
Tribal Gathering: रांची में परिसीमन के खिलाफ आदिवासी महाजुटान, 5 लाख लोगों का जुटान
Tribal Gathering: रांची में परिसीमन के खिलाफ आदिवासी महाजुटान, 5 लाख लोगों का जुटान
रांची के मोरहाबादी मैदान में रविवार को एक विशाल tribal gathering का आयोजन किया गया, जिसमें प्रस्तावित परिसीमन (delimitation) और खान-खनिज संशोधन अधिनियम (MMDR Amendment) के खिलाफ आदिवासी समाज ने एकजुट होकर अपनी आवाज उठाई. इस tribal gathering को आदिवासी एकता महाजुटान का नाम दिया गया और आयोजकों ने इसमें लगभग पांच लाख लोगों के जुटने का दावा किया है.
Tribal Gathering: क्यों आयोजित किया गया महाजुटान?
इस tribal gathering का मुख्य उद्देश्य परिसीमन प्रक्रिया का विरोध करना था, जिससे आदिवासी समुदाय के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर प्रभाव पड़ने की आशंका है. वर्तमान में झारखंड विधानसभा की 81 सीटों में से 28 सीटें अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित हैं, जबकि 14 लोकसभा सीटों में से 5 सीटें ST के लिए आरक्षित हैं. इस tribal gathering में वक्ताओं ने चेतावनी दी कि जनसंख्या के आधार पर होने वाले संभावित पुनर्गठन से इन आरक्षित सीटों की संख्या घट सकती है.
इस tribal gathering का नेतृत्व पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता बंधु तिर्की ने किया. उन्होंने कहा कि 2007-08 की परिसीमन रिपोर्ट के आधार पर यदि परिसीमन किया गया तो आदिवासी समाज इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगा और इसके खिलाफ संघर्ष जारी रहेगा.
Tribal Gathering: कौन-कौन शामिल हुए?
इस tribal gathering में कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को इस tribal gathering में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था, लेकिन वे उपस्थित नहीं हुए. हालांकि, उन्होंने अपना संदेश भेजा जिसमें उन्होंने आदिवासी समाज की मांग का समर्थन किया और 2007 के परिसीमन विरोधी आंदोलन को याद करते हुए एकजुट रहने की अपील की.
इस tribal gathering के मंच पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, प्रभारी के. राजू, मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की, सुखदेव भगत, विधायक राजेश कच्छप और ऑल इंडिया आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया समेत कई नेता मौजूद रहे.
शिल्पी नेहा तिर्की ने इस tribal gathering में कहा कि “दिल्ली में बैठकर यह तय नहीं करने दिया जाएगा कि आदिवासियों का प्रतिनिधित्व कैसा होगा” और उन्होंने संघर्ष को सड़क से सदन और सदन से दिल्ली तक ले जाने की चेतावनी दी.
Tribal Gathering: 5 मुख्य प्रस्ताव पारित
इस tribal gathering में पांच प्रमुख प्रस्ताव पारित किए गए:
- परिसीमन का विरोध – किसी भी ऐसी परिसीमन प्रक्रिया का विरोध जो आदिवासी आरक्षित सीटों को कम करे.
- MMDR संशोधन का विरोध – खान-खनिज संशोधन अधिनियम के खिलाफ, जिससे झारखंड को राजस्व हानि होने की आशंका है.
- अधिकारों की रक्षा – संवैधानिक रूप से प्रदत्त आदिवासी अधिकारों की सुरक्षा.
- एकता का संकल्प – आदिवासी समाज को एकजुट रखने का संकल्प.
- दिल्ली तक लड़ाई – यदि आवश्यक हुआ तो दिल्ली तक संघर्ष जारी रखने का एलान.
Tribal Gathering: राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
इस tribal gathering को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी आईं. विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने इस tribal gathering को कांग्रेस द्वारा प्रायोजित बताते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस ने ऐतिहासिक रूप से आदिवासी समुदायों को धोखा दिया है. उन्होंने जनसंख्या परिवर्तन का मुद्दा भी उठाया और तर्क दिया कि झारखंड में आदिवासी जनसंख्या में गिरावट एक गंभीर चिंता का विषय है.
भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय ST मोर्चा अध्यक्ष समीर उरांव ने भी इस tribal gathering पर निशाना साधते हुए कहा कि यह एक कांग्रेस रैली है जिसे आदिवासी जुटान के रूप में पेश किया जा रहा है.
इस tribal gathering से संबंधित मुद्दे पर राहुल गांधी ने भी अपना संदेश भेजा, जिसमें उन्होंने आदिवासियों की पहचान, अधिकारों और गरिमा की रक्षा पर जोर दिया.
इस tribal gathering ने स्पष्ट कर दिया है कि परिसीमन का मुद्दा झारखंड में आदिवासी समाज के लिए राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा हुआ है. इस tribal gathering के माध्यम से आयोजकों ने केंद्र सरकार और राज्य सरकार दोनों को स्पष्ट संदेश दिया कि आदिवासी अपने अधिकारों के लिए एकजुट हैं और किसी भी कीमत पर उनके राजनीतिक प्रतिनिधित्व में कमी नहीं होने दी जाएगी.
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