लॉकर या घर में रखा सोना अब दिला सकता है ब्याज, Gold Monetisation Scheme में बदलाव की तैयारी

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सरकार घरों में पड़े निष्क्रिय सोने को अर्थव्यवस्था में लाने पर कर रही विचार, ज्वेलर्स को भी मिल सकता है 0.75% से 1% तक प्रोत्साहन

नयी दिल्ली। अगर आपके घर या बैंक लॉकर में सोना रखा है और उस पर कोई कमाई नहीं हो रही, तो आने वाले समय में यह सोना आपके लिए ब्याज का जरिया बन सकता है। केंद्र सरकार गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम (GMS) में बदलाव करने की तैयारी कर रही है। इसका उद्देश्य लोगों के पास मौजूद ऐसे सोने को आर्थिक गतिविधियों में शामिल करना है, जो फिलहाल घरों या लॉकरों में निष्क्रिय पड़ा हुआ है।

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुमान के मुताबिक, भारतीय परिवारों के पास करीब 25,000 टन से अधिक सोना मौजूद है। सरकार की प्रस्तावित पहल का मकसद इस बड़ी मात्रा में मौजूद सोने को औपचारिक अर्थव्यवस्था में लाना और देश की सोने के आयात पर निर्भरता को कम करना है।

सोना बेचे बिना कमाई का मौका

इस योजना के तहत लोगों को अपना सोना बेचने की जरूरत नहीं होगी। पात्र संस्थान के माध्यम से सोना जमा करने पर उस पर ब्याज या रिटर्न हासिल करने का अवसर मिल सकता है। इसका सबसे बड़ा फायदा उन लोगों को हो सकता है जिनका सोना लंबे समय से घर या बैंक लॉकर में रखा है और उससे किसी तरह की आय नहीं होती। योजना के तहत जमा करने पर वही सोना वित्तीय लाभ का माध्यम बन सकता है।

घर में सोना रखने की चिंता भी होगी कम

घर में बड़ी मात्रा में सोना रखने पर उसकी सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है। योजना के तहत अधिकृत व्यवस्था में सोना जमा करने से इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी काफी हद तक कम हो सकती है। हालांकि, योजना के तहत सोना जमा करने से पहले उसकी शर्तों, ब्याज दर, अवधि और निकासी से जुड़े नियमों को समझना जरूरी होगा।

ज्वेलर्स को भी मिल सकता है प्रोत्साहन

प्रस्तावित बदलावों में ज्वेलर्स को योजना से जोड़ने की भी बात सामने आयी है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन की ओर से दिए गये प्रस्ताव के अनुसार, ज्वेलर्स ग्राहकों से प्राप्त सोने को रिफाइनर्स तक पहुंचा सकते हैं। इसके बदले ज्वेलर्स को करीब 0.75% से 1% तक प्रोत्साहन या कमीशन देने का प्रस्ताव बताया जा रहा है। इससे ग्राहकों से सोना जुटाने की प्रक्रिया को बढ़ावा मिल सकता है।

सोने का आयात घटाने में मदद की उम्मीद

भारत दुनिया के प्रमुख सोना आयातक देशों में शामिल है। वित्त वर्ष 2025-26 में देश ने करीब 71.9 अरब डॉलर का सोना आयात किया था। सरकार की योजना का एक प्रमुख उद्देश्य घरेलू स्तर पर उपलब्ध सोने का इस्तेमाल बढ़ाना है। इससे सोने की अतिरिक्त खरीद के लिए विदेशों पर निर्भरता कम करने और आयात बिल को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

2015 में शुरू हुई थी Gold Monetisation Scheme

केंद्र सरकार ने 2015 में गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम शुरू की थी। इसका उद्देश्य लोगों और संस्थानों के पास पड़े निष्क्रिय सोने को अर्थव्यवस्था में लाना और देश की सोने के आयात पर निर्भरता कम करना था। योजना के तहत जमा किए गये सोने को रिफाइन करके बैंकिंग और ज्वेलरी सेक्टर में इस्तेमाल किया जा सकता है। अब प्रस्तावित बदलावों के जरिए सरकार इस व्यवस्था को ज्यादा प्रभावी बनाने और ज्यादा से ज्यादा लोगों को इससे जोड़ने की कोशिश कर रही है।

यानी आने वाले समय में घर या लॉकर में पड़ा सोना सिर्फ संपत्ति सुरक्षित रखने का माध्यम नहीं, बल्कि नियमित रिटर्न हासिल करने का विकल्प भी बन सकता है।

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