पतरातू, तिलैया और चांडिल जैसे बड़े जलाशयों में वाटर मेट्रो की संभावनाएं, बैटरी-डीजल या सोलर मॉडल पर हो सकता है संचालन; कोच्चि की तरह सस्ता और सुविधाजनक हो

सकता है सफर
रांची: झारखंड में पर्यटन को नया आयाम देने के लिए अब जलमार्ग आधारित परिवहन की संभावनाएं तलाशने की बात सामने आई है। केरल के कोच्चि की तर्ज पर झारखंड के बड़े डैम और जलाशयों में वाटर मेट्रो चलाने की संभावना बतायी गयी है। पतरातू, तिलैया और चांडिल जैसे जलाशय इसके लिए संभावित जगहों के तौर पर देखे जा सकते हैं।
कोच्चि वाटर मेट्रो के तकनीकी निदेशक और मुख्य महाप्रबंधक शाजी जनार्दन के मुताबिक, वाटर मेट्रो केवल समुद्री इलाकों तक सीमित नहीं है। झारखंड के बड़े जलस्रोतों में भी इसे पर्यटन और स्थानीय परिवहन के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
इसके अलावा साहिबगंज और राजमहल के बीच जल परिवहन में भी इसकी संभावनाएं तलाशी जा सकती हैं। इससे राज्य में इको टूरिज्म को बढ़ावा मिलने के साथ पर्यटकों को एक अलग तरह का सफर अनुभव मिल सकता है।

खास बात यह है कि झारखंड में वाटर मेट्रो को हाइब्रिड मॉडल पर चलाने का विकल्प भी हो सकता है। यानी जरूरत के मुताबिक बैटरी और डीजल दोनों का इस्तेमाल किया जा सकता है। वहीं, राज्य में सौर ऊर्जा की उपलब्धता को देखते हुए भविष्य में सोलर आधारित मॉडल पर भी विचार किया जा सकता है।
वाटर मेट्रो की एक और खासियत इसकी अपेक्षाकृत कम लागत है। कोच्चि में करीब 20 किलोमीटर की यात्रा के लिए अधिकतम 40 रुपये तक किराया लिया जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, झारखंड में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के जरिए इसे और किफायती बनाया जा सकता है।
यानी अगर योजना जमीन पर उतरती है, तो झारखंड के डैम सिर्फ घूमने की जगह नहीं रहेंगे, बल्कि पर्यटन के साथ परिवहन का नया माध्यम भी बन सकते हैं।

