Delhi Earthquake: दिल्ली किस सीस्मिक जोन में आती है?
वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप ने एक बार फिर इस बात पर बहस छेड़ दी है कि भारत के बड़े शहर, खासकर राजधानी दिल्ली, किसी बड़ी भूकंपीय घटना के लिए कितने तैयार हैं। Delhi earthquake की आशंका को लेकर विशेषज्ञों की चेतावनी नई नहीं है . भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के अनुसार, दिल्ली सीस्मिक जोन-IV में आता है, जो उच्च जोखिम वाला क्षेत्र है . इसका मतलब है कि यहां 5 से 6 तीव्रता और कभी-कभी इससे अधिक तीव्रता के भूकंप आ सकते हैं . यह वर्गीकरण राज्य सभा में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में भी सरकार द्वारा पुष्टि किया गया है .
भारत को भूकंपीय दृष्टि से पांच जोनों (II से VI) में बांटा गया है, जहां जोन-II में खतरा सबसे कम और जोन-VI में सबसे अधिक है . 2025 में BIS द्वारा जारी नए मानकों में पहली बार पूरे हिमालयी क्षेत्र को जोन-VI में रखा गया है . दिल्ली, जो हिमालय से 200-250 किलोमीटर दूर है, इन बड़े भूकंपों के प्रभाव को भी महसूस कर सकती है .
Delhi Earthquake: आखिर दिल्ली में बार-बार झटके क्यों आते हैं?
Delhi earthquake के बार-बार आने के कई भूवैज्ञानिक कारण हैं:
1. प्लेट टेक्टोनिक्स का दबाव
भारतीय प्लेट यूरेशियन प्लेट की ओर प्रति वर्ष लगभग 5 सेमी की रफ्तार से बढ़ रही है . इस टकराव से हिमालय का निर्माण हुआ और लगातार तनाव पैदा हो रहा है, जो भूकंप का कारण बनता है . हिमालयी क्षेत्र में जितना अधिक तनाव बढ़ता है, उतना ही इसके Delhi earthquake का कारण बनने की संभावना बढ़ जाती है .
2. स्थानीय फॉल्ट लाइनें
दिल्ली कई सक्रिय फॉल्ट लाइनों के ऊपर बसा है . राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) को प्रभावित करने वाली प्रमुख फॉल्ट लाइनों में महेंद्रगढ़-देहरादून फॉल्ट (MDF), सोहना फॉल्ट, मथुरा फॉल्ट और दिल्ली-हरिद्वार रिज (DHR) शामिल हैं . वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, MDF और DHR पर 5.2 तीव्रता तक के भूकंप आ चुके हैं . 1720 का ऐतिहासिक दिल्ली भूकंप (Delhi earthquake) भी इन्हीं फॉल्ट लाइनों से जुड़ा बताया जाता है .
3. मिट्टी का उतार-चढ़ाव (Amplification)
यमुना नदी के मैदान और पूर्वी दिल्ली की नरम जलोढ़ मिट्टी भूकंपीय तरंगों को बढ़ा देती है . Delhi earthquake की स्थिति में इस मिट्टी के कारण इमारतों को अधिक नुकसान हो सकता है . अध्ययनों के अनुसार, NCR में रोहतक 384.03 cm/sec² और सोनीपत जैसे इलाकों में भी उच्च पीक ग्राउंड एक्सेलेरेशन (PGA) दर्ज किया गया है .
Delhi Earthquake: क्या दिल्ली में बड़ा भूकंप आ सकता है?
Delhi earthquake के इतिहास को देखें तो सबसे बड़ा ज्ञात झटका 15 जुलाई 1720 को आया था, जिसकी तीव्रता 6.5 से 7.4 के बीच आंकी गई है . इसके अलावा, 1803 का मथुरा भूकंप (तीव्रता 6.8) और 1960 का गुड़गांव भूकंप ने भी दिल्ली को प्रभावित किया .
एक अध्ययन के अनुसार, दिल्ली क्षेत्र में 1800 से 2024 के बीच 3.0 से 8.6 तीव्रता के 574 भूकंपीय घटनाएं दर्ज की गई हैं . इससे पता चलता है कि दिल्ली और उसके आसपास मध्यम से बड़े भूकंप की संभावना बनी रहती है .
एक बड़ा आंकड़ा: 8.9 मिलियन इमारतें खतरे में
एक हालिया अध्ययन में, वैज्ञानिकों ने MDF और DSRF (दिल्ली-सरगोधा रिज फॉल्ट) पर 6.0 तीव्रता के संभावित भूकंप के लिए दिल्ली-NCR में 8.9 मिलियन इमारतों के नुकसान का आकलन किया . उन्होंने पाया कि इस परिदृश्य में 38% इमारतें क्षतिग्रस्त हो सकती हैं . सबसे अधिक नुकसान रोहतक (64%) में होने की संभावना है .
Delhi Earthquake: कितनी सुरक्षित हैं दिल्ली की इमारतें?
Delhi earthquake की आशंका को देखते हुए सबसे बड़ी चिंता इमारतों की मजबूती को लेकर है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि दिल्ली की 70-80% इमारतें भूकंपरोधी मानकों के अनुसार नहीं बनी हैं . 1720 के महाविनाशकारी Delhi earthquake के पांच महीनों बाद तक झटके महसूस किए गए थे .
क्या है भूकंपरोधी इमारतों का मानक?
भारत में बिल्डिंग कोड के अनुसार, सभी नई इमारतों को IS 1893 (भूकंपरोधी डिजाइन मानदंड) का पालन करना अनिवार्य है . सुप्रीम कोर्ट ने 2025 में एक आदेश दिया था कि 100 या उससे अधिक लोगों वाली सभी इमारतों पर उनके भूकंपरोधी स्तर (ऑपरेशनल, इमीडिएट ऑक्यूपेंसी, लाइफ सेफ्टी, या कोलैप्स प्रिवेंशन) का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए . हालांकि, व्यवहार में इसका पालन नहीं होता .
बायर्स को क्या करना चाहिए?
विशेषज्ञों के अनुसार, फ्लैट खरीदने से पहले बिल्डिंग की स्ट्रक्चरल डिजाइन, मिट्टी रिपोर्ट और IS कोड (456, 1893, 13920, 16700) के अनुपालन की जांच करनी चाहिए . 20वीं मंजिल से ऊपर फ्लैट खरीदते समय बिल्डिंग मूवमेंट टेस्ट और विंड फोर्स को भी ध्यान में रखना चाहिए .
Delhi Earthquake: क्या दिल्ली भूकंप से निपटने के लिए तैयार है?
Delhi earthquake की तैयारी को लेकर विशेषज्ञों की राय मिली-जुली है। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) द्वारा दिल्ली में माइक्रोजोनेशन का काम किया गया है, ताकि भूकंपीय खतरे का बेहतर आकलन हो सके . हालांकि, कमजोर इमारतों और कानूनों के पालन में कमी के कारण Delhi earthquake के दौरान बड़े पैमाने पर जान-माल के नुकसान की आशंका बनी है . इससे भी महत्वपूर्ण यह है कि अधिकांश लोगों को अपनी इमारत के भूकंपरोधी स्तर (डिज़ाइन लेवल) के बारे में जानकारी नहीं है, जो एक गंभीर समस्या है .


