School Management Committee: 50% महिला आरक्षण अनिवार्य
रांची: झारखंड सरकार ने सरकारी विद्यालयों की व्यवस्था को अधिक सहभागी और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से बड़ा फैसला लिया है। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने नई गाइडलाइन जारी करते हुए राज्य के सभी सरकारी विद्यालयों की विद्यालय प्रबंधन समिति (SMC) में 50 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का निर्णय लिया है।
नई व्यवस्था के तहत स्कूलों के संचालन और विकास में महिलाओं, विशेषकर छात्र-छात्राओं की माताओं की भूमिका पहले से अधिक मजबूत होगी। सरकार का मानना है कि महिलाओं की सक्रिय भागीदारी से बच्चों की शिक्षा, नियमित उपस्थिति और विद्यालयों की गुणवत्ता में सकारात्मक बदलाव आएगा। यह नई व्यवस्था राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप लागू की जा रही है और इसका लाभ राज्य के लगभग 35 हजार सरकारी विद्यालयों को मिलेगा।
School Management Committee: नई संरचना और सदस्यों की संख्या
नई गाइडलाइन के अनुसार, School Management Committee का आकार विद्यालय में नामांकित छात्रों की संख्या के आधार पर तय होगा:
- 100 तक विद्यार्थियों वाले विद्यालयों में 15 सदस्य
- 101 से 500 विद्यार्थियों वाले विद्यालयों में 20 सदस्य
- 500 से अधिक विद्यार्थियों वाले विद्यालयों में 25 सदस्य
इन सदस्यों में से 50% महिलाएं होंगी, जिससे School Management Committee में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित होगी। यह कदम महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ी पहल है।
School Management Committee: अभिभावकों की बढ़ेगी भागीदारी
सरकार ने School Management Committee के गठन के नियमों में भी बदलाव किया है। अब समिति में अभिभावकों की भागीदारी दो-तिहाई होगी। इनमें कम से कम 75 प्रतिशत सदस्य विद्यार्थियों के माता या पिता होंगे।
साथ ही 25 प्रतिशत प्रतिनिधित्व सामाजिक एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को दिया जाएगा, ताकि सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके। इससे School Management Committee में सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व होगा।
School Management Committee: क्या-क्या होगी जिम्मेदारियां?
School Management Committee केवल एक प्रशासनिक इकाई नहीं होगी, बल्कि विद्यालय की प्रगति की निगरानी भी करेगी। School Management Committee की जिम्मेदारियों में शामिल होंगे:
- स्कूल में शिक्षा की गुणवत्ता की निगरानी
- विद्यार्थियों की उपस्थिति पर नजर
- मध्याह्न भोजन की व्यवस्था
- स्वच्छता और आधारभूत सुविधाओं का ध्यान
- विद्यालय विकास योजना तैयार करना
- सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन
- अभिभावक-शिक्षक बैठकों का आयोजन
- शिक्षकों के कार्य प्रदर्शन की समीक्षा
School Management Committee: क्यों जरूरी है यह बदलाव?
शिक्षा विभाग का कहना है कि School Management Committee में यह बदलाव स्कूलों में समुदाय की भागीदारी बढ़ाने के साथ-साथ अभिभावकों और शिक्षकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करेगा। इससे सरकारी विद्यालयों की कार्यप्रणाली अधिक जवाबदेह बनेगी और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
School Management Committee की यह नई व्यवस्था राज्य की स्कूली शिक्षा में एक महत्वपूर्ण सुधार के रूप में देखी जा रही है, जिससे शिक्षा व्यवस्था को अधिक समावेशी, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में नई गति मिलने की उम्मीद है।
Rohit Sharma: लॉर्ड्स वनडे नहीं होगा आखिरी, BCCI ने संन्यास की अटकलों पर लगाई रोक, जानें क्या कहा


