Ranchi to Get 100 MW Floating Solar Plant at Getalsud Dam; Power Cuts Likely to End Soon
झारखंड की राजधानी रांची के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। शहर के पास स्थित गेतलसूद डैम पर बन रहा 100 मेगावाट क्षमता का फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट अब लगभग तैयार हो चुका है। करीब ₹500 करोड़ की लागत से तैयार हो रही यह परियोजना रांची के बिजली संकट को दूर करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
यह सोलर प्रोजेक्ट करीब 172 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है और पानी की सतह पर स्थापित सोलर पैनलों के माध्यम से बिजली उत्पादन करेगा। इस तरह की फ्लोटिंग सोलर तकनीक न केवल भूमि की बचत करती है बल्कि जल संरक्षण में भी सहायक होती है, क्योंकि इससे पानी का वाष्पीकरण कम होता है।

एक लाख घरों को मिलेगा फायदा
इस परियोजना के शुरू होते ही रांची के करीब एक लाख घरों को निर्बाध बिजली मिलने की उम्मीद है। लंबे समय से शहर में हो रही बिजली कटौती और लो-वोल्टेज की समस्या से जूझ रहे लोगों को अब राहत मिल सकती है। यह प्लांट शहर की बढ़ती बिजली मांग को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगा।
ऊर्जा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह प्रोजेक्ट अपने अंतिम चरण में है और जल्द ही बिजली उत्पादन शुरू कर दिया जाएगा। जैसे ही प्लांट पूरी क्षमता से काम करने लगेगा, रांची और आसपास के क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।
क्षेत्रीय बिजली संकट का समाधान
रांची समेत आसपास के इलाकों में अक्सर बिजली की कमी और कटौती एक बड़ी समस्या रही है। इस फ्लोटिंग सोलर प्लांट के चालू होने से क्षेत्रीय बिजली संकट को काफी हद तक दूर किया जा सकेगा। खासकर गर्मी के मौसम में जब बिजली की मांग बढ़ जाती है, तब यह परियोजना बेहद उपयोगी साबित होगी।
इस परियोजना को लेकर केंद्र सरकार का भी पूरा सहयोग मिला है। केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने नई दिल्ली में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी से मुलाकात कर परियोजना की प्रगति की जानकारी दी और इसके जल्द लोकार्पण का आग्रह किया।
इस दौरान परियोजना के महत्व को बताते हुए इसे जल्द शुरू करने पर सहमति बनी। उल्लेखनीय है कि इस परियोजना का प्रस्ताव दिसंबर 2021 में भेजा गया था और मार्च 2022 में इसे मंजूरी मिली थी।

पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद
यह फ्लोटिंग सोलर प्लांट पर्यावरण के लिहाज से भी काफी अहम है। इससे न केवल स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन होगा बल्कि कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी। साथ ही, जलाशय के ऊपर सोलर पैनल होने से पानी के तापमान को नियंत्रित रखने में भी मदद मिलेगी।
रांची के विकास में मील का पत्थर
यह परियोजना रांची के इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा क्षेत्र के विकास में एक मील का पत्थर साबित हो सकती है। स्मार्ट सिटी बनने की दिशा में बढ़ रहे रांची के लिए यह प्रोजेक्ट स्थायी ऊर्जा (sustainable energy) का एक मजबूत उदाहरण पेश करेगा।
आने वाले समय में अगर इसी तरह के और प्रोजेक्ट्स लागू किए जाते हैं, तो झारखंड न केवल अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा कर पाएगा बल्कि अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकता है।


