जगन्नाथपुर के सरकारी स्कूल में छात्रों के तंबाकू सेवन का मामला सामने आने के बाद निगरानी और नियमों के पालन पर उठे सवाल

रांची। जगन्नाथपुर के एक सरकारी स्कूल में किशोर विद्यार्थियों के तंबाकू सेवन का मामला सामने आने के बाद अब चर्चा सिर्फ बच्चों की आदत तक सीमित नहीं है। सवाल यह भी उठ रहा है कि स्कूलों और शिक्षण संस्थानों के आसपास तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर कानूनी रोक के बावजूद ये सामान बच्चों तक कैसे पहुंच रहे हैं।
रांची के जेवियर कॉलेज, मारवाड़ी कॉलेज समेत कई शिक्षण संस्थानों के आसपास दुकानों पर तंबाकू उत्पादों की उपलब्धता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। इससे स्कूल-कॉलेजों के आसपास प्रतिबंधित क्षेत्र की निगरानी और नियमों के पालन को लेकर चिंता बढ़ी है।
कानून में क्या है प्रावधान?
राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के अनुसार COTPA के तहत शिक्षण संस्थानों के 100 गज के दायरे में सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों की बिक्री प्रतिबंधित है। इसके अलावा 18 वर्ष से कम उम्र के लोगों को तंबाकू उत्पाद बेचना भी प्रतिबंधित है।
तंबाकू मुक्त शिक्षण संस्थान की गाइडलाइन में स्कूल परिसर के साथ-साथ निर्धारित बाहरी क्षेत्र में भी बिक्री रोकने और संस्थान के बाहर सूचना बोर्ड लगाने की व्यवस्था बताई गई है।
जगन्नाथपुर स्कूल के मामले ने बढ़ाई चिंता
जगन्नाथपुर के सरकारी स्कूल में हुई मुख जांच के दौरान करीब 200 विद्यार्थियों में 10 से अधिक बच्चों के गाल और मसूड़ों के अंदर सफेद धब्बे पाए जाने की बात सामने आई। कुछ विद्यार्थियों ने तंबाकू सेवन की जानकारी भी दी।
चिकित्सकों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आगे जांच कराने और तंबाकू से दूरी बनाए रखने की सलाह दी है। हालांकि, मुंह में सफेद धब्बा दिखना अपने आप में कैंसर की पुष्टि नहीं करता। कुछ स्थितियों में यह आगे होने वाले गंभीर बदलाव का संकेत हो सकता है, इसलिए चिकित्सकीय जांच जरूरी मानी जाती है।
बच्चों तक तंबाकू पहुंचाने वाले स्रोतों पर भी नजर जरूरी
इस मामले के बाद यह सवाल भी सामने आया है कि किशोरों तक तंबाकू उत्पाद पहुंचने के स्रोतों की पहचान कैसे की जा रही है। स्कूलों में जागरूकता अभियान के साथ-साथ आसपास की दुकानों की नियमित जांच और प्रतिबंधित क्षेत्र में बिक्री की निगरानी भी जरूरी है। राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के तहत कानून के उल्लंघन पर प्रवर्तन और चालान की व्यवस्था भी है।
सिर्फ स्कूल नहीं, आसपास की दुकानों की निगरानी भी जरूरी
बच्चों को तंबाकू से दूर रखने की जिम्मेदारी स्कूल और अभिभावकों तक सीमित नहीं है। स्कूलों के आसपास प्रतिबंधित क्षेत्र में तंबाकू बिक्री पर रोक, नाबालिगों को उत्पाद बेचने की जांच, दुकानदारों को नियमों की जानकारी और उल्लंघन मिलने पर कार्रवाई—इन सभी स्तरों पर निगरानी जरूरी है। ऐसे में जगन्नाथपुर के मामले ने रांची में स्कूलों के आसपास तंबाकू नियंत्रण नियमों के जमीनी स्तर पर पालन और निगरानी व्यवस्था को लेकर एक अहम सवाल खड़ा कर दिया है।





