आदिवासी बुनाई को मिला नया बाजार, ‘पंचा’ धोती के रूप में पेश हुई संताली हस्तकला

0
101
Share This Post

Tribal Weaving Finds a New Market as Santali Handicraft Takes Shape as ‘Pancha’ Dhoti

तिरुपुर: ओडिशा के मयूरभंज की पारंपरिक संताली हस्तकरघा कला को आधुनिक बाजार से जोड़ने की दिशा में नई पहल सामने आई है। रामराज कॉटन ने संताली बुनाई से प्रेरित ‘पंचा’ धोती लॉन्च की है।

कंपनी के अनुसार, इस पहल के तहत जनजातीय समुदाय की पारंपरिक बुनाई को आधुनिक धोती के रूप में बाजार तक पहुंचाया जा रहा है। इसका उद्देश्य कम प्रचलित हस्तकरघा परंपराओं को नई पहचान देने के साथ उन्हें बड़े ग्राहक वर्ग तक पहुंचाना है।

इस पहल का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य संताली हस्तकला से जुड़ी महिला बुनकरों के लिए आजीविका के नए अवसर पैदा करना भी है। पारंपरिक बुनाई को व्यावसायिक बाजार से जोड़कर स्थानीय कारीगरों और बुनकरों को आर्थिक रूप से मजबूत करने की कोशिश की गई है।

कंपनी के मुताबिक, ‘पंचा’ 100 प्रतिशत सूती कपड़े से तैयार की गई है। इसमें पारंपरिक कला की पहचान को बरकरार रखते हुए इसे आधुनिक बाजार की जरूरतों के अनुरूप पेश किया गया है।

ग्राहकों के लिए ‘पंचा’ धोती कंपनी के चुनिंदा स्टोर और ऑनलाइन माध्यम से उपलब्ध कराई गई है। इस पहल से मयूरभंज की संताली बुनाई को व्यापक पहचान मिलने के साथ पारंपरिक हस्तकरघा कला को नए बाजार से जोड़ने की उम्मीद है।

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here