सुप्रीम कोर्ट ने कहा, SIR के बाद वोटर लिस्ट से नाम हटने का असर केवल चुनावी अधिकारों तक सीमित है। राशन जैसी सरकारी सुविधाएं तब तक नहीं रोकी जा सकतीं, जब तक संबंधित अपील पर अंतिम फैसला नहीं हो जाता।

रांची: पश्चिम बंगाल में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम टिप्पणी की है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति का नाम SIR के बाद मतदाता सूची से हट जाता है, तब भी वह राशन जैसी सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का हकदार बना रहेगा।
मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई, न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। याचिकाकर्ताओं ने मांग की थी कि राज्य सरकार राशन कार्ड को हटाने, रद्द करने या निलंबित करने जैसी कार्रवाई तब तक न करे, जब तक वोटर लिस्ट से नाम हटाने के खिलाफ दायर अपील पर सक्षम अपीलीय प्राधिकरण अंतिम फैसला नहीं दे देता।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि SIR के जरिए नागरिकता संबंधी जांच का परिणाम सीमित दायरे में है। इसका सीधा असर केवल मतदाता सूची में नाम बने रहने और चुनावी प्रक्रिया में भाग लेने के अधिकार पर पड़ता है, न कि सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के लाभ पर। अदालत की इस टिप्पणी से स्पष्ट हो गया है कि केवल SIR के आधार पर किसी पात्र व्यक्ति की राशन जैसी आवश्यक सरकारी सुविधाएं नहीं रोकी जा सकतीं।

