Oil Market अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है। मंगलवार को ब्रेंट क्रूड 88 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया, जबकि WTI क्रूड करीब 82 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखाई दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक सप्लाई को लेकर चिंता कम होने और भू-राजनीतिक तनाव में नरमी की उम्मीद से oil market पर दबाव बढ़ा है ।
सोमवार को भी ब्रेंट क्रूड में 8.7 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई, जो पिछले तीन महीने से अधिक समय की सबसे बड़ी एकदिवसीय गिरावट मानी जा रही है। इससे पहले पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया था, लेकिन अब oil market से जोखिम का अतिरिक्त दबाव धीरे-धीरे कम होता दिखाई दे रहा है।
Oil Market की दिशा बदलने के पीछे क्या कारण?
बाजार की दिशा तब बदली जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया कि अमेरिका और ईरान के बीच पश्चिम एशिया में तनाव कम करने को लेकर बातचीत जारी है। रिपोर्टों के अनुसार, बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिका ने ईरान पर आगे सैन्य कार्रवाई रोकने का फैसला किया है। हालांकि, दोनों देशों के बीच अभी किसी अंतिम समझौते की पुष्टि नहीं हुई है। IEA के जुलाई 2026 के Oil Market Report के अनुसार, जून में होर्मुज जलडमरूमध्य के फिर से खुलने के बाद खाड़ी क्षेत्र में तेल का प्रवाह 6.5 मिलियन बैरल प्रति दिन बढ़ गया, जो पिछले कुछ महीनों में सबसे बड़ी मासिक वृद्धि थी । इससे वैश्विक oil market को राहत मिली और कीमतों पर नीचे की ओर दबाव बना ।
विशेषज्ञों की नजर अब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर भी बनी हुई है। दुनिया के कुल समुद्री कच्चे तेल के परिवहन का लगभग 20 प्रतिशत इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है। यदि इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही पूरी तरह सामान्य हो जाती है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति और मजबूत होगी तथा oil market में कीमतों पर और दबाव आ सकता है ।
Oil Market को राहत देने वाली खबरें
बाजार को राहत देने वाली एक और खबर कजाकिस्तान से आई है। यूक्रेन के ड्रोन हमलों से प्रभावित कैस्पियन पाइपलाइन कंसोर्टियम (CPC) का प्रमुख क्रूड एक्सपोर्ट टर्मिनल दोबारा चालू हो गया है। इससे अंतरराष्ट्रीय oil market में तेल की सप्लाई बढ़ने की उम्मीद और मजबूत हुई है ।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, मैक्वेरी ग्रुप के विश्लेषकों का अनुमान है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत सफल रहती है, तो इस वर्ष की चौथी तिमाही तक वैश्विक oil market में प्रतिदिन करीब 20 लाख बैरल अतिरिक्त तेल उपलब्ध हो सकता है। ऐसी स्थिति बनने पर बाजार में ओवरसप्लाई की संभावना बढ़ेगी और कच्चे तेल की कीमतों पर आगे भी दबाव बना रह सकता है ।
ET Government की एक रिपोर्ट के अनुसार, यदि वर्तमान भू-राजनीतिक स्थिति स्थिर रहती है, तो कच्चे तेल की कीमतें 50-60 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक गिर सकती हैं । इससे भारत जैसे तेल आयातक देशों को बड़ा फायदा हो सकता है, क्योंकि कम तेल की कीमतों से आयात बिल घटेगा, मुद्रास्फीति पर नियंत्रण होगा और करेंट अकाउंट डेफिसिट सुधरेगा ।
Oil Market में आगे क्या?
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि oil market में अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है। यदि अमेरिका-ईरान वार्ता विफल होती है या होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से बंद होता है, तो कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं । Foreign Policy की एक रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक तेल भंडार में कमी और बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिमों के कारण oil market में मूल्य वृद्धि की संभावना बनी हुई है ।
बाहरी संसाधन
- अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) – Oil Market Report: https://www.iea.org/reports/oil-market-report-july-2026
- पेट्रोलियम निर्यातक देशों का संगठन (OPEC): https://publications.opec.org/momr
- NSE – Brent Crude Oil: https://www.nseindia.com/static/products-services/commodity-derivatives-brent-crude-oil


