रांची में आज से जुटेंगे देश-दुनिया के चुनाव विशेषज्ञ, मतदाता पंजीकरण पर होगा अंतरराष्ट्रीय मंथन

0
65
Share This Post

2 और 3 सितंबर को NUSRL में होगा ‘Voter Registration and Voter Registers 2026’ सम्मेलन, 230 एब्सट्रैक्ट्स में से 57 शोध-पत्रों का हुआ चयन

रांची: मतदाता पंजीकरण और मतदाता सूची को और अधिक सटीक, समावेशी और विश्वसनीय बनाने को लेकर रांची में आज से दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन शुरू हो रहा है। 2 और 3 सितंबर 2026 को नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ यानी NUSRL, रांची में “Voter Registration and Voter Registers 2026” विषय पर देश-विदेश के चुनाव विशेषज्ञ, शिक्षाविद् और शोधकर्ता एक मंच पर जुटेंगे।

सम्मेलन का उद्घाटन 2 सितंबर को सुबह 10 बजे से 11:30 बजे तक होगा। इसका आयोजन मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय, झारखंड की ओर से सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड के सहयोग से किया जा रहा है। वहीं IIM रांची, NUSRL रांची और सेंट जेवियर्स कॉलेज रांची को नॉलेज पार्टनर बनाया गया है।

230 एब्सट्रैक्ट्स में से 57 शोध-पत्र चुने गए

इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के लिए देश और विदेश के अलग-अलग संस्थानों, शोधकर्ताओं और चुनाव विशेषज्ञों से शोध-पत्रों के एब्सट्रैक्ट्स आमंत्रित किए गए थे। इसके जवाब में कुल 230 एब्सट्रैक्ट्स प्राप्त हुए। विशेषज्ञों और नॉलेज पार्टनर्स की टीम के मूल्यांकन के बाद इनमें से 80 एब्सट्रैक्ट्स का चयन किया गया।

इसके बाद पूरी चयन प्रक्रिया के तहत 57 शोध-पत्रों को अंतिम रूप से चुना गया है। इन शोध-पत्रों को सम्मेलन के दौरान अलग-अलग तकनीकी सत्रों में प्रस्तुत किया जाएगा।

दुनिया के लोकतांत्रिक देशों की चुनावी व्यवस्था पर चर्चा

सम्मेलन का फोकस सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रहेगा। इसमें दुनिया के अलग-अलग लोकतांत्रिक देशों में मतदाता पंजीकरण, वोटर रजिस्टर तैयार करने और मतदाता सूची के प्रबंधन की व्यवस्थाओं का तुलनात्मक अध्ययन किया जाएगा।

इसके अलावा मतदाता सूची के डिजिटाइजेशन, मतदाताओं की भागीदारी बढ़ाने, समावेशी मतदाता पंजीकरण और निर्वाचन प्रक्रिया में सामने आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों पर भी विशेषज्ञ चर्चा करेंगे।

प्रशासन से लेकर अकादमिक जगत तक की होगी भागीदारी

दो दिनों तक चलने वाले इस सम्मेलन में निर्वाचन प्रबंधन से जुड़े अधिकारी, नीति-निर्माता, कानून विशेषज्ञ, शिक्षाविद्, शोधकर्ता, पत्रकार और सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में “Voter Registration and Voter Registers” विषय पर तैयार पुस्तक और सम्मेलन की स्मारिका का भी लोकार्पण किया जाएगा।

झारखंड को मिला था शोध का दायित्व

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार के अनुसार, भारत निर्वाचन आयोग की ओर से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के निर्वाचन कार्यालयों को चुनाव से जुड़े अलग-अलग विषयों पर शोध का दायित्व दिया गया था। इसी क्रम में झारखंड को ‘Voter Registration and Voter Registers’ विषय पर अध्ययन और शोध की जिम्मेदारी मिली।

के. रवि कुमार ने कहा कि एक मजबूत लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए शुद्ध, अद्यतन, समावेशी और विश्वसनीय मतदाता सूची बेहद जरूरी है। इसी उद्देश्य से निर्वाचन प्रबंधन के व्यावहारिक अनुभवों और अकादमिक शोध को एक ही मंच पर लाने की कोशिश की गई है।

भविष्य की चुनावी व्यवस्था के लिए उपयोगी होंगे निष्कर्ष

सम्मेलन में देश और दुनिया के अलग-अलग अनुभवों और शोध को साझा किया जाएगा। इससे मतदाता पंजीकरण और मतदाता सूची प्रबंधन से जुड़ी मौजूदा चुनौतियों को समझने के साथ-साथ भविष्य के लिए बेहतर कार्यप्रणाली तैयार करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

सम्मेलन से निकलने वाले सुझाव और निष्कर्ष भविष्य में निर्वाचन प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी, पारदर्शी, समावेशी और विश्वसनीय बनाने में उपयोगी साबित हो सकते हैं।

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here