सरकार ने पेश किया Tax Amendment Bill 2026, विदेशी निवेश, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और डिजिटल पेमेंट से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव का प्रस्ताव

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लोकसभा में पेश विधेयक में ऑफशोर फंड, सरकारी बॉन्ड, डायमंड कारोबार, इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर और डिजिटल पेमेंट को लेकर कई अहम टैक्स सुधार प्रस्तावित; कारोबार को आसान बनाने और निवेश बढ़ाने पर जोर।

नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने मंगलवार को लोकसभा में Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 पेश किया। इस विधेयक के जरिए टैक्स व्यवस्था में कई अहम बदलावों का प्रस्ताव रखा गया है। सरकार का कहना है कि इन संशोधनों का उद्देश्य विदेशी निवेश को आकर्षित करना, भारत में विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) को बढ़ावा देना, कारोबार को आसान बनाना और टैक्स नियमों में अधिक पारदर्शिता व स्पष्टता लाना है।

सरकार के अनुसार, यह विधेयक Income-tax (Amendment) Ordinance, 2026 का स्थान लेकर स्थायी कानून का रूप लेगा। इसके साथ ही वित्त अधिनियम, 2026 के बाद विभिन्न हितधारकों से मिले सुझावों को भी इसमें शामिल किया गया है।

सरकार का मानना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों, भू-राजनीतिक तनाव, अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अनिश्चितता और सप्लाई चेन में आ रही बाधाओं को देखते हुए टैक्स ढांचे में सुधार आवश्यक हो गया है, ताकि भारतीय अर्थव्यवस्था को अधिक मजबूत और प्रतिस्पर्धी बनाया जा सके।

विदेशी निवेशकों और ऑफशोर फंड को मिलेगी राहत

विधेयक में ऑफशोर इन्वेस्टमेंट फंड और उनके फंड मैनेजरों से जुड़े टैक्स नियमों को सरल बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। सरकार का लक्ष्य भारत को वैश्विक फंड मैनेजमेंट का प्रमुख केंद्र बनाना है।

प्रस्तावित बदलावों के तहत:

  • टैक्स अनुपालन (Compliance) से जुड़ी कई प्रक्रियाओं को आसान बनाया जाएगा।
  • निवेशकों की सुरक्षा से जुड़े मौजूदा प्रावधान यथावत रहेंगे।
  • विदेशी निवेशकों को टैक्स नियमों में अधिक स्पष्टता और स्थिरता मिलेगी।

इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगा बड़ा प्रोत्साहन

सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए टैक्स छूट की अवधि बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है। पहले यह छूट वित्त वर्ष 2030-31 तक लागू थी, जिसे अब बढ़ाकर 31 मार्च 2041 तक करने की योजना है।

इसके अलावा टैक्स लाभ का दायरा बढ़ाते हुए कई नए उत्पादों को भी शामिल करने का प्रस्ताव है, जिनमें—

  • लैपटॉप
  • टैबलेट
  • सर्वर
  • हियरएबल्स
  • वेयरेबल्स
  • इनसे जुड़े एक्सेसरीज़

सरकार का कहना है कि इससे भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण को गति मिलेगी और विदेशी कंपनियां भारतीय कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स के साथ अधिक निवेश करने के लिए प्रोत्साहित होंगी।

सरकारी बॉन्ड और डायमंड सेक्टर के लिए भी प्रस्ताव

विधेयक में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) और Bank for International Settlements (BIS) को सरकारी प्रतिभूतियों (Government Securities) से मिलने वाले ब्याज और पूंजीगत लाभ (Capital Gains) पर टैक्स छूट देने का प्रस्ताव रखा गया है। हालांकि, इसके लिए निर्धारित रिपोर्टिंग नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा।

इसके अलावा भारत को वैश्विक डायमंड ट्रेड हब बनाने के उद्देश्य से योग्य विदेशी डायमंड माइनिंग कंपनियों, ब्रोकर्स, एग्रीगेटर्स और नीलामी संस्थाओं को अधिसूचित विशेष क्षेत्रों में रफ डायमंड की बिक्री से होने वाली आय पर 31 मार्च 2041 तक टैक्स छूट देने का प्रस्ताव भी शामिल किया गया है।

डिजिटल पेमेंट और कारोबार से जुड़े नियमों में बदलाव

विधेयक में बिजनेस ट्रस्ट के यूनिट होल्डर्स को मिलने वाले डिविडेंड पर लागू एक टैक्स प्रतिबंध हटाने का प्रस्ताव भी रखा गया है, यदि संबंधित SPV नई कर व्यवस्था अपनाता है।

इसके साथ ही Payment and Settlement Systems Act, 2007 में संशोधन का भी प्रस्ताव है। इसके तहत इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट से जुड़े कुछ प्रावधानों में Income-tax Act का संदर्भ हटाया जाएगा। साथ ही केंद्र सरकार को यह अधिकार देने का प्रस्ताव है कि वह ऐसे डिजिटल भुगतान माध्यम अधिसूचित कर सके, जिन पर बैंक या पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगा सकेंगे।

सरकार का कहना है कि यह विधेयक टैक्स व्यवस्था को अधिक सरल, निवेश-अनुकूल और भविष्य की आर्थिक जरूरतों के अनुरूप बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यदि संसद से मंजूरी मिलती है, तो इन प्रस्तावों के लागू होने से निवेश, मैन्युफैक्चरिंग, डिजिटल पेमेंट और कारोबार के माहौल को नई गति मिलने की उम्मीद है।

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