पेंटागन ने पहली बार स्वीकारा कि ईरान के जवाबी हमलों में करीब 100 अमेरिकी सैनिक घायल हुए। अधिकांश को सिर में हल्की चोटें आईं, जबकि 96% सैनिक इलाज के बाद ड्यूटी पर लौट चुके हैं।

वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका ने पहली बार आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है कि ईरान के जवाबी हमलों में उसके करीब 100 सैनिक घायल हुए हैं। यह जानकारी अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन ने दी है। इससे पहले अमेरिका ने इस घटना में सैनिकों के घायल होने के बारे में विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की थी।
पेंटागन के प्रवक्ता शॉन पार्नेल ने बताया कि 7 जुलाई के बाद हुए ईरानी हमलों में अधिकांश अमेरिकी सैनिकों को सिर में हल्की चोटें आईं। उन्होंने कहा कि घायलों में से करीब 96 प्रतिशत सैनिक इलाज के बाद दोबारा ड्यूटी पर लौट चुके हैं, जबकि बाकी सैनिकों का उपचार जारी है।

ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ा तनाव
ईरान और अमेरिका के बीच हाल के दिनों में सैन्य तनाव लगातार बढ़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार सुबह अमेरिका ने ईरान के नौ शहरों पर हवाई हमले किए। वहीं अमेरिकी पक्ष का दावा है कि ईरान के पांच ड्रोन भी मार गिराए गए।
विश्लेषकों का मानना है कि दोनों देशों के बीच जारी जवाबी कार्रवाई से पश्चिम एशिया में सुरक्षा हालात और अधिक संवेदनशील हो सकते हैं।
पाकिस्तान पहुंचे ईरानी गृह मंत्री
बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के बीच ईरान के गृह मंत्री एस्कंदर मोमेनी पाकिस्तान पहुंचे, जहां उन्होंने सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से मुलाकात की। माना जा रहा है कि दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय सुरक्षा, सीमा पर हालात और संभावित तनाव कम करने के उपायों पर चर्चा की।
भारत और चीन के तेल टैंकरों ने बदला मार्ग

समुद्री सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच भारत और चीन के लिए कच्चा तेल लेकर जा रहे दो बड़े तेल टैंकरों ने अपना मार्ग बदल लिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, यमन के हूती विद्रोहियों की गतिविधियों और लाल सागर क्षेत्र में बढ़ते खतरे के कारण जहाजों ने बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य से गुजरने के बजाय वैकल्पिक रास्ता चुना।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर बढ़ी चिंता
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव का असर अब पूरे पश्चिम एशिया में दिखाई देने लगा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि दोनों देशों के बीच तनाव कम नहीं हुआ, तो इसका प्रभाव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।

