Skip to content
-
Subscribe to our newsletter & never miss our best posts. Subscribe Now!
  • https://www.facebook.com/
  • https://twitter.com/
  • https://t.me/
  • https://www.instagram.com/
  • https://youtube.com/
Abua News Jharkhand Abua News Jharkhand

VOICE OF JHARKHAND

Abua News Jharkhand Abua News Jharkhand

VOICE OF JHARKHAND

  • Home
  • India
  • Jharkhand
  • International
  • Latest News
  • Trending News
  • Travel & Culture
  • Editor’s POV
  • Sports
  • Education
  • Reader’s Column
  • CM Desk

Welcome to the ultimate source for fresh perspectives! Explore curated content to enlighten, entertain and engage global readers.

  • Facebook
  • X
  • Instagram
  • LinkedIn

Recent Posts

  • दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह दूसरी बार बने माता-पिता, घर आई नन्ही परी; दुआ को मिली छोटी बहन
    by Team Abua
    September 19, 2026
  • हीरे के झुमके ठुकराकर मांगा था इनसाइक्लोपीडिया, भारत की ‘वेदर वुमन’ अन्ना मणि ने मौसम विज्ञान में रचा इतिहास
    by Team Abua
    September 19, 2026
  • झारखंड वन विभाग में बड़ा फेरबदल, 9 अधिकारियों को मिला अतिरिक्त प्रभार; जानें किसे मिली कौन-सी जिम्मेदारी
    by Team Abua
    September 19, 2026
  • झारखंड में थैलेसीमिया-सिकल सेल मरीजों को बड़ी राहत, अब निजी अस्पतालों में भी मुफ्त मिलेगा ब्लड ट्रांसफ्यूजन
    by Team Abua
    September 19, 2026
  • Home
  • India
  • Jharkhand
  • International
  • Latest News
  • Trending News
  • Travel & Culture
  • Editor’s POV
  • Sports
  • Education
  • Reader’s Column
  • CM Desk
Buy Now
Close

Search

INDIAlatest newsTechnologyweather

हीरे के झुमके ठुकराकर मांगा था इनसाइक्लोपीडिया, भारत की ‘वेदर वुमन’ अन्ना मणि ने मौसम विज्ञान में रचा इतिहास

By Team Abua
September 19, 2026 3 Min Read
0
Share This Post

महज 12 साल की उम्र में पढ़ डालीं लाइब्रेरी की सैकड़ों किताबें, आगे चलकर करीब 100 मौसम उपकरणों को किया डिजाइन; ओजोन रिसर्च में भी दिया अहम योगदान

रांची: आजादी के शुरुआती दौर में जब महिलाओं के लिए पढ़ाई और करियर के मौके बेहद सीमित थे, उसी समय एक ऐसी महिला सामने आईं, जिन्होंने अपनी मेहनत और वैज्ञानिक सोच से अलग पहचान बनाई। नाम था अन्ना मणि, जिन्हें आगे चलकर ‘वेदर वुमन ऑफ इंडिया’ के नाम से जाना गया।

23 अगस्त 1918 को केरल के तिरुवनंतपुरम में जन्मीं अन्ना मणि अपने परिवार की आठ संतानों में सातवीं थीं। उनके पिता सिविल इंजीनियर थे और परिवार के पास इलायची के बागान भी थे। उस समय भारत में महिलाओं की साक्षरता बेहद कम थी, लेकिन अन्ना मणि को बचपन से ही पढ़ने का जबरदस्त शौक था।

कहा जाता है कि महज 12 साल की उम्र में उन्होंने एक सार्वजनिक पुस्तकालय में मौजूद मलयालम की लगभग सभी किताबें पढ़ डाली थीं।

हीरे के झुमके नहीं, मांगा था इनसाइक्लोपीडिया

अन्ना मणि की पढ़ाई के प्रति लगन का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके आठवें जन्मदिन पर पिता ने उन्हें हीरे के झुमके दिए। लेकिन अन्ना ने यह तोहफा लेने से इनकार कर दिया और इसके बदले इनसाइक्लोपीडिया यानी विश्वकोष का सेट मांगा।

वैज्ञानिक सोच की नींव उनके घर में ही पड़ चुकी थी। उनके पिता बच्चों को सिखाते थे कि किसी भी बात को बिना जांचे-परखे सच नहीं मानना चाहिए। यही सोच आगे चलकर अन्ना मणि के वैज्ञानिक जीवन का आधार बनी।

भौतिकी पढ़ना चाहती थीं, किस्मत ने मौसम विज्ञान से जोड़ दिया

ग्रेजुएशन के बाद साल 1940 में अन्ना मणि को भारतीय विज्ञान संस्थान, बैंगलोर में भौतिकी में रिसर्च के लिए स्कॉलरशिप मिली। यहां उन्होंने नोबेल पुरस्कार विजेता सी.वी. रमन के साथ माणिक और हीरे की स्पेक्ट्रोमेट्री पर काम किया।

उनके शोध के आधार पर पांच रिसर्च पेपर और एक Ph.D. शोध प्रकाशित हुआ। हालांकि, मास्टर डिग्री नहीं होने की वजह से उन्हें Ph.D. नहीं दी गई।

इसके बाद उन्हें लंदन में भौतिकी की पढ़ाई के लिए सरकारी स्कॉलरशिप मिली। लेकिन वहां पहुंचने पर उन्हें मेट्रोलॉजिकल इंस्ट्रूमेंटेशन में इंटर्नशिप का मौका मिला। यही संयोग आगे चलकर उनके पूरे करियर की दिशा बदलने वाला साबित हुआ।

