नई दिल्ली: आने वाले दिनों में स्मार्टफोन, स्मार्ट टीवी, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद खरीदना आम लोगों के लिए सस्ता हो सकता है। केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बड़ा फैसला लेते हुए कई अहम इलेक्ट्रॉनिक पुर्जों और मशीनों पर लगने वाला मूल सीमा शुल्क (Basic Customs Duty – BCD) माफ कर दिया है। यह छूट 31 मार्च 2029 तक लागू रहेगी।

सरकार का यह कदम भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
किन पुर्जों पर मिली शुल्क से छूट?
सरकार ने स्मार्टफोन, लैपटॉप, स्मार्ट टीवी और वियरेबल डिवाइस के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले प्रमुख कंपोनेंट्स पर आयात शुल्क हटाया है। इनमें शामिल हैं:
- डिस्प्ले असेंबली
- लिथियम-आयन सेल
- इंडक्टर कॉयल मॉड्यूल
विशेषज्ञों के मुताबिक, इन कंपोनेंट्स की लागत किसी भी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की कुल कीमत का बड़ा हिस्सा होती है। ऐसे में इनके सस्ते होने से अंतिम उत्पाद की कीमत भी कम हो सकती है।
बैटरी बनाने वाली मशीनों पर भी राहत
सरकार ने लिथियम-आयन बैटरी निर्माण में इस्तेमाल होने वाली अत्याधुनिक मशीनों और उपकरणों की सूची का भी विस्तार किया है, जिनके आयात पर अब सीमा शुल्क नहीं लगेगा। इनमें शामिल हैं:
- पाउडर ड्रायर
- ऑटोमैटिक फीडिंग एवं ब्लेंडिंग सिस्टम
- स्लरी ट्रांसफर सिस्टम
- कैथोड और एनोड कोटिंग मशीनें
- हाई वैक्यूम पंप
- वाइंडिंग मशीन
- इलेक्ट्रोड कटिंग एवं स्लिटिंग मशीन
- टेस्टिंग मशीन
- ऑटो पैकिंग सिस्टम
- सेपरेटर कोटिंग मशीन
- स्टैकिंग मशीन
- वेल्डिंग मशीन
- अल्ट्रासोनिक क्लीनिंग मशीन
- इलेक्ट्रोलाइट इंजेक्शन मशीन
- सेल बेकिंग एवं कूलिंग सिस्टम
क्या होगा फायदा?
सरकार की इस पहल से देश में इलेक्ट्रॉनिक्स और बैटरी निर्माण की लागत कम होगी। इससे नई फैक्ट्रियां लगाने में आसानी होगी और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कंपनियां कम उत्पादन लागत का लाभ ग्राहकों तक पहुंचाती हैं, तो आने वाले समय में:
- स्मार्टफोन सस्ते हो सकते हैं।
- स्मार्ट टीवी और लैपटॉप की कीमतें घट सकती हैं।
- भारत में बने इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की संख्या बढ़ेगी।
- निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
- आयात पर निर्भरता कम होगी।
- इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।
भारत बनेगा इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब
सरकार का मानना है कि यह फैसला ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती देगा। इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में घरेलू उत्पादन बढ़ने से भारत वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी हिस्सेदारी मजबूत कर सकेगा और देश को इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने का लक्ष्य हासिल करने में मदद मिलेगी.

