाओं की पेंशन बढ़ाकर कम-से-कम 2500 रुपये प्रति माह की जाए। साथ ही मंईयां सम्मान योजना और सामाजिक सुरक्षा पेंशन के बीच आर्थिक सहायता में समानता लाने पर भी जोर दिया गया।
मौके पर विधायक सीपी सिंह ने महिलाओं के महत्व पर बात रखते हुए कहा कि नारी के बिना परिवार, समाज और देश की कल्पना नहीं की जा सकती।




