Muharram Procession: श्रीनगर में 8वीं मुहर्रम का ऐतिहासिक जुलूस
श्रीनगर में बुधवार 24 जून 2026 को 8वीं मुहर्रम का Muharram procession (मुहर्रम जुलूस) पारंपरिक छह किलोमीटर लंबे रूट पर निकाला गया . यह जुलूस सुबह 6 बजे गुरु बाजार से शुरू होकर बुडशाह कदल, जहांगीर चौक और मौलाना आजाद रोड से होता हुआ करीब 9 बजे दालगेट पर समाप्त हुआ . इस Muharram procession में सैकड़ों शिया मातमियों, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे, ने भाग लिया .
क्यों खास है 8वीं मुहर्रम का Muharram Procession?
8वीं मुहर्रम का Muharram procession इस्लामी इतिहास में विशेष महत्व रखता है। यह दिन हजरत अब्बास (अ.स.) की याद में मनाया जाता है, जो इमाम हुसैन (अ.स.) के भाई और करबला की लड़ाई में उनके झंडाबरदार थे . मुहर्रम के महीने में शिया मुसलमान इमाम हुसैन (अ.स.) और उनके साथियों की शहादत का मातम मनाते हैं, जो सातवीं सदी में करबला (वर्तमान इराक) की लड़ाई में हुई थी .
Muharram Procession: 34 साल के बाद 2023 में मिली थी अनुमति
यह Muharram procession 1989 में आतंकवाद फैलने के बाद प्रतिबंधित कर दिया गया था . 34 सालों तक शिया समुदाय को श्रीनगर के मुख्य मार्गों पर यह जुलूस निकालने की इजाजत नहीं थी . हालांकि, 2023 में उपराज्यपाल के प्रशासन ने पारंपरिक मार्ग पर Muharram procession निकालने की अनुमति दी . 2026 का यह Muharram procession लगातार चौथा साल था, जब प्रशासन ने इसकी इजाजत दी .
Muharram Procession से पहले पुलिस ने क्या चेतावनी दी?
इस Muharram procession से एक दिन पहले जम्मू-कश्मीर पुलिस ने एक एडवाइजरी जारी की थी . पुलिस ने सख्त चेतावनी दी कि Muharram procession के दौरान किसी भी प्रकार के “उत्तेजक नारों, टेक्स्ट, आतंकियों की तस्वीरों या प्रतिबंधित संगठनों (राष्ट्रीय/अंतरराष्ट्रीय) के लोगो” वाले झंडे नहीं लहराए जाएंगे . ड्रोन के इस्तेमाल पर भी पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई . प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्र विरोधी या प्रशासन विरोधी भाषण, नारेबाजी या प्रचार की अनुमति नहीं होगी .
Muharram Procession में Hezbollah और Soleimani के पोस्टर पर क्यों रोक?
पिछले साल (2025) के Muharram procession के दौरान लेबनान के हिजबुल्लाह और उसके मृत नेता हसन नसरल्लाह के झंडे लहराए गए थे . इसके अलावा, मारे गए ईरानी सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी की तस्वीरें भी पोस्टरों पर दिखाई दी थीं . इसके चलते ही इस साल Muharram procession से पहले पुलिस ने यह सख्त एडवाइजरी जारी की . इस साल फरवरी में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई की हत्या के बाद ईरान समर्थक सड़क रैलियों में भी वृद्धि हुई थी, जिसके चलते पुलिस ने अतिरिक्त सावधानी बरती .
Muharram Procession शांतिपूर्ण रहा, लेकिन समय सीमा पर उठे सवाल
पुलिस की सख्त चेतावनियों के बावजूद, Muharram procession पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा . प्रशासन ने सुरक्षा, मेडिकल सुविधाओं और ट्रैफिक प्रबंधन के व्यापक इंतजाम किए थे . हालांकि, शिया धर्मगुरु मसरूर अब्बास अंसारी ने प्रशासन द्वारा तय की गई समय सीमा पर नाराजगी जताई . उन्होंने कहा कि जुलूस को सुबह 11 बजे तक समाप्त करना संभव नहीं है और उन्होंने समय को शाम की नमाज तक बढ़ाने की मांग की .
10वीं मुहर्रम को लेकर क्या उम्मीद?
Muharram procession के बाद अब सभी की नजर 10वीं मुहर्रम (आशूरा) पर है, जो शुक्रवार 27 जून को मनाया जाएगा . प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि वह 10वीं मुहर्रम की प्रक्रियाओं के लिए भी इसी तरह के व्यापक इंतजाम करेगा . हालांकि, यह देखना होगा कि क्या इस बार शिया नेतृत्व और प्रशासन के बीच समय सीमा को लेकर कोई समझौता हो पाता है .
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