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Tehran Nuclear Program: संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका-ईरान की जोरदार भिड़ंत, तेहरान को मिली बड़ी जिम्मेदारी

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1. Tehran nuclear program पर संयुक्त राष्ट्र में हुई जोरदार भिड़ंत

संयुक्त राष्ट्र (UN) में सोमवार (27 अप्रैल) को एक बेहद ही तनावपूर्ण माहौल देखने को मिला। कारण था तेहरान का परमाणु कार्यक्रम यानी tehran nuclear program। इस मुद्दे पर अमेरिका और ईरान के अधिकारियों के बीच जमकर नोकझोंक हुई। दोनों देशों ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए।

दरअसल, tehran nuclear program और परमाणु अप्रसार संधि (NPT) की समीक्षा के लिए हुए सम्मेलन के उपाध्यक्ष पद के लिए ईरान के चयन को लेकर यह टकराव शुरू हुआ। अमेरिका ने इस नियुक्ति को “अपमान” बताते हुए विरोध किया, जबकि ईरान ने इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित बताकर खारिज कर दिया।

2. अमेरिका का आरोप – ईरान ने नहीं निभाई अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताएं

अमेरिकी हथियार नियंत्रण और अप्रसार ब्यूरो के सहायक सचिव क्रिस्टोफर यॉ ने इस मौके पर ईरान पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा:

“ईरान ने अपनी अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं किया है। वह अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के साथ पूरी तरह सहयोग करने में विफल रहा है।”

क्रिस्टोफर ने आगे कहा कि tehran nuclear program को लेकर ईरान का रवैया संदिग्ध है और ऐसे में उसे NPT सम्मेलन का उपाध्यक्ष बनाना दुनिया के लिए एक “अपमान” है। अमेरिका ने मांग की कि इस नियुक्ति पर फिर से विचार किया जाए।

3. ईरान का करारा पलटवार – अमेरिका को सुनाई खरी-खरी

अमेरिका के आरोपों का जवाब देते हुए IAEA में ईरान के राजदूत रेजा नजफी ने करारा पलटवार किया। उन्होंने अमेरिकी बयानों को “निराधार” और “राजनीतिक रूप से प्रेरित” बताया।

रेजा नजफी ने कहा:

“परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने वाला दुनिया का एकमात्र देश अमेरिका है। जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर गिराए गए परमाणु बम आज भी उसके अपराध का सबूत हैं। ऐसे में अमेरिका को दूसरों पर फैसला सुनाने का कोई अधिकार नहीं है।”

ईरान ने साफ किया कि उसका tehran nuclear program पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों से प्रेरित है और वह कभी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा।

(Image Alt Text: ईरान के राजदूत रेजा नजफी स्पष्ट करते हुए कि tehran nuclear program शांतिपूर्ण है)

डूफॉलो एक्सटर्नल लिंक: इस पूरे विवाद की ताजा जानकारी के लिए अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।

4. Tehran nuclear program को लेकर ईरान ने रखा ये बड़ा प्रस्ताव

इसी बीच, tehran nuclear program से जुड़ा एक और अहम मुद्दा सामने आया। ईरान ने अमेरिका के सामने एक बड़ा प्रस्ताव रखा है। ईरान ने कहा कि अगर अमेरिका उस पर लगे आर्थिक प्रतिबंध हटा देता है, तो वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने पर विचार कर सकता है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है, जिससे होकर वैश्विक तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। हाल के महीनों में ईरान ने इस जलडमरूमध्य में अपनी नौसैनिक गतिविधियां बढ़ा दी थीं, जिससे अंतर्राष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई थीं।

हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतिबंध हटाने की शर्त के चलते अमेरिका के लिए इस प्रस्ताव को स्वीकार करना मुश्किल होगा, क्योंकि बाइडन प्रशासन अभी भी ईरान पर दबाव बनाए हुए है।

5. संयुक्त राष्ट्र ने जताई चिंता – गुटेरेस ने की शांति वार्ता की अपील

इस बढ़ते तनाव के बीच संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने चिंता जताई है। उन्होंने एक बयान में कहा:

“हिंसक टकराव का कोई सैन्य समाधान नहीं है। दोनों देशों को बातचीत की मेज पर लौटना होगा।”

गुटेरेस ने tehran nuclear program पर कूटनीतिक वार्ता फिर से शुरू करने की अपील की है, ताकि कोई बड़ा संघर्ष होने से पहले ही मामला सुलझ जाए। उन्होंने अमेरिका से प्रतिबंधों में ढील देने और ईरान से IAEA के निरीक्षणों में पूर्ण सहयोग करने का आग्रह किया।

