झारखंड को बड़ा झटका, हजारीबाग-बगोदर समेत कई सड़क परियोजनाओं के प्रस्ताव केंद्र ने किए खारिज

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भूमि अधिग्रहण, फॉरेस्ट क्लियरेंस और तकनीकी मंजूरी में देरी बनी वजह; पेनल्टी और कंटीजेंसी फंड को लेकर केंद्र-राज्य में बढ़ा विवाद

रांची: झारखंड की कई महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं को लेकर राज्य सरकार को बड़ा झटका लगा है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने हजारीबाग-बगोदर सड़क परियोजना, हाटगम्हरिया-नोवामुंडी-बराईबुरू सड़क और एनएच-6 पर चाईबासा-हाटगम्हरिया मार्ग पर प्रस्तावित आरओबी समेत कई बड़े प्रोजेक्ट्स के प्रस्तावों को मंजूरी देने से इनकार कर दिया है।

केंद्रीय मंत्रालय की ओर से परियोजनाओं के प्रस्ताव खारिज किए जाने के पीछे मुख्य रूप से समय पर जमीन उपलब्ध नहीं होना, फॉरेस्ट क्लियरेंस में देरी और तकनीकी स्वीकृतियां समय पर नहीं मिलना जैसी वजहें बताई गई हैं।

कई अहम सड़क योजनाएं अटकीं

इन परियोजनाओं को झारखंड के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा था। इनका उद्देश्य प्रमुख शहरों, औद्योगिक इलाकों और खनिज क्षेत्रों के बीच सड़क संपर्क को बेहतर बनाना था। लेकिन निर्धारित समय के भीतर जरूरी प्रक्रियाएं पूरी नहीं होने के कारण केंद्र ने फिलहाल इन प्रस्तावों को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया। इससे इन सड़कों के निर्माण और विस्तार की योजनाएं प्रभावित हुई हैं।

जमीन और फॉरेस्ट क्लियरेंस बनी बड़ी अड़चन

केंद्र के स्तर से परियोजनाओं की समीक्षा के दौरान यह सामने आया कि कई मामलों में निर्माण के लिए जरूरी जमीन समय पर उपलब्ध नहीं कराई जा सकी। इसके अलावा जिन परियोजनाओं के लिए वन भूमि की जरूरत थी, वहां फॉरेस्ट क्लियरेंस की प्रक्रिया भी पूरी नहीं हो पाई। इसके साथ तकनीकी स्तर पर आवश्यक स्वीकृतियों में हुई देरी ने भी परियोजनाओं की रफ्तार पर असर डाला। केंद्र ने इन प्रक्रियागत कमियों को परियोजनाओं के खारिज होने की प्रमुख वजह माना है।

पेनल्टी को लेकर केंद्र और राज्य में मतभेद

सड़क परियोजनाओं में देरी और तय शर्तों का पालन नहीं होने के आधार पर केंद्रीय मंत्रालय की ओर से झारखंड के पथ निर्माण विभाग पर पेनल्टी लगाए जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि राज्य के पथ निर्माण विभाग ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाया है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि केंद्र को इस तरह दंड लगाने का कानूनी अधिकार है या नहीं, इस पर स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। इस मुद्दे को लेकर दोनों सरकारों के बीच मतभेद बढ़ते नजर आ रहे हैं।

कंटीजेंसी फंड के भुगतान पर भी विवाद

सड़क परियोजनाओं से जुड़े विवाद के बीच कंटीजेंसी फंड का भुगतान भी महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है। राज्य सरकार का आरोप है कि केंद्र की ओर से आपातकालीन खर्च के लिए मिलने वाली राशि का भुगतान रोका जा रहा है। राज्य के पथ निर्माण विभाग ने इस संबंध में केंद्र सरकार को पत्र भेजकर लंबित राशि जल्द जारी करने का अनुरोध किया है। विभाग का कहना है कि राशि नहीं मिलने से कई परियोजनाओं से जुड़े वित्तीय प्रबंधन पर असर पड़ रहा है।

पहले कई परियोजनाओं को मिल चुकी थी मंजूरी

केंद्रीय मंत्रालय की ओर से पहले झारखंड की कई सड़क परियोजनाओं को स्वीकृति दी जा चुकी है। लेकिन हाल में जिन प्रस्तावों को खारिज किया गया, उनमें तकनीकी और प्रक्रियात्मक कमियों को प्रमुख कारण माना गया है। अब राज्य सरकार के सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ निरस्त परियोजनाओं को लेकर आगे की रणनीति तय करनी होगी, वहीं दूसरी ओर जमीन, वन स्वीकृति और तकनीकी प्रक्रियाओं से जुड़ी कमियों को दूर करना होगा।

आगे क्या होगा?

इन परियोजनाओं के प्रस्ताव खारिज होने के बाद अब राज्य सरकार की नजर आगे की प्रक्रिया पर है। संबंधित विभाग को यह तय करना होगा कि किन परियोजनाओं में जरूरी औपचारिकताएं पूरी कर नए सिरे से प्रस्ताव भेजे जा सकते हैं।

साथ ही पेनल्टी और कंटीजेंसी फंड के भुगतान को लेकर केंद्र के साथ जारी विवाद का समाधान भी महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल हजारीबाग-बगोदर, हाटगम्हरिया-नोवामुंडी-बराईबुरू और चाईबासा-हाटगम्हरिया जैसी परियोजनाओं की प्रगति केंद्र की अगली मंजूरी और राज्य की तैयारियों पर निर्भर करेगी।

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