प्याज की घटती खेती से आवक पर असर, थोक में 53-55 रुपये किलो पहुंचा भाव; खुदरा कीमत 60-70 रुपये तक जाने का अनुमान

रांची: राजधानी में सब्जियों का स्वाद अब लोगों की जेब पर भी भारी पड़ने लगा है। प्याज के दाम में तेजी के साथ अब अदरक और लहसुन की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। कारोबारियों के मुताबिक, प्याज की कीमतों में फिलहाल जल्द राहत मिलने की उम्मीद कम है।
कम खेती का असर अब बाजार में दिख रहा
पंडरा थोक बाजार के कारोबारियों के अनुसार, इस साल प्याज की खेती पिछले मुकाबले कम हुई है। उत्पादन घटने के कारण बाजार में प्याज की आवक प्रभावित हुई है और इसका असर सीधे कीमतों पर पड़ा है।
नासिक से नया प्याज अब रांची पहुंच रहा है। वहां थोक भाव करीब 48 से 49 रुपये प्रति किलो है। ट्रांसपोर्टेशन और दूसरे खर्च जुड़ने के बाद रांची पहुंचते-पहुंचते कीमत बढ़ जाती है।
फिलहाल रांची के थोक बाजार में नासिक का प्याज 53 से 55 रुपये प्रति किलो बिक रहा है।
अगले तीन महीने राहत मुश्किल
व्यापारियों का कहना है कि पिछले दो वर्षों में किसानों को प्याज की बेहतर कीमत नहीं मिल पाई थी। इसी वजह से इस साल कई किसानों ने प्याज की खेती का रकबा कम कर दिया। अब उत्पादन में कमी का असर बाजार में साफ नजर आ रहा है।
जानकारों के मुताबिक, आने वाले करीब तीन महीनों तक प्याज की कीमतों में बड़ी गिरावट की संभावना कम है। वहीं खुदरा बाजार में प्याज का भाव जल्द ही 60 से 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकता है।
अदरक और लहसुन भी महंगे
प्याज के साथ-साथ रसोई में इस्तेमाल होने वाले अदरक और लहसुन के दाम भी बढ़े हुए हैं।
- अदरक: थोक में 80 से 130 रुपये, खुदरा में 140 से 200 रुपये किलो
- लहसुन: थोक में 70 से 170 रुपये, खुदरा में 120 से 300 रुपये किलो
- प्याज: थोक में 53 से 55 रुपये किलो, खुदरा में 60-70 रुपये तक पहुंचने की आशंका
सरकारी हस्तक्षेप से मिल सकती है राहत
कारोबारियों का मानना है कि अगर केंद्र सरकार कीमतों को नियंत्रित करने के लिए बाजार में पर्याप्त प्याज उपलब्ध कराने की पहल करती है, तो उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिल सकती है।
फिलहाल प्याज के साथ अदरक और लहसुन के बढ़ते दाम ने रांची के घरेलू बजट पर दबाव बढ़ा दिया है। आने वाले दिनों में बाजार में आवक और सरकारी कदम ही तय करेंगे कि इन जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतों में राहत मिलती है या महंगाई का असर और बढ़ता है।

