
रांची की रितु विश्वकर्मा ने बनाया विश्व रिकॉर्ड, 12.18 KM लंबी क्रोशिया बंटिंग लाइन से गिनीज बुक में दर्ज हुआ नाम
तीन महीने की मेहनत लाई रंग, विशाखापत्तनम में बने रिकॉर्ड का हिस्सा बनीं रांची की रितु; 30 सितंबर को मिला आधिकारिक सर्टिफिकेट

रांची. राजधानी रांची की रितु विश्वकर्मा ने अपनी कला और मेहनत के दम पर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। क्रोशिया बुनाई में लंबे समय से सक्रिय रितु का नाम अब Guinness World Records से जुड़ गया है। उन्होंने ‘महिला मनोविकास (भारत)’ संस्था के साथ मिलकर 12.18 किलोमीटर लंबी Crochet Bunting Line तैयार करने में योगदान दिया।
यह रिकॉर्ड प्रयास 7 अगस्त 2026 को विशाखापत्तनम में आयोजित कार्यक्रम के दौरान किया गया था। इस उपलब्धि के बाद रितु को आधिकारिक गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड प्रमाणपत्र भी प्राप्त हुआ है।
15 साल से ज्यादा समय से क्रोशिया से जुड़ी हैं रितु
रांची के कटहल मोड़ क्षेत्र की रहने वाली और वर्तमान में पुंदाग स्थित एकलव्य टॉवर में रह रहीं रितु विश्वकर्मा पिछले 15 वर्षों से अधिक समय से बुनाई और क्रोशिया कला से जुड़ी हुई हैं। उनके लिए यह केवल एक शौक नहीं, बल्कि रचनात्मक अभिव्यक्ति का माध्यम भी रहा है। लंबे समय तक लगातार अभ्यास और रुचि ने उन्हें इस अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि तक पहुंचाया।
रिश्तेदार से मिली जानकारी, फिर शुरू हुई रिकॉर्ड की तैयारी
रितु ने अपनी स्कूली पढ़ाई राजेंद्र गर्ल्स स्कूल से की है, जबकि उच्च शिक्षा उन्होंने धनबाद-सिंदरी से पूरी की। उन्हें इस रिकॉर्ड प्रयास के बारे में एक रिश्तेदार के माध्यम से जानकारी मिली थी। इसके बाद उन्होंने ‘महिला मनोविकास’ संस्था के आयोजन के लिए पंजीकरण कराया और तैयारी में जुट गईं।
करीब तीन महीने तक लगातार मेहनत करते हुए उन्होंने क्रोशिया बंटिंग तैयार की। इस दौरान पूरा फोकस रिकॉर्ड प्रयास के लिए तय डिजाइन और लंबाई को पूरा करने पर रहा।
विशाखापत्तनम में बना 12.18 किलोमीटर लंबा रिकॉर्ड
रिकॉर्ड बनाने के लिए विशाखापत्तनम में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। संयुक्त प्रयास से 12.18 किलोमीटर यानी करीब 7.57 मील लंबी क्रोशिया बंटिंग लाइन तैयार की गई।
रितु विश्वकर्मा भी इस रिकॉर्ड प्रयास का हिस्सा रहीं। कार्यक्रम के बाद रिकॉर्ड की प्रक्रिया पूरी हुई और उन्हें उपलब्धि की आधिकारिक पुष्टि मिली।
30 सितंबर को मिला गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड सर्टिफिकेट
रितु के अनुसार, उन्हें अगस्त में रिकॉर्ड से जुड़ी सूचना मिल गई थी, जबकि 30 सितंबर 2026 को डाक के माध्यम से आधिकारिक Guinness World Records Certificate प्राप्त हुआ।
सर्टिफिकेट मिलने के बाद परिवार और परिचितों में खुशी का माहौल है। रांची की एक महिला का इस अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड में योगदान शहर और राज्य के लिए भी गर्व का विषय बन गया है।
मेहनत से शौक भी बन सकता है बड़ी पहचान: रितु
अपनी उपलब्धि से उत्साहित रितु विश्वकर्मा का कहना है कि किसी भी शौक को अगर नियमित मेहनत, अनुशासन और लगन के साथ आगे बढ़ाया जाए, तो उससे बड़ी पहचान हासिल की जा सकती है।
उनकी यह उपलब्धि उन लोगों के लिए भी प्रेरणा है जो कला, हस्तशिल्प और क्रिएटिव काम को केवल शौक मानकर सीमित कर देते हैं। रितु ने अपने हुनर को लगातार निखारकर उसे अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड तक पहुंचा दिया।