आजादी के बाद भारत लौटकर मौसम विभाग से जुड़ीं

1948 में भारत लौटने के बाद अन्ना मणि ने भारतीय मौसम विभाग ज्वॉइन किया। यहां उन्होंने मौसम से जुड़े उपकरणों पर काम शुरू किया। उनका मकसद भारत को इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में योगदान देना था।

समय के साथ वह मौसम विभाग में उप महानिदेशक के पद तक पहुंचीं। अपनी टीम के साथ उन्होंने करीब 100 मौसम संबंधी उपकरणों को डिजाइन किया और बाद में उनके उत्पादन की दिशा में भी काम किया।

ओजोन परत पर भी किया अहम काम

अन्ना मणि के शोध का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र ओजोन भी था। उन्होंने ओजोनसॉन्ड नाम का उपकरण विकसित किया, जिसकी मदद से वायुमंडल में ओजोन की सटीक माप करने में मदद मिली।

उनके काम से यह समझने में भी मदद मिली कि अलग-अलग भौगोलिक परिस्थितियों और वायु प्रदूषण के आधार पर ओजोन की मोटाई में अंतर हो सकता है। पृथ्वी पर जीवन की सुरक्षा में ओजोन परत की भूमिका को लेकर उनका काम अपने समय में काफी महत्वपूर्ण माना गया।

महिला होने को कभी अपनी सीमा नहीं बनने दिया

अन्ना मणि ने अपने करियर के साथ-साथ निजी जीवन को लेकर भी अपने फैसले खुद लिए। उन्होंने शादी नहीं करने का विकल्प चुना और अपना पूरा ध्यान शिक्षा, शोध और वैज्ञानिक कार्यों पर लगाया।

वह पुरुषों और महिलाओं को बौद्धिक क्षमता के मामले में समान मानती थीं। उनका कहना था कि उन्होंने जिंदगी में जो फैसले लिए, उन पर उनके महिला होने का कोई प्रभाव नहीं पड़ा।

2001 में करीब 83 वर्ष की उम्र में स्ट्रोक के बाद अन्ना मणि का निधन हो गया। लेकिन मौसम विज्ञान, मौसम उपकरणों और ओजोन रिसर्च में उनका योगदान आज भी भारतीय विज्ञान के इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

    Tags:

    indialatestnews
    Author

    Team Abua

    Follow Me
    Other Articles
    Previous

    झारखंड वन विभाग में बड़ा फेरबदल, 9 अधिकारियों को मिला अतिरिक्त प्रभार; जानें किसे मिली कौन-सी जिम्मेदारी

    Next

    दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह दूसरी बार बने माता-पिता, घर आई नन्ही परी; दुआ को मिली छोटी बहन

    No Comment! Be the first one.

      Leave a Reply Cancel reply

      Your email address will not be published. Required fields are marked *

      Recent Posts

      • दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह दूसरी बार बने माता-पिता, घर आई नन्ही परी; दुआ को मिली छोटी बहन
        by Team Abua
        September 19, 2026
      • Nostradamus Predictions
        विश्व युद्ध सहित 6 हज़ार से भी अधिक भविष्यवाणी करने वाले इस व्यक्ति की 2023 में होने वाली घटनाओं की भविष्यवाणी को जानिये
        by abua news jharkhand
        September 20, 2022
      • jharkhand congress
        एकबार फिर राहुल गाँधी को कांग्रेस का अध्यक्ष बनाने की समर्थन की राह पर झारखंड कांग्रेस
        by abua news jharkhand
        September 21, 2022
      • sbi recruitment 2022
        SBI लाया बम्पर बहाली : 5000 से अधिक जूनियर एसोसिएट पदों के लिए जल्दी करें आवेदन
        by abua news jharkhand
        September 21, 2022

      Search...

      Welcome to the ultimate source for fresh perspectives! Explore curated content to enlighten, entertain and engage global readers.

      • Facebook
      • X
      • Instagram
      • LinkedIn

      Latest Posts

      • दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह दूसरी बार बने माता-पिता, घर आई नन्ही परी; दुआ को मिली छोटी बहन
      • हीरे के झुमके ठुकराकर मांगा था इनसाइक्लोपीडिया, भारत की ‘वेदर वुमन’ अन्ना मणि ने मौसम विज्ञान में रचा इतिहास
      • झारखंड वन विभाग में बड़ा फेरबदल, 9 अधिकारियों को मिला अतिरिक्त प्रभार; जानें किसे मिली कौन-सी जिम्मेदारी
      • झारखंड में थैलेसीमिया-सिकल सेल मरीजों को बड़ी राहत, अब निजी अस्पतालों में भी मुफ्त मिलेगा ब्लड ट्रांसफ्यूजन
      • चतरा के भौराज में बनेगा 68.48 मीटर लंबा पुल, सरकार ने दी ₹3.13 करोड़ की मंजूरी

      Pages

      • About
      • Contact
      • Stories
      • Typography
      • Terms and conditions

      Contact

      Phone

      +91 91556 65558

      Email

      abjnewsbhrjhk@gmail.com

      Location

      Latma, Ranchi, India, 834003

      Copyright 2026 — Abua News Jharkhand. All rights reserved. Abua Media LLP