Petrol Diesel पर OMCs को क्यों हुआ भारी नुकसान?
चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2026) देश की ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के लिए बेहद मुश्किल भरी रही है। आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज की रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और रिफाइंड फ्यूल की कीमतों में तेजी के बावजूद घरेलू बाजार में petrol diesel की कीमतें अपेक्षाकृत कम रहीं, जिससे कंपनियों का रिटेल मार्जिन नकारात्मक हो गया।
पश्चिम एशिया में जारी संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति व्यवधान के कारण कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का करीब 85% आयात करता है। ऐसे में जब वैश्विक कीमतें बढ़ती हैं और घरेलू स्तर पर petrol diesel के दाम नहीं बढ़ाए जाते, तो कंपनियों को यह नुकसान उठाना पड़ता है।
Petrol Diesel: पहली तिमाही में कितना हुआ घाटा?
रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल-जून 2026 के बीच OMCs को petrol diesel की खुदरा बिक्री में भारी नुकसान उठाना पड़ा:
| ईंधन | घाटा (प्रति लीटर) |
|---|---|
| डीजल | ₹18.9 |
| पेट्रोल | ₹6 |
यह स्थिति पिछले साल की तुलना में बिल्कुल उलट है। एक साल पहले OMCs डीजल पर ₹8.2 और पेट्रोल पर ₹10.3 प्रति लीटर का मुनाफा कमा रही थीं।
Petrol Diesel: 75,000 करोड़ रुपये का नुकसान कैसे हुआ?
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, पहली तिमाही में petrol diesel, LPG और जेट फ्यूल को बाजार मूल्य से कम कीमत पर बेचने के कारण OMCs को करीब 75,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। यह नुकसान तब और बढ़ गया जब सरकार ने 10 रुपये प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी कम की, जिससे सरकार को हर महीने करीब 14,000 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान हुआ।
Petrol Diesel: घाटे का गणित
| घाटे का कारण | प्रभाव |
|---|---|
| अंतरराष्ट्रीय कीमतें बढ़ीं, घरेलू कीमतें स्थिर रहीं | रिटेल मार्जिन नकारात्मक |
| एक्साइज ड्यूटी में कटौती | सरकार को ₹14,000 करोड़/माह का नुकसान |
| LPG पर घाटा | ₹680 प्रति सिलेंडर |
Petrol Diesel: पिछले साल मुनाफा, इस साल घाटा, क्यों?
यह बदलाव petrol diesel की कीमतों को लेकर सरकार की नीति के कारण हुआ है। 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद OMCs ने अंतरराष्ट्रीय कीमतों के अनुसार नियमित रूप से खुदरा ईंधन कीमतों में बदलाव करना लगभग बंद कर दिया।
पिछले चार वर्षों में जब वैश्विक कीमतें गिरीं, तो OMCs को अच्छा मुनाफा हुआ। लेकिन अब वैश्विक कीमतें बढ़ रही हैं और घरेलू दरें स्थिर हैं, इसलिए कंपनियों को petrol diesel पर भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
Petrol Diesel: पिछली तिमाहियों का मार्जिन
| तिमाही | पेट्रोल मार्जिन (₹/लीटर) | डीजल मार्जिन (₹/लीटर) |
|---|---|---|
| Q3 FY25 | 12 (उच्चतम) | – |
| Q1 FY26 | – | 8.2 (उच्चतम) |
| Q1 FY27 | -6 (घाटा) | -18.9 (घाटा) |
Petrol Diesel: आगे क्या होगा? और बढ़ सकती हैं कीमतें?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं, तो petrol diesel के दामों में और बढ़ोतरी हो सकती है। आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज का अनुमान है कि ब्रेक-ईवन (घाटे से बाहर निकलने) के लिए petrol diesel में 6.6 रुपये (पेट्रोल) और 9.7 रुपये (डीजल) प्रति लीटर और बढ़ोतरी की जरूरत होगी।
आईसीआरए के अनुसार, OMCs को petrol diesel पर अभी भी लगभग ₹5.5 (पेट्रोल) और ₹4.5 (डीजल) प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है। इसे कवर करने के लिए करीब ₹5 प्रति लीटर और बढ़ोतरी की जरूरत हो सकती है।
Petrol Diesel के दाम बढ़ने का असर
अगर petrol diesel की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका असर पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा:
- मुद्रास्फीति में बढ़ोतरी: क्रिसिल के अनुसार, ₹7.5 प्रति लीटर बढ़ोतरी से उपभोक्ता मुद्रास्फीति में 36 बेसिस प्वाइंट का इजाफा हो सकता है।
- ट्रांसपोर्ट लागत में बढ़ोतरी: सड़क परिवहन भारत के कुल माल ढुलाई का 71% वहन करता है, और ईंधन इसकी लागत का 42% हिस्सा है।
- माल की कीमतें बढ़ेंगी: डेयरी, फल, दालें, मसाले, चाय, कॉफी, अंडे, मांस और मछली जैसी वस्तुओं की कीमतें बढ़ सकती हैं।
हालांकि, सरकार के सामने चुनौती है कि petrol diesel की बढ़ती कीमतों और आम जनता पर पड़ने वाले बोझ के बीच संतुलन बनाना मुश्किल हो रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि सरकार OMCs के घाटे को कम करने के लिए क्या कदम उठाती है.
Supreme Leader Ayatollah Ali Khamenei: ईरान में 12-20 मिलियन लोगों के साथ अंतिम संस्कार, 100 देशों के प्रतिनिधि शामिल
Sikidiri Ghati: झारखंड का मानसूनी स्वर्ग, छुपा है यहाँ का जादू, जानें कैसे पहुंचें और क्यों है खास


