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Houthis का बड़ा ऐलान: लाल सागर में इज़रायली जहाज़ों पर पूर्ण प्रतिबंध, तेल और गैस बाज़ार पर मंडराया संकट

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Abua News Jharkhand | International Desk

मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच यमन के हौथी विद्रोहियों ने एक बड़ा और चिंताजनक कदम उठाते हुए लाल सागर (Red Sea) में इज़रायल से जुड़े जहाज़ों के आवागमन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। हौथी सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने टेलीविज़न संबोधन में कहा कि यह फैसला इज़रायल द्वारा ईरान, लेबनान, गाज़ा और यमन में किए गए हमलों के जवाब में लिया गया है। हौथियों ने चेतावनी दी है कि किसी भी इज़रायली जहाज़ या इज़रायल से जुड़े समुद्री लक्ष्य को निशाना बनाया जा सकता है।

यह घोषणा ऐसे समय हुई है जब पहले से ही मध्य-पूर्व में ईरान और इज़रायल के बीच तनाव चरम पर है। हौथियों ने कहा है कि यह केवल पहला कदम है और यदि हालात नहीं बदले तो वे इज़रायल जाने वाले अन्य जहाज़ों को भी रोकने जैसे और कदम उठा सकते हैं।

क्यों महत्वपूर्ण है लाल सागर?

लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक हैं। एशिया, यूरोप और अफ्रीका के बीच होने वाला बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के जरिए वैश्विक व्यापार का लगभग 10-12 प्रतिशत हिस्सा और बड़ी मात्रा में तेल एवं गैस की खेप गुजरती है।

यदि इस मार्ग पर व्यवधान बढ़ता है तो दुनिया भर में व्यापारिक लागत बढ़ सकती है और आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) प्रभावित हो सकती है।

तेल बाजार पर क्या होगा असर?

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि हौथियों की इस घोषणा का सबसे बड़ा प्रभाव वैश्विक तेल बाजार पर पड़ सकता है।

पहला असर तेल की कीमतों पर दिखाई दे सकता है। जैसे ही किसी महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर खतरा बढ़ता है, निवेशक और व्यापारी तेल की संभावित कमी को लेकर चिंतित हो जाते हैं। इसी वजह से सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड के दाम लगभग 5 प्रतिशत तक बढ़ गए।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि लाल सागर में जहाज़ों पर हमले शुरू होते हैं या बड़ी शिपिंग कंपनियां इस मार्ग का इस्तेमाल कम कर देती हैं, तो तेल की ढुलाई महंगी हो जाएगी। जहाज़ों को अफ्रीका के दक्षिणी छोर “केप ऑफ गुड होप” से लंबा रास्ता अपनाना पड़ सकता है। इससे ईंधन खर्च, बीमा लागत और परिवहन समय तीनों बढ़ जाएंगे।

गैस बाजार के लिए भी खतरे की घंटी

सिर्फ तेल ही नहीं, तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) का व्यापार भी प्रभावित हो सकता है। कतर और अन्य खाड़ी देशों से यूरोप तथा एशिया को जाने वाली कई ऊर्जा खेपें इसी क्षेत्र से होकर गुजरती हैं।

यदि लाल सागर और बाब-अल-मंदेब में सुरक्षा स्थिति बिगड़ती है, तो LNG जहाज़ों को भी लंबा मार्ग अपनाना पड़ सकता है। इसका सीधा असर गैस की कीमतों पर पड़ेगा और यूरोप जैसे क्षेत्रों में ऊर्जा लागत बढ़ सकती है।

भारत पर क्या असर होगा?

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। भारत के लिए मध्य-पूर्व तेल और गैस का सबसे बड़ा स्रोत है। यदि तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें बढ़ती हैं तो इसका असर भारत में पेट्रोल, डीजल, हवाई ईंधन और परिवहन लागत पर पड़ सकता है।

हालांकि तत्काल प्रभाव देखने को नहीं मिलेगा क्योंकि भारत के पास कुछ रणनीतिक भंडार और दीर्घकालिक खरीद समझौते मौजूद हैं, लेकिन यदि संकट लंबे समय तक जारी रहा तो महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमत में हर बड़ी वृद्धि का असर परिवहन, खाद्य वस्तुओं और औद्योगिक उत्पादन की लागत पर भी पड़ता है। ऐसे में भारत समेत कई विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है।

वैश्विक व्यापार के लिए नई चुनौती

2023 से 2025 के बीच भी हौथियों ने लाल सागर में कई जहाज़ों को निशाना बनाया था, जिसके कारण अनेक शिपिंग कंपनियों ने अपना मार्ग बदल दिया था। परिणामस्वरूप समुद्री व्यापार की लागत बढ़ी और कई देशों में सामान की कीमतों पर असर पड़ा।

अब जबकि ईरान-इज़रायल तनाव फिर से बढ़ रहा है, विशेषज्ञों को डर है कि लाल सागर एक बार फिर वैश्विक व्यापार संकट का केंद्र बन सकता है।

निष्कर्ष

हौथियों द्वारा इज़रायली जहाज़ों पर पूर्ण प्रतिबंध की घोषणा केवल क्षेत्रीय सुरक्षा का मुद्दा नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध वैश्विक ऊर्जा बाजार, समुद्री व्यापार और दुनिया की अर्थव्यवस्था से है। यदि स्थिति और बिगड़ती है तो तेल और गैस की कीमतों में तेजी, शिपिंग लागत में वृद्धि और वैश्विक महंगाई का नया दौर देखने को मिल सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर लाल सागर और मध्य-पूर्व के घटनाक्रम पर टिकी हुई है।

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