Saryu Roy’s Offer: हेमंत सोरेन को कांग्रेस मुक्त सरकार का फॉर्मूला, 41 विधायकों से बनाएं सरकार

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Saryu Roy's Offer
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Saryu Roy’s Offer: क्या है फॉर्मूला?

Saryu Roy’s offer ने झारखंड की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। जदयू विधायक और पूर्व मंत्री सरयू राय ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को एक चौंकाने वाला प्रस्ताव दिया है. उन्होंने कहा है कि हेमंत सोरेन कांग्रेस से छुटकारा पाकर भी सरकार बना सकते हैंSaryu Roy’s offer के तहत उन्होंने झामुमो, राजद, वाम दलों और अपने सहित 41 विधायकों के समर्थन का आंकड़ा गिनाया है.


Saryu Roy’s Offer का समय: राज्यसभा हार के बाद आया प्रस्ताव

Saryu Roy’s offer ऐसे समय में आया है जब राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी की हार ने सत्तारूढ़ महागठबंधन के भीतर तनाव पैदा कर दिया है. कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा की हार के बाद कांग्रेस ने राजद और सीपीआई(एमएल) पर क्रॉस-वोटिंग का आरोप लगाया है, जबकि इन दलों ने इन आरोपों को खारिज किया है.

Saryu Roy’s offer इस विवाद के बीच एक नया राजनीतिक विकल्प पेश करता है। सरयू राय ने कहा कि मुख्यमंत्री जानते हैं कि राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस विधायकों ने गठबंधन के निर्णय के अनुरूप वोट नहीं दिए, इसलिए हेमंत सोरेन को कांग्रेस से छुटकारा पा लेना चाहिए.


Saryu Roy’s Offer: किन विधायकों का है गणित?

Saryu Roy’s offer के अनुसार, 81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा में बहुमत के लिए 41 विधायकों का समर्थन आवश्यक है. सरयू राय ने यह आंकड़ा इस प्रकार गिनाया है:

  • JMM: 34 विधायक
  • RJD: 4 विधायक
  • वाम दल (CPI-ML): 2 विधायक
  • जदयू (स्वयं): 1 विधायक

इन चारों दलों को मिलाकर Saryu Roy’s offer में 41 विधायकों का आंकड़ा बनता है. सरयू राय ने यह भी कहा कि JMM के सहयोगी जेएलकेएम के जयराम महतो के शामिल होने से यह संख्या 42 तक पहुंच सकती है. इस गणित के अनुसार, Saryu Roy’s offer बिना कांग्रेस और बिना भाजपा के सरकार बनाने का रास्ता दिखाता है.


क्या हेमंत सोरेन Saryu Roy’s Offer स्वीकार करेंगे?

Saryu Roy’s offer को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। सरयू राय की राजनीतिक पहचान बड़ी है – उन्होंने 2019 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास को हराया था। वे वर्तमान में जदयू में हैं

Saryu Roy’s offer में उन्होंने हेमंत सोरेन को बिना कांग्रेस के सरकार चलाने की सलाह दी है। हालांकि, यह देखना अभी बाकी है कि मुख्यमंत्री इस प्रस्ताव को कितनी गंभीरता से लेते हैं। राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने गठबंधन के भीतर विश्वास की कमी को उजागर किया है, लेकिन क्या हेमंत सोरेन कांग्रेस को छोड़कर Saryu Roy’s offer स्वीकार करेंगे, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।

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