
Value Addition: झारखंड के खनिजों का स्थानीय स्तर पर हो मूल्य संवर्धन, शिक्षा और रोजगार को मिले प्राथमिकता
Value Addition: झारखंड के खनिजों का स्थानीय स्तर पर हो मूल्य संवर्धन, शिक्षा और रोजगार को मिले प्राथमिकता
झारखंड के पास प्राकृतिक संसाधनों की कोई कमी नहीं है, लेकिन इन संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल और स्थानीय स्तर पर उनसे रोजगार व आय बढ़ाना अब बड़ी चुनौती है। राज्य के समग्र विकास को लेकर शुक्रवार को प्रेस क्लब सभागार में ‘झारखंड: समग्र विकास के लिए संसाधन’ विषय पर परिचर्चा आयोजित की गयी। कार्यक्रम का आयोजन सामाजिक-आर्थिक एवं संसदीय अध्ययन केंद्र की ओर से किया गया।
Value Addition: खनिजों का स्थानीय स्तर पर हो मूल्य संवर्धन
परिचर्चा में राज्य की अर्थव्यवस्था, खनिज संपदा, राजस्व बढ़ाने की संभावनाओं, केंद्र और राज्य के बीच वित्तीय संबंध तथा स्थानीय स्तर पर संसाधन जुटाने जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। इस दौरान ‘झारखंड: संसाधन अभिवृद्धि की अनिवार्यता’ स्मारिका का भी विमोचन किया गया।
पूर्व राज्यसभा सदस्य डॉ. महेश पोद्दार ने Value Addition पर जोर देते हुए कहा कि झारखंड की सबसे बड़ी आर्थिक ताकत उसके खनिज संसाधन हैं। लेकिन केवल खनिज निकालकर दूसरे स्थानों पर भेजने से राज्य को उसका पूरा आर्थिक लाभ नहीं मिल पाता।
उन्होंने खनिजों का राज्य में ही Value Addition करने पर जोर दिया। इसके लिए तकनीकी क्षमता विकसित करने, उद्योगों को बढ़ावा देने, बाजार का विस्तार करने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करने की जरूरत बतायी। Value Addition से ही राज्य की अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक मजबूती मिल सकती है।
Value Addition: बजट बढ़ना ही विकास का पैमाना नहीं
कार्यक्रम में वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि झारखंड के गठन के शुरुआती वर्षों में राज्य का बजट करीब 6,000 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो अब काफी बढ़ चुका है। हालांकि, उन्होंने कहा कि केवल बजट का आकार बढ़ने से विकास को नहीं मापा जा सकता।
विकास का असली असर समाज के जीवन में दिखाई देना चाहिए। उन्होंने मानव विकास, बेहतर शिक्षा और रोजगार के अवसरों को आर्थिक विकास के साथ जोड़ने की जरूरत बतायी। Value Addition के साथ-साथ सामाजिक प्रभाव पर भी ध्यान देने की जरूरत है।
Value Addition: शिक्षा को विकास का आधार बनाने पर जोर
अर्थशास्त्री डॉ. हरिश्वर दयाल ने कहा कि वित्तीय हस्तांतरण के जरिए झारखंड को फायदा मिला है, लेकिन इसके बावजूद राज्य की प्रति व्यक्ति आय अभी भी राष्ट्रीय औसत से काफी पीछे है।
उन्होंने कहा कि राज्य के दीर्घकालिक विकास के लिए शिक्षा को सबसे अहम प्राथमिकताओं में शामिल करना होगा। इसके साथ ही स्थानीय निकायों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और उन्हें अधिक वित्तीय स्वायत्तता देने की जरूरत है। Value Addition के साथ शिक्षा और कौशल विकास पर ध्यान देने से ही झारखंड के युवाओं को रोजगार मिल सकेगा।
Value Addition: कार्यक्रम में करीब डेढ़ सौ लोग रहे मौजूद
कार्यक्रम का संचालन डॉ. कमल बोस ने किया, जबकि विषय प्रवेश संस्था के सचिव अयोध्या नाथ मिश्रा ने कराया। मौके पर डॉ. एचपी नारायण, प्रोफेसर डॉ. चंद्रकांत शुक्ला, प्रोफेसर शिव शंकर प्रसाद, शिव शंकर उरांव, अरुण कुमार मिश्रा, एसके किड़ों समेत करीब डेढ़ सौ लोग मौजूद रहे।
Value Addition झारखंड के आर्थिक विकास की कुंजी है। विशेषज्ञों का मानना है कि खनिजों का स्थानीय स्तर पर Value Addition करने, शिक्षा को प्राथमिकता देने और स्थानीय निकायों को मजबूत बनाने से ही राज्य की अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिल सकती है। Value Addition के बिना झारखंड अपने संसाधनों का पूरा लाभ नहीं उठा सकता।





