Madhukam Land Dispute राजधानी रांची के रातू रोड स्थित मधुकम जमीन विवाद मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने प्रार्थी महादेव उरांव को कब्जा दिलाने से संबंधित 22 अक्टूबर 2024 का अपना पूर्व आदेश वापस लेते हुए उसे कानूनी रूप से प्रभावहीन घोषित कर दिया। साथ ही महादेव उरांव पर 12 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है । इस फैसले से विवादित जमीन पर रह रहे 12 परिवारों को बड़ी राहत मिली है।
Madhukam Land Dispute: महत्वपूर्ण तथ्य छिपाकर लिया था अदालत का आदेश
जस्टिस राजेश शंकर की अदालत ने कहा कि महादेव उरांव ने पूर्व में दायर रिट याचिका में कई महत्वपूर्ण तथ्य जानबूझकर छिपाए थे। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी न्यायालय से तथ्य छिपाकर आदेश प्राप्त करना गंभीर अपराध है और ऐसे आदेश कानून की नजर में टिक नहीं सकते ।
1.08 करोड़ रुपये के समझौते की जानकारी नहीं दी
सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह तथ्य आया कि 2019 से 2020 के बीच महादेव उरांव ने विवादित जमीन को लेकर 11 सेटलमेंट एग्रीमेंट किए थे। इन समझौतों के तहत उन्होंने जमीन पर रह रहे 12 लोगों से लगभग 1.08 करोड़ रुपये प्राप्त किए थे ।
अदालत ने कहा कि यह जानकारी सीधे मामले से जुड़ी थी, लेकिन इसे जानबूझकर याचिका में छिपाया गया। इतना ही नहीं, जिन 12 परिवारों का इस मामले में सीधा हित जुड़ा था, उन्हें भी रिट याचिका में पक्षकार नहीं बनाया गया ।
12 परिवारों को मिलेगा मुआवजा
हाईकोर्ट ने महादेव उरांव पर लगाए गए 12 लाख रुपये के जुर्माने को चार सप्ताह के भीतर 12 प्रभावित परिवारों में बांटने का आदेश दिया है। प्रत्येक परिवार को एक-एक लाख रुपये दिए जाएंगे ।
सीओ की कार्रवाई पर अदालत ने जताई नाराजगी
सुनवाई के दौरान अदालत ने हेहल के तत्कालीन अंचलाधिकारी (सीओ) की कार्यशैली पर भी कड़ी टिप्पणी की ।
अदालत ने कहा कि हाईकोर्ट ने मकान तोड़ने का कोई आदेश नहीं दिया था। सीओ को केवल नोटिस जारी कर कानूनी प्रक्रिया पूरी करनी थी, लेकिन उन्होंने आगे बढ़कर मकानों को ध्वस्त करने की कार्रवाई शुरू कर दी। कोर्ट ने भविष्य में न्यायालय के आदेशों का सही तरीके से पालन करने और कानूनी प्रक्रिया का पालन करने की चेतावनी भी दी ।
अवमानना याचिका भी हुई खारिज
महादेव उरांव ने यह आरोप लगाते हुए अवमानना याचिका दायर की थी कि हेहल के सीओ ने हाईकोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया। लेकिन सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि मूल आदेश ही महत्वपूर्ण तथ्य छिपाकर प्राप्त किया गया था। इसी आधार पर अदालत ने अवमानना याचिका को भी खारिज कर दिया ।
फैसले का महत्व
इस फैसले को न्यायालय द्वारा तथ्यों को छिपाकर आदेश लेने के मामलों पर सख्त संदेश माना जा रहा है । अदालत ने स्पष्ट कहा कि जो व्यक्ति महत्वपूर्ण तथ्य छिपाकर आदेश प्राप्त करता है, वह न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग करता है और उसे किसी भी प्रकार की राहत नहीं दी जा सकती । साथ ही मधुकम जमीन विवाद में रह रहे 12 परिवारों को तत्काल राहत मिली है, जबकि आगे का विवाद अब सक्षम न्यायालय में कानूनी प्रक्रिया के तहत तय होगा।
बाहरी संसाधन
- झारखंड हाईकोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट: https://jharkhandhighcourt.nic.in
- भारत के सर्वोच्च न्यायालय: https://main.sci.gov.in