(इंटरनल लिंक: ईरान-अमेरिका संबंधों पर हमारी पिछली विस्तृत रिपोर्ट यहां पढ़ें।)

6. 1980 से टूटे हैं अमेरिका-ईरान के संबंध

यह कोई नया विवाद नहीं है। अमेरिका और ईरान के बीच 1980 से कोई कूटनीतिक संबंध नहीं हैं। 1979 की ईरानी क्रांति और अमेरिकी दूतावास में बंधक संकट के बाद से दोनों देश एक-दूसरे के कट्टर विरोधी बन गए।

तब से लेकर अब तक, दोनों देशों के बीच सीधी बातचीत नहीं हुई है। वे एक-दूसरे से संवाद करने के लिए संयुक्त राष्ट्र या तीसरे देशों (जैसे ओमान, कतर) के मंचों का इस्तेमाल करते हैं। Tehran nuclear program पर 2015 में हुई ऐतिहासिक संधि (JCPOA) भी इसी तरह की कूटनीति का नतीजा थी, लेकिन 2018 में अमेरिका के उससे बाहर निकलने के बाद यह संधि लगभग ढह गई।

7. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

सवाल 1: Tehran nuclear program क्या है?
जवाब: Tehran nuclear program ईरान का परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम है। ईरान का दावा है कि यह कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों (बिजली उत्पादन, मेडिकल रिसर्च) के लिए है, जबकि अमेरिका और पश्चिमी देशों को आशंका है कि ईरान इसके जरिए परमाणु हथियार बना सकता है।

सवाल 2: संयुक्त राष्ट्र में आखिर भिड़ंत क्यों हुई?
जवाब: NPT सम्मेलन के उपाध्यक्ष पद के लिए ईरान के चयन पर भिड़ंत हुई। अमेरिका ने tehran nuclear program को लेकर ईरान पर भरोसा न होने की बात कही, जबकि ईरान ने अमेरिकी आरोपों को खारिज किया।

सवाल 3: ईरान ने क्या प्रस्ताव रखा है?
जवाब: ईरान ने प्रस्ताव रखा है कि अगर अमेरिका आर्थिक प्रतिबंध हटा देता है, तो वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अंतर्राष्ट्रीय यातायात के लिए पूरी तरह खोल देगा।

सवाल 4: क्या अमेरिका और ईरान के बीच राजनयिक संबंध हैं?
जवाब: नहीं, 1980 के बाद से दोनों देशों के बीच कोई सीधे राजनयिक संबंध नहीं हैं। वे संयुक्त राष्ट्र या मध्यस्थ देशों के जरिए बातचीत करते हैं।

सवाल 5: IAEA का क्या कहना है?
जवाब: IAEA ने हाल की रिपोर्ट्स में कहा है कि ईरान कुछ मामलों में सहयोग नहीं कर रहा है, लेकिन परमाणु हथियार बनाने का कोई ठोस सबूत नहीं मिला है। हालांकि संस्था ने चिंता जताई है कि ईरान 60% यूरेनियम संवर्धन कर रहा है, जो हथियार ग्रेड (90%) के करीब है।


निष्कर्ष

Tehran nuclear program को लेकर संयुक्त राष्ट्र में हुई यह तीखी झड़प दर्शाती है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कितना गहरा है। एक तरफ अमेरिका ईरान के परमाणु महत्वाकांक्षाओं को लेकर संदेह में है, तो दूसरी तरफ ईरान संयुक्त राष्ट्र मंच पर अपनी राजनयिक जीत दर्ज कर रहा है।

अब देखना यह होगा कि क्या संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की अपील रंग लाती है और दोनों देश बातचीत के जरिए इस गतिरोध को तोड़ पाते हैं, या फिर यह विवाद और बढ़ता है। तब तक पूरी दुनिया की निगाहें tehran nuclear program पर टिकी रहेंगी।


(वीडियो एम्बेड करने के लिए जगह – यहां संयुक्त राष्ट्र में हुई बहस का एक अंश एम्बेड किया जा सकता है, जिसमें अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के बयान हों।)

अस्वीकरण: यह लेख संयुक्त राष्त्र में हुई बहस और विभिन्न समाचार एजेंसियों की रिपोर्ट्स पर आधारित है। दोनों देशों के पक्षों को बिना किसी पूर्वाग्रह के प्रस्तुत किया गया है।


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