ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब, यूएई और इराक वैकल्पिक पाइपलाइन और नए निर्यात मार्ग विकसित कर रहे हैं, ताकि वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित न हो।

नई दिल्ली/रियाद: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर ईरान की आक्रामक रणनीति के बीच खाड़ी देशों ने वैश्विक तेल आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए नई रणनीति पर काम तेज कर दिया है। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और इराक अब ऐसे वैकल्पिक मार्ग विकसित कर रहे हैं, जिनसे होर्मुज पर निर्भरता कम की जा सके। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य से सामान्य परिस्थितियों में वैश्विक कच्चे तेल की लगभग 20 प्रतिशत आपूर्ति गुजरती है। ऐसे में यदि यह मार्ग लंबे समय तक बाधित रहता है, तो अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर बड़ा असर पड़ सकता है।
सऊदी अरब का फोकस रेड सी कॉरिडोर पर
सऊदी अरब पहले से ही अपनी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के जरिए पूर्वी तेल क्षेत्रों को रेड सी के यानबू पोर्ट से जोड़ता है। इस मार्ग से तेल को टैंकरों में भरकर आगे अरब सागर और स्वेज नहर के रास्ते दुनिया के विभिन्न देशों तक भेजा जाता है।
UAE बढ़ा रहा फुजैराह नेटवर्क
संयुक्त अरब अमीरात भी फुजैराह पाइपलाइन नेटवर्क का विस्तार कर रहा है। इसके तहत लगभग 300 किलोमीटर लंबी नई पाइपलाइन बनाई जा रही है, जिसकी अनुमानित लागत 3 अरब डॉलर है। इस परियोजना का उद्देश्य फुजैराह बंदरगाह तक तेल की आपूर्ति क्षमता में प्रतिदिन 12 लाख बैरल से अधिक की बढ़ोतरी करना है। रिपोर्टों के अनुसार, यह परियोजना करीब आधी पूरी हो चुकी है और इसे 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
इराक भी तैयार कर रहा नया ऊर्जा कॉरिडोर
इराक ने भी तुर्की, जॉर्डन और सीरिया के रास्ते नए पाइपलाइन नेटवर्क की योजना पर काम शुरू कर दिया है। प्रस्तावित परियोजना के तहत बसरा से तेल को तुर्की के सेहान बंदरगाह और सीरिया के बनियास पोर्ट तक पहुंचाया जाएगा। इसके अलावा बसरा से जॉर्डन के अकाबा पोर्ट तक पाइपलाइन परियोजना को भी आगे बढ़ाने पर चर्चा चल रही है।
क्या कम हो जाएगी होर्मुज पर निर्भरता?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये परियोजनाएं समय पर पूरी होती हैं, तो आने वाले वर्षों में वैश्विक तेल निर्यात का बड़ा हिस्सा होर्मुज के बजाय वैकल्पिक मार्गों से भेजा जा सकेगा। इससे किसी संभावित अवरोध की स्थिति में भी तेल आपूर्ति पूरी तरह प्रभावित नहीं होगी। हालांकि सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि नई पाइपलाइनें भी पूरी तरह जोखिम से मुक्त नहीं हैं। रेड सी और अन्य क्षेत्रों में सक्रिय सशस्त्र समूह तथा क्षेत्रीय संघर्ष इन ऊर्जा परियोजनाओं के लिए भविष्य में चुनौती बन सकते हैं। फिलहाल खाड़ी देशों का लक्ष्य स्पष्ट है कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को बाधित होने से बचाया जाए और अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की उपलब्धता बनाए रखी जाए।

