जमीन की रिपोर्ट से लेकर DPR तक उलझी प्रक्रिया, 2022-23 में 19.73 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान भी नहीं हो सका खर्च

रांची। झारखंड में व्यावसायिक वाहन चालकों को बेहतर प्रशिक्षण देने और सड़क सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए प्रस्तावित ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर की योजना लंबे समय से फाइलों में अटकी हुई है। लेखापरीक्षा में सामने आया है कि राज्य के 21 जिलों में जमीन चिह्नित होने के बावजूद केंद्रों की स्थापना का काम आगे नहीं बढ़ सका।
जमीन से जुड़ी जानकारी जुटाने, डीपीआर तैयार करने और प्रशासनिक स्वीकृति की प्रक्रिया में लगातार देरी हुई। इसका सीधा असर व्यावसायिक वाहन चालकों के लिए आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाएं विकसित करने की योजना पर पड़ा है।
2022 में मांगी गयी थी जमीन की जानकारी
चालक प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना के लिए फरवरी 2022 में 10 जिलों के उपायुक्तों से सरकारी जमीन की उपलब्धता की रिपोर्ट मांगी गयी थी। इन केंद्रों में स्वचालित ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक जैसी सुविधाएं भी प्रस्तावित थीं।
लेकिन लेखापरीक्षा के मुताबिक जुलाई-अगस्त 2024 तक सिर्फ चार जिलों से ही आवश्यक जानकारी मिल सकी। रिपोर्ट समय पर नहीं मिलने के कारण योजना की आगे की प्रक्रिया प्रभावित हुई।
19.73 करोड़ रुपये का बजट, फिर भी नहीं हो सका इस्तेमाल
वित्तीय वर्ष 2022-23 में चालक प्रशिक्षण केंद्रों के लिए 19.73 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया था। भवन निर्माण विभाग और जेएसबीसीसीएल को मॉडल डीपीआर तैयार करने की जिम्मेदारी दी गयी थी।
हालांकि समय पर प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण बजट में उपलब्ध राशि खर्च नहीं की जा सकी और वित्तीय वर्ष समाप्त होने के बाद पूरी राशि वापस करनी पड़ी।
अगस्त 2024 में बना मॉडल DPR
काफी देरी के बाद जेएसबीसीसीएल ने अगस्त 2024 में एक मान्यता प्राप्त चालक प्रशिक्षण केंद्र के निर्माण के लिए करीब 4.93 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाला मॉडल डीपीआर तैयार किया।
लेकिन इसके बाद भी योजना को अंतिम मंजूरी नहीं मिल सकी। नवंबर 2024 में अलग-अलग सुविधाओं के लिए तीन स्वतंत्र डीपीआर तैयार करने का निर्देश दिया गया। इनमें स्वचालित परीक्षण पथ, परिवहन भवन समेत मान्यता प्राप्त और जिला स्तरीय चालक प्रशिक्षण केंद्र शामिल थे।
21 जिलों में जमीन होने के बावजूद दोबारा तलाश
लेखापरीक्षा में यह भी सवाल उठाया गया कि जब राज्य के 21 जिलों में 2 से 13 एकड़ तक जमीन पहले ही चिन्हित की जा चुकी थी, तो उन्हीं जमीनों का इस्तेमाल करने के बजाय नये सिरे से जमीन तलाशने की प्रक्रिया क्यों शुरू की गयी।
इससे पूरी प्रक्रिया और लंबी हो गयी। दो साल बाद भी सिर्फ चार जिलों से जमीन उपलब्धता की जानकारी मिल सकी और तीन साल से अधिक समय बीतने के बाद भी प्रस्तावित केंद्र जमीन पर नहीं उतर सके।
2017 में लिया गया था फैसला
राज्य में व्यावसायिक वाहन चालकों के लिए प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने का निर्णय पहली बार मार्च 2017 में लिया गया था। बाद में नवंबर 2018 में परिवहन विभाग ने इसके निर्माण की निगरानी अपने स्तर से कराने का निर्णय लिया।
इसके बावजूद योजना को जमीन पर उतारने में लगातार देरी होती रही।
केंद्र सरकार ने तय किए हैं मानक
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने अगस्त 2021 में चालक प्रशिक्षण और लाइसेंसिंग व्यवस्था को मानकीकृत करने के लिए दिशा-निर्देश जारी किये थे। इसमें चालक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान, क्षेत्रीय चालक प्रशिक्षण केंद्र और जिला चालक प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने की व्यवस्था शामिल थी।
जिला स्तर के केंद्र के लिए करीब दो एकड़ जमीन की जरूरत बतायी गयी थी। ऐसे में झारखंड में पहले से चिन्हित जमीन का उपयोग नहीं हो पाना और परियोजना का वर्षों तक लंबित रहना सरकारी स्तर पर योजना के क्रियान्वयन को लेकर सवाल खड़े करता है।

