
RIMS में डॉक्टरों की प्रोन्नति के बदलेंगे नियम, मरीजों की सेवा और शोध के आधार पर मिलेगा प्रमोशन
रांची, 25 अक्टूबर 2026। अबूआ न्यूज़ झारखंड
राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में डॉक्टरों की प्रोन्नति की प्रक्रिया में बदलाव की तैयारी चल रही है। अब चिकित्सकों को एश्योर्ड प्रमोशन स्कीम के तहत पदोन्नति देने में केवल उनकी वरीयता नहीं, बल्कि मरीजों को परामर्श देने, सर्जरी करने, शिक्षण और शोध के क्षेत्र में किए गए कार्यों को भी आधार बनाया जाएगा। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य डॉक्टरों के प्रदर्शन का आकलन कर चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार लाना है।
रिम्स नियमावली 2002 की जगह आएगा विनियम-2026
नई व्यवस्था लागू करने के लिए रिम्स नियमावली-2002 में संशोधन कर रिम्स विनियम-2026 तैयार करने का प्रस्ताव है। प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। नई नियमावली के तहत डॉक्टरों की प्रोन्नति के लिए निर्धारित मानकों के आधार पर अंक दिए जाएंगे। इससे चिकित्सकीय सेवाओं, मेडिकल शिक्षा और शोध में योगदान को अधिक महत्व मिलने की उम्मीद है।
प्रोन्नति के लिए 100 अंक निर्धारित, 50 अंक लाना अनिवार्य
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत डॉक्टरों की प्रोन्नति के लिए कुल 100 अंक निर्धारित किए गए हैं। इनमें 85 अंक ऑब्जेक्टिव क्राइटेरिया और 15 अंक साक्षात्कार के लिए रखे गए हैं। प्रोन्नति के लिए अभ्यर्थियों को कुल 100 अंकों में न्यूनतम 50 अंक प्राप्त करने होंगे।
शिक्षण, शोध और मरीजों की सेवा पर रहेगा विशेष जोर
प्रस्तावित नियमावली में विभिन्न क्षेत्रों के लिए अलग-अलग अंक निर्धारित किए गए हैं। इसके तहत टीचिंग और ट्रेनिंग के लिए 30 अंक, शोध के लिए 20 अंक तथा मरीजों की देखभाल और चिकित्सा सेवाओं के लिए 25 अंक तय किए गए हैं। इसके अतिरिक्त अन्य निर्धारित गतिविधियों और साक्षात्कार के लिए भी अंक का प्रावधान किया गया है।
इस व्यवस्था से डॉक्टरों के शिक्षण कौशल, शोध कार्य और मरीजों के उपचार में योगदान का मूल्यांकन किया जा सकेगा। हालांकि, विभिन्न श्रेणियों के अंकों का अंतिम विवरण आधिकारिक प्रस्ताव से सत्यापित किया जाना आवश्यक है।
एम्स नई दिल्ली के मॉडल पर होगी प्रोन्नति की प्रक्रिया
अब रिम्स में डॉक्टरों की प्रोन्नति के लिए एम्स नई दिल्ली के मॉडल को आधार बनाने का प्रस्ताव है। इससे पहले पदोन्नति की प्रक्रिया नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी), जो पहले मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) के नाम से जाना जाता था, के दिशा-निर्देशों पर आधारित थी।
सीधी नियुक्ति में 75 अंक ऑब्जेक्टिव क्राइटेरिया के होंगे
प्रस्तावित रिम्स विनियम-2026 में सीधी नियुक्ति और नई भर्ती के लिए भी अंकों का निर्धारण किया गया है। इसके तहत ऑब्जेक्टिव क्राइटेरिया के लिए 75 अंक और साक्षात्कार के लिए 25 अंक निर्धारित करने का प्रस्ताव है। इस बदलाव से चयन प्रक्रिया में निर्धारित मानकों के आधार पर अभ्यर्थियों के मूल्यांकन पर जोर दिया जाएगा।
अधीक्षक को 25 लाख रुपये तक के वित्तीय अधिकार देने का प्रस्ताव
रिम्स विनियम-2026 में अस्पताल के अधीक्षक को 25 लाख रुपये तक के प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार देने का भी प्रस्ताव है। इसके तहत अस्पताल और मरीजों के हित में जरूरी खरीदारी की जा सकेगी। आपातकालीन परिस्थितियों में आवश्यक उपकरणों, दवाओं, सर्जिकल सामग्री और अन्य जरूरी वस्तुओं की खरीद में इससे सहूलियत मिलने की उम्मीद है।
चिकित्सा सेवा और शोध की गुणवत्ता सुधारना है उद्देश्य
नई व्यवस्था का प्रमुख उद्देश्य डॉक्टरों की जवाबदेही बढ़ाने के साथ मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराना है। इसके अलावा मेडिकल शिक्षा, प्रशिक्षण और शोध गतिविधियों को प्रोत्साहित करने पर भी जोर दिया गया है। प्रस्तावित विनियम लागू होने के बाद रिम्स में डॉक्टरों की प्रोन्नति, नई नियुक्ति और प्रशासनिक कामकाज की प्रक्रिया में बदलाव आ सकता है।




